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ज्योतिष पाठ - भाव कारकत्वों का वर्गीकरण


इस पाठ में हम संबंधों के भाव सप्तम भाव और परिवर्तन के भाव अष्टम भाव के बारे में जानेंगे।

7. सप्तम भाव (सप्तम भाव) - "कलत्र/जाया भाव"

स्वभाव: यह एक केंद्र और मारक स्थान है। यह जातक के अलावा अन्य लोगों को दर्शाता है।

श्रेणीकारकत्व
व्यक्तिगतकोशिश, कामेच्छा (Desires), कूटनीति और दूसरों के साथ संबंध।
शारीरिकप्रजनन अंग, मूत्राशय (Bladder) और गुर्दे का हिस्सा।
सामाजिकजीवनसाथी (Spouse), व्यावसायिक साझेदार (Business Partner) और खुले शत्रु।
अन्यविवाह, व्यापार, विदेश यात्राएं और अनुबंध (Agreements)।

8. अष्टम भाव (अष्टम भाव) - "आयु/रंध्र भाव"

स्वभाव: यह एक दुस्थान और रहस्यमयी भाव है। यह अचानक होने वाली घटनाओं को दर्शाता है।

श्रेणीकारकत्व
व्यक्तिगतमानसिक पीड़ा, भय, शोध (Research) और पिछले जन्मों का कर्म।
शारीरिकआयु (Longevity), मृत्यु का कारण और उत्सर्जन अंग।
अन्यविरासत (Inheritance), बीमा, गुप्त विद्या (Occult) और अचानक लाभ-हानि।

नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।