शुक्र अस्त (तारा डूबना) 2026
वैदिक ज्योतिष में, शुक्र अस्त तब होता है जब प्रेम और सुख का कारक शुक्र ग्रह सूर्य के बहुत करीब आ जाता है। इस अवधि के दौरान विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
मुख्य अंश (Key Takeaways)
- घटना: शुक्र सूर्य के 10° के भीतर आ जाता है और अदृश्य हो जाता है।
- प्रभाव: प्रेम, विवाह और विलासिता की ऊर्जा कमजोर हो जाती है।
- वर्जित: विवाह, गृह प्रवेश और नए वाहन खरीदना।
- अवधि: यह आमतौर पर हर 18 महीने में एक बार लगभग 60 दिनों के लिए होता है।
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अक्षांश के आधार पर अस्त के समय में थोड़ा अंतर होता है। सटीक तिथियों के लिए अपने शहर का चयन करें।
शुक्र अस्त का ज्योतिषीय महत्व
वैदिक ज्योतिष में, शुक्र 'कलत्र कारक' (जीवनसाथी का सूचक) है। जब शुक्र सूर्य के दहन क्षेत्र में होता है, तो वह शुभ कार्यों के लिए अपना आशीर्वाद नहीं दे पाता है।
महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| शुक्र मौढ्य | वह अवस्था जहां शुक्र अपनी चमक और शक्ति खो देता है। |
| अस्त (लोप) | ग्रह का आकाश में दिखाई न देना। |
| अंध काल | मुहूर्त के लिए इसे 'अंधा' माना जाता है क्योंकि शुक्र का प्रकाश गायब होता है। |
मुहूर्त के नियम: क्या न करें?
मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार, शुक्र अस्त के दौरान निम्नलिखित कार्य वर्जित हैं:
- विवाह: यह सबसे महत्वपूर्ण प्रतिबंध है।
- उपनयन (जनेऊ): शुक्र ज्ञान का कारक है, इसलिए विद्यारंभ अनुकूल नहीं है।
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश के लिए शुक्र (सुख) के आशीर्वाद की आवश्यकता होती है।
- वाहन खरीदना: शुक्र वाहनों का कारक है। खरीदे गए वाहनों में मरम्मत आ सकती है।
शुक्र अस्त के उपाय
यदि आपकी शुक्र की दशा चल रही है, तो इस अवधि में ऊर्जा बढ़ाने के लिए:
- मंत्र: शुक्रवार को 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' का 108 बार जाप करें।
- दान: जरूरतमंदों को सफेद मिठाई, चावल या सफेद वस्त्र दान करें।
- पूजा: देवी लक्ष्मी को सफेद फूल (जैसे चमेली) चढ़ाएं।
Frequently Asked Questions
डेटा सटीकता: लाहिड़ी अयनांश और दृक सिद्धांत का उपयोग करके वैदिक ज्योतिषी श्री संतोष कुमार शर्मा द्वारा प्रमाणित।