भाव कारकत्वों का वर्गीकरण - भाग 4
इस पाठ में हम संबंधों के भाव सप्तम भाव और परिवर्तन के भाव अष्टम भाव के बारे में जानेंगे।
7. सप्तम भाव (सप्तम भाव) - "कलत्र/जाया भाव"
स्वभाव: यह एक केंद्र और मारक स्थान है। यह जातक के अलावा अन्य लोगों को दर्शाता है।
| श्रेणी | कारकत्व |
|---|---|
| व्यक्तिगत | कोशिश, कामेच्छा (Desires), कूटनीति और दूसरों के साथ संबंध। |
| शारीरिक | प्रजनन अंग, मूत्राशय (Bladder) और गुर्दे का हिस्सा। |
| सामाजिक | जीवनसाथी (Spouse), व्यावसायिक साझेदार (Business Partner) और खुले शत्रु। |
| अन्य | विवाह, व्यापार, विदेश यात्राएं और अनुबंध (Agreements)। |
8. अष्टम भाव (अष्टम भाव) - "आयु/रंध्र भाव"
स्वभाव: यह एक दुस्थान और रहस्यमयी भाव है। यह अचानक होने वाली घटनाओं को दर्शाता है।
| श्रेणी | कारकत्व |
|---|---|
| व्यक्तिगत | मानसिक पीड़ा, भय, शोध (Research) और पिछले जन्मों का कर्म। |
| शारीरिक | आयु (Longevity), मृत्यु का कारण और उत्सर्जन अंग। |
| अन्य | विरासत (Inheritance), बीमा, गुप्त विद्या (Occult) और अचानक लाभ-हानि। |