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कुंभ साप्ताहिक राशिफल

13 सित॰ 2026 – 19 सित॰ 2026America/New_York

सप्ताह का क्रम

  1. रवि, 13 सित॰ 00:00 GMT-4 → रवि, 13 सित॰ 15:56 GMT-4

    काम में देरी या आखिरी समय का बदलाव परेशानी दे सकता है। सुधार के लिए समय रखें और महत्वपूर्ण कागज खुद पढ़कर जाँचें।

  2. रवि, 13 सित॰ 15:56 GMT-4 → बुध, 16 सित॰ 01:19 GMT-4

    किसी बड़े या शिक्षक की सलाह उपयोगी हो सकती है। पढ़ाई और दूर की यात्रा के बारे में विचार करेंगे। खर्च और ठहरने की व्यवस्था देखकर ही यात्रा तय करें।

  3. बुध, 16 सित॰ 01:19 GMT-4 → शुक्र, 18 सित॰ 13:14 GMT-4

    नौकरी या कारोबार में व्यस्तता बढ़ सकती है। पूरा और बाकी काम लिखकर रखें। देर होने की संभावना हो तो समय रहते बता दें।

  4. शुक्र, 18 सित॰ 13:14 GMT-4 → रवि, 20 सित॰ 00:00 GMT-4

    मित्र या पुराने परिचित किसी काम में सहयोग दे सकते हैं। आपको किस मदद की जरूरत है, साफ बताएँ और अपनी जिम्मेदारी भी पूरी करें।

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नौकरी और व्यापार

इन बातों में सावधानी रखें

काम का दबाव या देरी धैर्य की परीक्षा ले सकती है। नई अपेक्षाएँ पहले समझ लें और समय कम पड़ने की बात आखिरी दिन तक न रोकें।

आमदनी और खर्च

मिले-जुले संकेत

आमदनी होने पर भी घर की जरूरतों और किस्तों में पैसा निकल सकता है। इस सप्ताह जरूरी भुगतान पहले करें। साझा खर्च की बात परिवार में पहले तय कर लें।

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परिवार और दांपत्य

इन बातों में सावधानी रखें

छोटी बात का गलत अर्थ निकाला जा सकता है। फिलहाल जिस समस्या को सुलझाना है, उसी पर रहें। दो लोगों की बात में अनावश्यक रिश्तेदारों को न जोड़ें।

सेहत और आराम

इन बातों में सावधानी रखें

काम के दबाव से थकान बढ़ सकती है। जो काम रुक सकता है, उसे बाद में करें। सब कुछ अकेले करने के बजाय मदद लें और आराम का समय रखें।

पढ़ाई

इन बातों में सावधानी रखें

पढ़ाई में मन कम लग सकता है। सवालों का जवाब न मिलना या सही सामग्री न मिलना गति रोक सकता है। नए विषयों का ढेर लगाने के बजाय पढ़ा हुआ दोहराएँ।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।