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मुफ्त काल सर्प दोष / योग विश्लेषण

मुफ्त काल सर्प दोष / योग विश्लेषण

अपडेट किया गया: September 8, 2026 • पारंपरिक ज्योतिष आधारित विश्लेषण

जानें कि आपकी जन्म कुंडली में काल सर्प योग है या नहीं। परिणाम, 12 प्रकारों में से आपका प्रकार, और राहु-केतु अक्ष से प्रभावित भावों की जानकारी प्राप्त करें।

इस पारंपरिक जांच में देखा जाता है कि सात ग्रह राहु और केतु के बीच हैं या नहीं। सीमा पर स्थित ग्रहों के नियम अलग-अलग पद्धतियों में बदल सकते हैं। दोष का नाम किसी हानि या घटना को निश्चित नहीं करता; पूरी कुंडली के संदर्भ में पढ़ें।

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  • रिपोर्ट ग्रहों की स्थिति, राहु–केतु के भाव और इस संयोजन का पारंपरिक प्रकार दिखाती है।

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काल सर्प योग (दोष) को समझना

इस पारंपरिक जांच में देखा जाता है कि सात ग्रह राहु और केतु के बीच हैं या नहीं। सीमा पर स्थित ग्रहों के नियम अलग-अलग पद्धतियों में बदल सकते हैं। दोष का नाम किसी हानि या घटना को निश्चित नहीं करता; पूरी कुंडली के संदर्भ में पढ़ें।

काल सर्प दोष के 12 प्रकार

  1. Anant: राहु — भाव 1; केतु — भाव 7
  2. Kulik: राहु — भाव 2; केतु — भाव 8
  3. Vasuki: राहु — भाव 3; केतु — भाव 9
  4. Shankhpal: राहु — भाव 4; केतु — भाव 10
  5. Padma: राहु — भाव 5; केतु — भाव 11
  6. Mahapadma: राहु — भाव 6; केतु — भाव 12
  7. Takshak: राहु — भाव 7; केतु — भाव 1
  8. Karkotak: राहु — भाव 8; केतु — भाव 2
  9. Shankhchood: राहु — भाव 9; केतु — भाव 3
  10. Ghatak: राहु — भाव 10; केतु — भाव 4
  11. Vishdhar: राहु — भाव 11; केतु — भाव 5
  12. Sheshnag: राहु — भाव 12; केतु — भाव 6

इस सेवा के बारे में

इस साधन से जुड़े प्रश्नों के लिए: admin@onlinejyotish.com.

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।