onlinejyotish.com free Vedic astrology portal

सूर्य वज्रपंजर कवचम् हिंदी में | स्वास्थ्य के लिए शक्तिशाली सूर्य कवच

Surya Vajra Panjar Kavacham

परिचय: "सूर्य वज्रपंजरा कवच" एक अत्यंत दिव्य एवं शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसका पाठ करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ दूर होती हैं, रोग और शत्रुओं से रक्षा मिलती है, तथा संपूर्ण जीवन में तेज़ और ऊर्जा प्राप्त होती है। विशेषकर जो लोग बार-बार बीमार रहते हैं या दुर्भाग्य, बाधा, शत्रु या ग्रह दोषों से परेशान हैं, उनके लिए यह कवच अत्यंत फलदायक है।

नोट: इस स्तोत्र में कई बीजाक्षर हैं। शुद्ध उच्चारण बहुत आवश्यक है। बेहतर परिणाम के लिए इसे योग्य विद्वान/पंडित से सुनकर ही पढ़ें।

|| मूल स्तोत्रम् ||

श्रीभैरव उवाच
यो देवदेवो भगवान् भास्करो महसां निधिः।
गायत्रीनायकः भास्वान् सविता इति प्रगीयते॥ 1॥

तस्याहं कवचं दिव्यं वज्रपञ्जरकाभिधम्।
सर्वमन्त्रमयं गुह्यं मूलविद्यारहस्यकम्॥ 2॥

सर्वपापापहं देवि दुःखदारिद्र्यनाशनम्।
महाकुष्ठहरं पुण्यं सर्वरोगनिवारणम्॥ 3॥

सर्वशत्रुसमूहघ्नं संग्रामे विजयप्रदम्।
सर्वतेजोमयं सर्वदेवदानवपूजितम्॥ 4॥

रणे राजभये घोरे सर्वोपद्रवनाशनम्।
मातृकावेष्टितं वर्म भैरवानननिर्गतम्॥ 5॥

ग्रहपीडाहरं देवि सर्वसंकटनाशनम्।
धारणादस्य देवेशि ब्रह्मा लोकपितामहः॥ 6॥

विष्णुर्नारायणो देवि रणे दैत्याञ्जिष्यति।
शंकरः सर्वलोकेशो वासवोऽपि दिवस्पतिः॥ 7॥

ओषधीशः शशी देवि शिवोऽहं भैरवेश्वरः।
मन्त्रात्मकं परं वर्म सवितुः सारमुत्तमम्॥ 8॥

यो धारयेद् भुजे मूर्ध्नि रविवारे महेश्वरि।
स राजवल्लभो लोके तेजस्वी वैरिमर्दनः॥ 9॥

बहुनोक्तेन किं देवि कवचस्यास्य धारणात्।
इह लक्ष्मीधनारोग्य-वृद्धिर्भवति नान्यथा॥ 10॥

परत्र परमां मुक्तिर्देवानामपि दुर्लभा।
कवचस्यास्य देवेशि मूलविद्यामयस्तु च॥ 11॥

वज्रपञ्जरकाख्यस्य मुनिर्ब्रह्मा समीरितः।
गायत्र्यं छन्द इत्युक्तं देवता सविता स्मृतः॥ 12॥

माया बीजं शरच्च शक्तिर्नमः कीलकमीश्वरी।
सर्वार्थसाधने देवि विनियोगः प्रकीर्तितः॥ 13॥

ॐ अं आं इं ईं शिरः पातु ॐ सूर्यः मन्त्रविग्रहः।
उं ऊं ऋं ॠं ललाटं मे ह्रां रविः पातु चिन्मयः॥ 14॥

ळुं ळूं ऐं ऐं पातु नेत्रे ह्रीं ममारुणसारथिः।
ॐ औं अं अः श्रुती पातु सः सर्वजगदीश्वरः॥ 15॥

कं खं गं घं पातु गण्डौ सूं सूर्यः सुरपूजितः।
चं छं जं झं च नासां मे पातु यार्म् अर्च्यमा प्रभुः॥ 16॥

टं ठं डं ढं मुखं पायाद् यं योगीश्वरपूजितः।
तं थं दं धं गलं पातु नं नारायणवल्लभः॥ 17॥

पं फं बं भं मम स्कन्धौ पातु मं महसां निधिः।
यं रं लं वं भुजौ पातु मूलं सकनायकः॥ 18॥

शं षं सं हं पातु वक्षः मूलमन्त्रमयो ध्रुवः।
ळं क्षः कुक्शिं सदा पातु ग्रहाथो दिनेश्वरः॥ 19॥

ङं ञं णं नं मं मे पातु पृष्ठं दिवसनायकः।
अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं नाभिं पातु तमोपहः॥ 20॥

