OnlineJyotish.com

तंत्रोक्त नवग्रह मंत्र

सभी 9 मंत्र।

इस संग्रह में प्रत्येक ग्रह के लिए बीजाक्षरों वाला एक मंत्र है। “तंत्रोक्त” का अर्थ तांत्रिक ग्रंथ-परंपरा में बताया गया है। ये साधारण नाम-नमस्कार से लंबे मंत्र हैं।

देवनागरी में पाठ

सूर्य

ॐ ह्सौः श्रीं आं ग्रहाधिराजाय आदित्याय स्वाहा ॥ 1 ॥

चंद्र

ॐ श्रीं क्रीं ह्रां चं चन्द्राय नमः ॥ 2 ॥

मंगल

ऐं ह्सौः श्रीं द्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा ॥ 3 ॥

बुध

ॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा ॥ 4 ॥

गुरु

ॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये
बृहस्पतये ब्रींठः ऐंठः श्रींठः स्वाहा ॥ 5 ॥

शुक्र

ॐ ऐं जं गं ग्रहेश्वराय शुक्राय नमः ॥ 6 ॥

शनि

ॐ ह्रीं श्रीं ग्रहचक्रवर्तिने शनैश्चराय क्लीं ऐंसः स्वाहा ॥ 7 ॥

राहु

ॐ क्रीं क्रीं हूँ हूँ टं टङ्कधारिणे
राहवे रं ह्रीं श्रीं भैं स्वाहा ॥ 8 ॥

केतु

ॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा ॥ 9 ॥

पाठ का प्रसंग और भाव

बीजाक्षर साधना में प्रयुक्त ध्वनियाँ हैं; उनका साधारण वाक्य की तरह अनुवाद नहीं होता। देवता के नाम से मंत्र का संबोधन समझा जा सकता है। औपचारिक मंत्र-साधना की विधि और उच्चारण गुरु या जानकार आचार्य से सीखें।

स्तुति के अंत में आने वाली फलश्रुति पाठ से जुड़े आशीर्वाद और मंगलकामनाएँ बताती है। वह आस्था की भाषा है; उसे बीमारी ठीक होने, धन मिलने या किसी हानि से निश्चित बचाव की गारंटी न मानें। यहाँ दिया परिचय भाव समझाने के लिए है, हर शब्द का अनुवाद नहीं।

पढ़ने की विधि

पहले कुछ पंक्तियाँ धीरे पढ़ें। एक दंड (।) विराम और दो दंड (॥) श्लोक की समाप्ति दिखाते हैं। क्रमांक पाठ के श्लोक बताते हैं; वे अनिवार्य जप-संख्या नहीं हैं।

उच्चारण और पाठांतर

संस्कृत में छोटे-बड़े स्वर, अनुस्वार, विसर्ग और संयुक्त अक्षरों पर ध्यान दें। किसी शब्द का उच्चारण स्पष्ट न हो तो जानकार पाठक से सुनें। अलग परंपराओं में शब्द या क्रमांकन कुछ बदल सकता है।

क्या पूरी अनुष्ठान-विधि करनी होगी?

परिचय और पाठ को भक्तिपरक साहित्य के रूप में पढ़ सकते हैं। मंत्र-दीक्षा, न्यास और विस्तृत अनुष्ठान की विधियाँ परंपरा के अनुसार अलग होती हैं। इस पृष्ठ को उन सभी विधियों का प्रशिक्षण न मानें।

संदर्भ: संस्कृत डॉक्युमेंट्स पर इस पाठ का संस्करण। मुख्य पाठ पर ध्यान रखने के लिए अलग विनियोग, न्यास और ग्रंथ-समापन की पंक्तियाँ यहाँ नहीं जोड़ी गई हैं।

जो लोग अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए OnlineJyotish.com Exclusive और Premium जन्मकुंडली प्रदान करता है। 400 से अधिक पृष्ठों वाली इस विस्तृत जन्मकुंडली में प्रत्येक भाव का विश्लेषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह, संतान, नौकरी एवं करियर, भाग्य और जीवन के उद्देश्य से संबंधित विशेष विश्लेषण, योग, दोष एवं उनके उपायों का संपूर्ण विवरण, षड्वर्ग फल, ग्रह अवस्थाओं के फल, अष्टकवर्ग विश्लेषण एवं फल, विंशोपक बल और उनके परिणाम, 100 वर्षों के दशा, अंतर्दशा एवं प्रत्यंतरदशा फल, 100 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के गोचर की तिथियाँ तथा अगले 10 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के विस्तृत गोचर फल सहित अनेक विशेष जानकारियाँ सम्मिलित हैं। यह 400 से अधिक पृष्ठों वाली एक विस्तृत बृहत् जन्मकुंडली है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके कुछ ही क्षणों में अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें।

अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें
नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।