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गुरु अस्त तिथियां 2026-2027 (बृहस्पति तारा डूबना)

गुरु अस्त तिथियां 2026-2027 (बृहस्पति तारा डूबना)

वैदिक ज्योतिष में, गुरु अस्त (जिसे गुरु तारा डूबना या गुरु मौढ्य भी कहा जाता है) एक ऐसा महत्वपूर्ण समय है जब बृहस्पति ग्रह सूर्य की चमक के कारण नंगी आंखों से अदृश्य हो जाता है।

मुख्य अंश (Key Takeaways)

  • घटना: गुरु सूर्य के 11° के भीतर आ जाते हैं और शुभ आशीर्वाद देने की अपनी क्षमता खो देते हैं।
  • प्रभाव: विवाह, उपनयन (जनेऊ), और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
  • अवधि: यह आमतौर पर हर साल लगभग एक महीने तक रहता है।
  • अनुमति: नियमित कार्य, नामकरण और अन्नप्राशन (कुछ अपवादों के साथ) आमतौर पर किए जा सकते हैं।

अपने शहर के लिए गुरु अस्त तिथियां जांचें

स्थान के अनुसार अस्त के समय में थोड़ा अंतर होता है। अपने क्षेत्र के लिए सटीक तिथियां खोजने के लिए इस टूल का उपयोग करें।

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शुभ ग्रह 'गुरु' क्यों कमजोर हो जाते हैं?

बृहस्पति जीव कारक (जीवन के सूचक) और ईश्वरीय रक्षक हैं। जब वह सूर्य के 'दहन क्षेत्र' में प्रवेश करते हैं, तो ज्योतिषीय ग्रंथ उन्हें 'कोप' या संकट की स्थिति में बताते हैं। जैसे आप दिन में सूर्य के कारण तारे नहीं देख सकते, वैसे ही बृहस्पति की शुभ किरणें इस दौरान पृथ्वी तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाती हैं।

महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ

शब्द अर्थ
गुरु मौढ्य बृहस्पति तारा डूबने के लिए दक्षिण भारतीय शब्द। 'मौढ्य' का अर्थ है चमक या ज्ञान की कमी।
अस्त (लोप) गायब होना। आकाश से ग्रह के अदृश्य होने को संदर्भित करता है।
शुभ मुहूर्त शुभ समय। गुरु अस्त के दौरान ये पूरी तरह से वर्जित होते हैं।

वर्जित बनाम अनुमति प्राप्त कार्य

यह एक आम भ्रांति है कि गुरु अस्त के दौरान सब कुछ रुक जाता है। यहाँ स्पष्ट अंतर दिया गया है:

🚫 वर्जित कार्य (क्या न करें)
  • विवाह
  • उपनयन (जनेऊ संस्कार)
  • गृह प्रवेश
  • मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा
  • नए घर का निर्माण शुरू करना
✅ अनुमति प्राप्त कार्य (क्या कर सकते हैं)
  • नियमित दैनिक कार्य और नौकरी
  • व्यापारिक अनुबंध (यदि तत्काल हो)
  • नामकरण संस्कार
  • चिकित्सा उपचार शुरू करना
  • वाहन खरीदना (यदि ग्रहों की दशा समर्थन करे)

गुरु अस्त के लिए वैदिक उपाय

यदि इस अवधि के दौरान आपकी गुरु महादशा या अंतर्दशा चल रही है, तो आपको मार्गदर्शन की कमी महसूस हो सकती है। ये उपाय करें:

  1. पीला दान: गुरुवार को ब्राह्मणों या छात्रों को पीली दाल (चना दाल), हल्दी, या केले दान करें।
  2. मंत्र जाप: प्रतिदिन 108 बार 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' का जाप करें।
  3. पूजा: गुरुवार को पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं, क्योंकि यह बृहस्पति की ऊर्जा से जुड़ा है।

Frequently Asked Questions

गुरु अस्त तब होता है जब बृहस्पति सूर्य के बहुत करीब (11 डिग्री के भीतर) आ जाता है। सूर्य की चमक के कारण गुरु की शुभ किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुंच पातीं। इसे मांगलिक कार्यों के लिए "अंधा" समय माना जाता है।

नहीं। वैदिक परंपरा में, बृहस्पति पति और वैवाहिक सुख का प्रतीक है। गुरु अस्त होने पर विवाह करने से लंबे और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए आवश्यक ग्रहों का आशीर्वाद नहीं मिलता है।

आमतौर पर गुरु मौढ्य के दौरान गृह प्रवेश से बचने की सलाह दी जाती है। बृहस्पति विस्तार और समृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है, जो नए घर के लिए आवश्यक है। हालाँकि, आप नियमित पूजा कर सकते हैं।

गुरु बीज मंत्र का जाप करना, शिक्षकों/बड़ों का सम्मान करना और केसर का तिलक लगाना प्रभावी है। यह समय ध्यान जैसी आंतरिक आध्यात्मिक प्रथाओं के लिए बहुत फलदायी है।

ज्योतिषीय स्रोत: ये गणनाएं दृक सिद्धांत और लाहिड़ी अयनांश पद्धति पर आधारित हैं, जिन्हें वैदिक ज्योतिषी श्री संतोष कुमार शर्मा द्वारा सत्यापित किया गया है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।