|| शनि वज्रपंजर कवचम् ||
Shani Vajra Panjara Kavacham
यहाँ प्रस्तुत "शनि वज्रपंजर कवच" ब्रह्मांड पुराण में वर्णित सबसे शक्तिशाली शनि कवचों में से एक है। यह कवच शनिदेव के अशुभ प्रभाव, शत्रुओं, रोगों, बाधाओं और जीवन की हर समस्या से सुरक्षा प्रदान करने के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। कहा जाता है कि स्वयं ब्रह्मा जी ने यह कवच नारद मुनि को उपदेश दिया था।
इस कवच में शनिदेव को "नीलाम्बर", "नीलवपु", "किरीटी", "गृद्ध्रस्थ", "धनुष्मान", "सूर्यसुत" आदि नामों से स्तुत किया गया है। यह नाम शनिदेव की महिमा और शक्ति का वर्णन करते हैं।
कवच के प्रत्येक श्लोक में शरीर के अलग-अलग अंगों की रक्षा के लिए शनिदेव से प्रार्थना की जाती है — सिर से लेकर पाँव तक। यह न केवल रोगों और शत्रुओं से बचाता है, बल्कि मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास भी बढ़ाता है।
मान्यता है कि शनिवार अथवा शनि के कमजोर या पीड़ित होने पर इस कवच का नियमित पाठ करने से आयु, स्वास्थ्य, धन-संपत्ति, और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
श्री गणेशाय नमः॥
नीलाम्बरः नीलवपुः किरीटी गृद्ध्रस्थितः त्रासकरः धनुष्मान्।
चतुर्भुजः सूर्यसुतः प्रसन्नः सदा मम स्यात् वरदः प्रशान्तः॥ 1 ॥
ब्रह्मा उवाच:
शृणुध्वं ऋषयः सर्वे शनिपीडाहरणं महत्।
कवचं शनिराजस्य सौरिरिदमअनुत्तमम्॥ 2 ॥
कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम्।
शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम्॥ 3 ॥
ॐ श्रीशनैश्चरः पातु भालं मे सूर्यनन्दनः।
नेत्रे छायात्मजः पातु पातु कर्णौ यमानुजः॥ 4 ॥
नासां वैवस्वतः पातु मुखं मे भास्करः सदा।
स्निग्धकण्ठश्च मे कण्ठं भुजौ पातु महाभुजः॥ 5 ॥
स्कन्धौ पातु शनिश्चैव करौ पातु-शुभप्रदः।
वक्षः पातु यमभ्राता कक्षिं पात्वसितस्तथा॥ 6 ॥
नाभिं ग्रहपतिः पातु मन्दः पातु कटिं तथा।
ऊरू ममान्तकः पातु यमः जानुयुगं तथा॥ 7 ॥
पदौ मन्दगतिः पातु सर्वाङ्गं पातु पिप्पलः।
अङ्गोपाङ्गानि सर्वाणि रक्षेत् मे सूर्यनन्दनः॥ 8 ॥
इत्येतत् कवचं दिव्यं पठेत् सूर्यसुतस्य यः।
न तस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्यजः॥ 9 ॥
व्यय- जन्म-द्वितीयस्थो मृत्युस्थानगतोऽपि वा।
कलत्रस्थो गतो वा अपि सुप्रीतस्तु सदा शनिः॥ 10 ॥
अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्मद्वितीयगे।
कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्॥ 11 ॥
इत्येतत्कवचं दिव्यं सौरिर्यन्मिर्मितं पुरा।
द्वादशाष्टमजन्मस्थदोषान्नाशयते सदा।
जन्मलग्नस्थितान् दोषान् सर्वान्नाशयते प्रभुः॥ 12 ॥
|| इति श्री ब्रह्मांड पुराणे ब्रह्म-नारद संवादे शनि वज्रपंजर कवच सम्पूर्णम् ||
शनि के अशुभ प्रभाव, शत्रुओं, रोगों, और हर प्रकार की बाधाओं से सुरक्षा हेतु यह अति शक्तिशाली कवच है। शनिवार अथवा शनि पीड़ा के समय श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करें।
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