सभी 5 क्रमांकित श्लोक।
इस स्तोत्र में बुध के पच्चीस नाम और गुण दिए गए हैं। छोटा नाम-आधारित पाठ चाहने वाले इसे बुध कवच के साथ पढ़ सकते हैं।
देवनागरी में पाठ
बुधो बुद्धिमतां श्रेष्ठो बुद्धिदाता धनप्रदः ।
प्रियङ्गुकलिकाश्यामः कञ्जनेत्रो मनोहरः ॥ 1 ॥
ग्रहोपमो रौहिणेयो नक्षत्रेशो दयाकरः ।
विरुद्धकार्यहन्ता च सौम्यो बुद्धिविवर्धनः ॥ 2 ॥
चन्द्रात्मजो विष्णुरूपी ज्ञानी ज्ञो ज्ञानिनायकः ।
ग्रहपीडाहरो दारपुत्रधान्यपशुप्रदः ॥ 3 ॥
लोकप्रियः सौम्यमूर्तिर्गुणदो गुणिवत्सलः ।
पञ्चविंशतिनामानि बुधस्यैतानि यः पठेत् ॥ 4 ॥
स्मृत्वा बुधं सदा तस्य पीडा सर्वा विनश्यति ।
तद्दिने वा पठेद्यस्तु लभते स मनोगतम् ॥ 5 ॥
पाठ का प्रसंग और भाव
बुद्धिदाता नाम समझ देने वाले का भाव रखता है। चंद्रात्मज चंद्रमा के पुत्र और सौम्यमूर्ति सौम्य स्वरूप की ओर संकेत करते हैं। समापन में स्मरण और पाठ की महिमा कही गई है।
स्तुति के अंत में आने वाली फलश्रुति पाठ से जुड़े आशीर्वाद और मंगलकामनाएँ बताती है। वह आस्था की भाषा है; उसे बीमारी ठीक होने, धन मिलने या किसी हानि से निश्चित बचाव की गारंटी न मानें। यहाँ दिया परिचय भाव समझाने के लिए है, हर शब्द का अनुवाद नहीं।
पढ़ने की विधि
पहले कुछ पंक्तियाँ धीरे पढ़ें। एक दंड (।) विराम और दो दंड (॥) श्लोक की समाप्ति दिखाते हैं। क्रमांक पाठ के श्लोक बताते हैं; वे अनिवार्य जप-संख्या नहीं हैं।
उच्चारण और पाठांतर
संस्कृत में छोटे-बड़े स्वर, अनुस्वार, विसर्ग और संयुक्त अक्षरों पर ध्यान दें। किसी शब्द का उच्चारण स्पष्ट न हो तो जानकार पाठक से सुनें। अलग परंपराओं में शब्द या क्रमांकन कुछ बदल सकता है।
क्या पूरी अनुष्ठान-विधि करनी होगी?
परिचय और पाठ को भक्तिपरक साहित्य के रूप में पढ़ सकते हैं। मंत्र-दीक्षा, न्यास और विस्तृत अनुष्ठान की विधियाँ परंपरा के अनुसार अलग होती हैं। इस पृष्ठ को उन सभी विधियों का प्रशिक्षण न मानें।
संदर्भ: संस्कृत डॉक्युमेंट्स पर इस पाठ का संस्करण। मुख्य पाठ पर ध्यान रखने के लिए अलग विनियोग, न्यास और ग्रंथ-समापन की पंक्तियाँ यहाँ नहीं जोड़ी गई हैं।