यह संग्रह नवग्रह उपासना से जुड़े स्तोत्र, कवच और मंत्रों का है। शुरुआत के लिए नवग्रह स्तोत्र चुन सकते हैं; इसमें नौ ग्रहों को क्रम से नमस्कार किया गया है। नीचे अपने मनचाहे ग्रह का पाठ चुनें।
स्तोत्र, कवच और मंत्र में क्या अंतर है?
स्तोत्र या स्तव प्रशंसा और प्रार्थना का पाठ है। कवच रक्षा की कामना को कवच की उपमा देता है। ध्यान श्लोक देवता के रूप का वर्णन करता है। नाम-स्तोत्र में देवता के नाम पिरोए जाते हैं। मंत्र में नाम के साथ बीजाक्षर भी हो सकते हैं।
ज्योतिष में नवग्रह की श्रेणी में सूर्य, चंद्रमा, पाँच दृश्य ग्रह और राहु-केतु आते हैं। राहु-केतु चंद्रपथ के दो गणितीय बिंदु हैं। इस संग्रह के सभी पाठ सीधे वेदों से लिए गए हैं, ऐसा मानना सही नहीं; हर पृष्ठ का परिचय देखें।
सूर्य
- आदित्य हृदय स्तोत्रसभी 31 श्लोक
- सूर्य वज्रपंजर कवच45 श्लोकों का पाठ
- सूर्य मंडल स्तोत्रप्रारंभिक नमस्कार, 12 मुख्य श्लोक और समापन
- सूर्य नमस्कार के 12 मंत्रबारह नाम-नमस्कार
चंद्र
- चंद्र कवचसभी 7 क्रमांकित श्लोक
- चंद्र अट्ठाईस नाम स्तोत्रसभी 6 क्रमांकित श्लोक
मंगल
- मंगल या कुज कवचसभी 7 क्रमांकित श्लोक
- अंगारक या मंगल स्तोत्रसभी 7 क्रमांकित श्लोक
बुध
- बुध कवचसभी 7 क्रमांकित श्लोक
- बुध पच्चीस नाम स्तोत्रसभी 5 क्रमांकित श्लोक
गुरु
- गुरु या बृहस्पति कवचसभी 7 क्रमांकित श्लोक
- बृहस्पति स्तोत्रसभी 6 क्रमांकित श्लोक
शुक्र
- शुक्र कवचसभी 7 क्रमांकित श्लोक
- शुक्र स्तोत्रसभी 4 क्रमांकित श्लोक
शनि
- दशरथकृत शनि स्तोत्रसभी 11 क्रमांकित श्लोक
- शनैश्चर स्तवराजसभी 26 क्रमांकित श्लोक
- शनि वज्रपंजर कवचसभी 12 क्रमांकित श्लोक
राहु
- राहु कवचसभी 7 क्रमांकित श्लोक
- राहु पच्चीस नाम स्तोत्रसभी 6 क्रमांकित श्लोक
केतु
- केतु कवचसभी 6 क्रमांकित श्लोक
- केतु पच्चीस नाम स्तोत्रसभी 5 क्रमांकित श्लोक
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