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श्राद्ध तिथि कैलेंडर (मासिक अपराह्न तिथि)

मासिक श्राद्ध तिथि कैलेंडर 2026

सुनिश्चित करें कि आपके पितृ कार्य सही दिन पर किए जाएं। यह कैलेंडर धर्म शास्त्र के अनुसार श्राद्ध के लिए एकमात्र मान्य अपराह्न व्यापिनी तिथि की पहचान करता है।

त्वरित सारांश: महत्वपूर्ण नियम

  • नियम: श्राद्ध के लिए, सूर्योदय की तुलना में अपराह्न काल (दोपहर) में तिथि का होना आवश्यक है।
  • भ्रम: इस नियम के कारण, मानक पंचांगों में दिखने वाली तिथि और 'श्राद्ध तिथि' अक्सर अलग-अलग होती हैं।
  • समाधान: यह उपकरण आपके विशिष्ट शहर के लिए अपराह्न काल की गणना करता है और सटीक तिथि खोजता है।

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सामान्य कैलेंडर क्यों गलत होते हैं?

अधिकांश दीवार कैलेंडर दीवाली या राम नवमी जैसे त्योहारों के लिए उदय तिथि का पालन करते हैं। हालांकि, श्राद्ध (पुण्यतिथि) के लिए, शास्त्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तिथि दोपहर (अपराह्न) में हावी होनी चाहिए।

श्राद्ध शब्दावली

शब्द अर्थ
अपराह्न दिन का चौथा भाग (लगभग दोपहर 1:30 से 4:00 बजे तक)। पूर्वजों का समय।
कुतुप मुहूर्त अपराह्न के भीतर अनुष्ठान शुरू करने के लिए सबसे शुभ 48 मिनट का समय।
तिथि द्वयम् जब एक ही अपराह्न में दो तिथियां आती हैं। ऐसे में एक को चुनने के लिए विशेष तर्क की आवश्यकता होती है।
महालय पूरी तरह से पूर्वजों को समर्पित पखवाड़ा (पितृ पक्ष)।
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Frequently Asked Questions

नियमित जन्मदिन के विपरीत, श्राद्ध तिथि 'अपराह्न व्यापिनी' नियम द्वारा निर्धारित की जाती है। जो तिथि अपराह्न काल (दोपहर लगभग 1:30 बजे से 4:00 बजे तक) में होती है, वही पितृ अनुष्ठानों के लिए मान्य होती है।

इसे 'तिथि द्वयम्' कहा जाता है। ऐसे मामलों में, जिस दिन तिथि अपराह्न काल के अधिकतम हिस्से को कवर करती है, उसे चुना जाता है।

क्षय तिथि वह है जो सूर्योदय के बाद शुरू होती है और अगले सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है। श्राद्ध के लिए, यदि कोई तिथि क्षय है, तो यह टूल स्वचालित रूप से नियमों को संभालता है।

स्रोत और सटीकता: ये गणनाएं निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु ग्रंथों का कड़ाई से पालन करती हैं। वैदिक ज्योतिषी श्री संतोष कुमार शर्मा द्वारा विकसित।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।