ळुं ळूं ऐं ऐं ॐ औं अं अः लिंगं मेऽव्याद् ग्रहेश्वरः।
कं खं गं घं चं छं जं झं कटिं भानुर्ममावतु॥ 21॥

टं ठं डं ढं तं थं दं धं जानुं भास्वान् ममावतु।
पं फं बं भं यं रं लं वं जंघे मेऽव्याद् विभाकरः॥ 22॥

शं षं सं हं ळं क्षः पातु मूलं पादौ त्रयितनुः।
ङं ञं णं नं मं मे पातु सविता सकलं वपुः॥ 23॥

सोमः पूर्वे च मां पातु भौमोग्नौ मां सदावतु।
बुधो मां दक्षिणे पातु नैऋत्यां गुररेव माम्॥ 24॥

पश्चिमे मां सितः पातु वायव्यां मां शनैश्चरः।
उत्तरे मां तमः पायादैशान्यां मां शिखी तथा॥ 25॥

ऊर्ध्वं मां पातु मिहिरो मामधस्तां जगत्पतिः।
प्रभाते भास्करः पातु मध्याह्ने मां दिनेश्वरः॥ 26॥

सायं वेदप्रियः पातु निशीथे विस्फुरापतिः।
सर्वत्र सर्वदा सूर्यः पातु मां चक्रनायकः॥ 27॥

रणे राजकुले द्यूते विवादे शत्रुसंकटे।
संगामे च ज्वरे रोगे पातु मां सविता प्रभुः॥ 28॥

ॐ ॐ ॐ उत ॐउऔम् ह स म यः सूरोऽवतन्मां भयात्।
ह्रां ह्रीं ह्रुं हहहा हसौः हसहसौः हंसोऽवतात् सर्वतः।
सः सः सः सससा नृपाद्वनचराच्चौराद्रणात् संकटात्।
पायान्मां कुलनायकोऽपि सविता ॐ ह्रीं ह सौं सर्वदा॥ 29॥

द्रां द्रीं द्रूं दधनं तथा च तरणिर्भाम्भैर्भयात् भास्करो।
रां रीं रूं रुरुरूं रविर्ज्वरभयात् कुष्ठाच्च शूलामयात्।
अं अं आं विविवीं महामयभयं मां पातु मार्तंडको।
मूलव्याप्ततनुः सदावतु परं हंसः सहस्रांशुमान्॥ 30॥

इति श्रीकवचं दिव्यं वज्रपञ्जरकाभिधम्।
सर्वदेवरहस्यम् च मातृकामन्त्रवेष्टितम्॥ 31॥

महारोगभयघ्नं च पापघ्नं मनमुखोदितम्।
गुह्यं यशस्करं पुण्यं सर्वश्रेयोस्करं शिवे॥ 32॥

लिखित्वा रविवारे तु तिष्ये वा जन्मभे प्रिये।
अष्टगन्धेन दिव्येन सुधाक्षीरेण पार्वति॥ 33॥

अर्कक्षीरेण पुण्येन भुर्जत्वचि महेश्वरी।
कनकीकाष्ठलेखन्या कवचं भास्करोदयम्॥ 34॥

श्वेतसूत्रेण रक्तेन श्यामेनावेष्टयेद् गुटीं।
सुवर्णेनाथ संवेष्ट्य धारयेन् मूर्ध्नि वा भुजे॥ 35॥

रणे रिपूञ्जयेद् देवि वादे सदसि जेष्यति।
राजमान्यो भवेनित्यं सर्वतेजोमयो भवेत्॥ 36॥

कण्ठस्था पुत्रदा देवि कुक्शिस्था रोगनाशिनी।
शिरःस्था गुटिका दिव्या राकालोकवशंकरि॥ 37॥

भुजस्था धनदा नित्यं तेजोबुद्धिविवर्धिनी।
वंध्या वा काकवंध्या वा मृतवत्सा च याङ्गना॥ 38॥

कण्ठे सा धारयेनित्यं बहुपुत्रा प्रजायये।
यस्य देहे भवेनित्यं गुटिकैषा महेश्वरी॥ 39॥

महास्त्राणीन्द्रमुक्तानि ब्रह्मास्त्रादीनि पार्वति।
तद्देहं प्राप्य व्यर्थानि भविष्यन्ति न संशयः॥ 40॥

त्रिकालं यः पठेन्नित्यं कवचं वज्रपञ्जरम्।
तस्य सद्यो महादेवी सविता वरदो भवेत्॥ 41॥

अज्ञात्वा कवचं देवि पूजयेद्यस्त्रयीतनुम्।
तस्य पूजार्जितं पुण्यं जन्मकोटिषु निष्फलम्॥ 42॥

