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गुरु (बृहस्पति) कवचम् हिंदी में – शिक्षा, धन और शत्रु दोष से सुरक्षा


Guru (Brihaspati) Kavacham in Hindi (Devanagari)

यह गुरु (बृहस्पति) कवचम् ब्रह्मयामल ग्रंथ से लिया गया एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जो देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने, शिक्षा, धर्म, सत्य और समृद्धि के लिए पाठ किया जाता है। जीवन में सफलता, धन, आध्यात्मिक प्रगति, और मानसिक बल के लिए इसका पाठ उत्तम माना गया है।
कवच में शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा के लिए गुरु देव से प्रार्थना की जाती है। इसे नियमित रूप से या विशेषकर गुरुवार को पढ़ने से शत्रु, रोग, और आर्थिक हानि से बचाव होता है। जन्मकुंडली में गुरु के कमजोर या नीच स्थिति, या गुरु चांडाल योग वाले जातकों के लिए यह कवच और भी उपयोगी है।

श्रीगणेशाय नमः।
अस्य श्रीबृहस्पति कवचस्तोत्रमन्त्रस्य ईश्वर ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, गुरु देवता, "गं" बीज, श्रीशक्ति,
"क्लीं" कीलक, गुरु प्रीति हेतु जप्ये विनियोगः।
अभीष्टफलदं देवं सर्वज्ञं सुरपूजितम्।
अक्षमालाधरं शान्तं प्रणमामि बृहस्पतिम्॥ १ ॥

बृहस्पतिः शिरः पातु ललाटं पातु मे गुरुः।
कर्णौ सुरगुरुः पातु नेत्रे मेऽभीष्टदायकः॥ २ ॥

जिह्वां पातु सुराचार्यः नासां मे वेदपारगः।
मुखं मे पातु सर्वज्ञः कण्ठं मे देवतागुरुः॥ ३ ॥

भुजावांगिरसः पातु करौ पातु शुभप्रदः।
स्तनौ मे पातु वागीशः कूक्षिं मे शुभलक्षणः॥ ४ ॥

नाभिं देवगुरुः पातु मध्यं पातु सुखप्रदः।
कटिं पातु जगद्वन्द्यः ऊरू मे पातु वाक्पतिः॥ ५ ॥

जानुजंघे सुराचार्यः पादौ विश्वात्मकस्तथा।
अन्यानि यानि चांगानि रक्षेन्मे सर्वतो गुरुः॥ ६ ॥

इत्येतत्कवचं दिव्यं त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः।
सर्वान्कामानवाप्नोति सर्वत्र विजयी भवेत्॥ ७ ॥

|| इति श्रीब्रह्मयामल ग्रन्थोक्तं बृहस्पति कवचम् सम्पूर्णम् ||

गुरु कवचम् के लाभ:

  • शिक्षा में सफलता, स्मृति व विद्या में वृद्धि
  • आर्थिक हानि, कर्ज और शत्रु बाधा से सुरक्षा
  • रोग और मानसिक कमजोरी से रक्षा
  • कमजोर या नीच बृहस्पति व गुरु चांडाल योग में विशेष लाभकारी
  • गुरु के ४, ८, १२वें गोचर में पाठ अवश्य करें
  • धन, सौभाग्य और धर्म में वृद्धि

नोट: गुरुवार, बृहस्पति के विशेष गोचर या बृहस्पति ग्रह निर्बल होने पर यह कवच अवश्य पढ़ें।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।