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ग्रहों की वक्री चाल कैलेंडर 2026

ग्रहों की वक्री चाल कैलेंडर 2026

पहले से योजना बनाएं और परेशानियों से बचें। जानें कि कब बुध, शुक्र, मंगल, गुरु और शनि आसमान में उल्टी दिशा में चलते हुए प्रतीत होते हैं और आपके जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं।

मुख्य अंश (Quick Summary)

  • सिद्धांत: यह एक दृष्टिभ्रम है जहां ग्रह उल्टी दिशा में चलता हुआ प्रतीत होता है।
  • ऊर्जा: इस समय ग्रह की ऊर्जा आंतरिक और बहुत तीव्र होती है।
  • मुख्य नियम: यह पुराने अधूरे कार्यों को पूरा करने और समीक्षा (Review & Redo) का समय है।
  • सावधानी: बुध या मंगल के वक्री होने पर नए काम शुरू करने से बचें।

वक्री तिथियों की गणना करें

पूर्ण वक्री (Retrograde) और मार्गी (Direct) कैलेंडर देखने के लिए वर्ष चुनें।

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वक्री होने पर वास्तव में क्या होता है?

खगोल विज्ञान के अनुसार, ग्रह वास्तव में उल्टे नहीं चलते। जब आप हाईवे पर किसी धीमी कार को ओवरटेक करते हैं, तो वह पीछे जाती हुई प्रतीत होती है, यह वैसा ही है। लेकिन ज्योतिष में इसका बड़ा महत्व है। इस दौरान ग्रह की ऊर्जा (कारकत्व) आंतरिक हो जाती है, जो हमें जीवन के उन क्षेत्रों में अधूरे मुद्दों को सुलझाने का मौका देती है।

ग्रहों के अनुसार प्रभाव

☿ बुध (बुध वक्री)

Themes: संचार, तर्क, इलेक्ट्रॉनिक्स।

Advice: डेटा का बैकअप लें। ईमेल भेजने से पहले दोबारा जांचें। अनुबंधों पर हस्ताक्षर टालें।

♀ शुक्र (शुक्र वक्री)

Themes: प्रेम, विलासिता, रिश्ते।

Advice: पुराने साथी वापस आ सकते हैं। रिश्तों की समीक्षा करें। बड़े सौंदर्य बदलावों से बचें।

♂ मंगल (मंगल वक्री)

Themes: ऊर्जा, क्रिया, क्रोध।

Advice: ऊर्जा रुकी हुई महसूस हो सकती है। विवादों से बचें। आवेग में कार्य करने के बजाय रणनीति बनाएं।

♄ शनि (शनि वक्री)

Themes: कर्म, करियर, जिम्मेदारी।

Advice: यह पिछले कर्मों की समीक्षा का समय है। करियर के लक्ष्यों का पुनर्गठन करें और गलतियों की जिम्मेदारी लें।

ज्योतिषीय शब्दावली

शब्द अर्थ
वक्री (Retrograde) ग्रह की उल्टी चाल प्रतीत होना। इसे कुंडली में 'R' से दर्शाया जाता है।
मार्गी (Direct) जब ग्रह वापस सीधी चाल में आ जाता है। यह कार्यों के गति पकड़ने का समय है।
स्तंभन (Stationary) वक्री या मार्गी होने से ठीक पहले जब ग्रह रुका हुआ प्रतीत होता है। यहाँ ऊर्जा सबसे तीव्र होती है।

Frequently Asked Questions

खगोलीय रूप से, यह एक दृष्टिभ्रम है। ज्योतिषीय रूप से, ग्रह की ऊर्जा आंतरिक हो जाती है, जो हमें अतीत के कार्यों की समीक्षा और सुधार करने के लिए प्रेरित करती है।

बुध साल में 3 से 4 बार वक्री होता है। हर चक्र लगभग 21 दिनों का होता है। यह संचार और यात्रा में देरी का समय है।

बिल्कुल नहीं। हालांकि यह बाहरी कामों में देरी कर सकता है, लेकिन वक्री ग्रहों में चेष्टा बल अधिक होता है। यह पुरानी गलतियों को सुधारने का सबसे अच्छा समय है।

बुध, शुक्र, मंगल, गुरु और शनि वक्री होते हैं। सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते। राहु और केतु हमेशा वक्री रहते हैं।

डेटा प्रामाणिकता: यह गणना वैदिक ज्योतिषी श्री संतोष कुमार शर्मा द्वारा स्विस एफेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश के आधार पर सत्यापित है।


Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।