शतावर्तन पठेद्वर्म सप्तम्यां रविवासरे।
महाकुष्ठार्दितो देवि मुच्यते नात्र संशयः॥ 43॥

निरोगो यः पठेद्वर्म दरिद्रो वज्रपञ्जरम्।
लक्ष्मीवान्जायते देवि सद्यः सूर्यप्रसादतः॥ 44॥

भक्त्या यः प्रपठेद् देवि कवचं प्रत्यहं प्रिये।
इह लोके श्रियं भुक्त्वा देहान्ते मुक्तिमाप्नुयात्॥ 45॥

इति श्रीरुद्रयामले तन्त्रे श्रीदेविरहस्ये वज्रपञ्जराख्यसूर्यकवचनिरूपणं त्रयस्त्रिंशः पटलः॥ 46॥

|| सूर्य वज्रपंजरा कवचम् के लाभ ||

  • रोग, शत्रु और ग्रह दोषों से सुरक्षा
  • स्वास्थ्य में चमत्कारी सुधार
  • मन, बुद्धि और आत्मविश्वास की वृद्धि
  • सम्पत्ति, सफलता, संतान, और आयु में वृद्धि
  • जीवन में तेज़, ओज और सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पाठ विधि: रविवार, विशेष तिथि या सूर्यग्रहण आदि के समय, या नित्य श्रद्धा के साथ सुबह स्नान कर के पूर्व दिशा की ओर मुख करके, इस कवच का पाठ करें। सर्वोत्तम फल के लिए किसी योग्य पंडित से उच्चारण जरूर सीखें।


Horoscope

Free Astrology

मन में कोई गहरा प्रश्न है? तुरंत उत्तर पाएं।

प्रश्न ज्योतिष के प्राचीन सिद्धांतों का उपयोग करके, करियर, प्रेम, या जीवन के बारे में अपने सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के लिए तत्काल दैवीय मार्गदर्शन प्राप्त करें।

तुरंत अपना उत्तर पाएं
Download Hindu Jyotish App now - - Free Multilingual Astrology AppHindu Jyotish App. Multilingual Android App. Available in 10 languages.

Free Vedic Horoscope with predictions

Lord Ganesha writing JanmakundaliAre you interested in knowing your future and improving it with the help of Vedic Astrology? Here is a free service for you. Get your Vedic birth chart with the information like likes and dislikes, good and bad, along with 100-year future predictions, Yogas, doshas, remedies and many more. Click below to get your free horoscope.
Get your Vedic Horoscope or Janmakundali with detailed predictions in  English,  Hindi,  Marathi,  Telugu,  Bengali,  Gujarati,  Tamil,  Malayalam,  Punjabi,  Kannada,  Russian,  German, and  Japanese.
Click on the desired language name to get your free Vedic horoscope.

Free Daily panchang with day guide

Lord Ganesha writing PanchangAre you searching for a detailed Panchang or a daily guide with good and bad timings, do's, and don'ts? Our daily Panchang service is just what you need! Get extensive details such as Rahu Kaal, Gulika Kaal, Yamaganda Kaal, Choghadiya times, day divisions, Hora times, Lagna times, and Shubha, Ashubha, and Pushkaramsha times. You will also find information on Tarabalam, Chandrabalam, Ghata day, daily Puja/Havan details, journey guides, and much more.
This Panchang service is offered in 10 languages. Click on the names of the languages below to view the Panchang in your preferred language.  English,  Hindi,  Marathi,  Telugu,  Bengali,  Gujarati,  Tamil,  Malayalam,  Punjabi,  Kannada,  French,  Russian,  German, and  Japanese.
Click on the desired language name to get your free Daily Panchang.


OnlineJyotish.com का समर्थन करें

onlinejyotish.com

onlinejyotish.com की ज्योतिष सेवाओं का उपयोग करने के लिए धन्यवाद। कृपया नीचे दिए विकल्पों से हमारे वेबसाइट विकास में सहयोग करें।

1) इस पेज को शेयर करें
Facebook, X (Twitter), WhatsApp आदि पर इस पेज को शेयर करें।
Facebook Twitter (X) WhatsApp
2) 5⭐⭐⭐⭐⭐ सकारात्मक रिव्यू दें
Google Play Store और Google My Business पर 5-स्टार पॉजिटिव रिव्यू दें।
आपका रिव्यू अधिक लोगों तक हमारी सेवाएँ पहुँचाने में मदद करता है।
3) कोई भी राशि योगदान करें
UPI या PayPal से अपनी पसंद की राशि भेजें।
UPI
PayPal Email us
✅ कॉपी हो गया!