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San Jose · 2087: हिंदू त्योहार और व्रत: तिथियाँ व स्थानीय समय

San Jose के लिए हिन्दू त्योहारों और व्रतों की तिथियां देखें। तिथि केवल अंग्रेजी तारीख से तय नहीं होती; सूर्योदय, तिथि की अवधि, नक्षत्र, चंद्र मास और संबंधित व्रत-नियम भी देखे जाते हैं।

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  • तिथि का समय पढ़ें: यदि तिथि दो तारीखों में फैली हो, तो सूर्योदय, मध्याह्न, चंद्रोदय या प्रदोष का नियम दिन तय कर सकता है।
  • अपनी परंपरा का सम्मान करें: स्मार्त, वैष्णव, क्षेत्रीय, पारिवारिक और मंदिर परंपराओं के नियम अलग हो सकते हैं। आवश्यकता होने पर अपने गुरु या स्थानीय मंदिर का निर्णय मानें।

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सितंबर 2087 के हिन्दू त्योहार और व्रत

San Jose के लिए सितंबर 2087 के त्योहार और व्रत की तिथियां:

  • ऋषि पंचमी (भाद्रपद मास) — सोमवार, 1 सितंबर 2087.
  • ललिता षष्ठी व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 2 सितंबर 2087.
  • सूर्य षष्ठी — मंगलवार, 2 सितंबर 2087.
  • स्कंद दर्शन — मंगलवार, 2 सितंबर 2087.
  • बौद्ध जयंती — मंगलवार, 2 सितंबर 2087.
  • चंपा षष्ठी (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 2 सितंबर 2087.
  • मासिक षष्ठी व्रत — मंगलवार, 2 सितंबर 2087.
  • अमुक्ताभरण सप्तमी — बुधवार, 3 सितंबर 2087.
  • ज्येष्ठा गौरी आवाहन (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 4 सितंबर 2087.
  • दूर्वाष्टमी (अगस्त्य उदय की स्थानीय पुष्टि आवश्यक है) — गुरुवार, 4 सितंबर 2087.
  • महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास) — शुक्रवार, 5 सितंबर 2087.
  • ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास) — शुक्रवार, 5 सितंबर 2087.
  • राधा अष्टमी (भाद्रपद मास) — शुक्रवार, 5 सितंबर 2087.
  • नंदा देवी पूजा — शुक्रवार, 5 सितंबर 2087.
  • केदार व्रत — शुक्रवार, 5 सितंबर 2087.
  • ज्येष्ठाष्टमी — शुक्रवार, 5 सितंबर 2087.
  • पुत्री ज्येष्ठा व्रत — शुक्रवार, 5 सितंबर 2087.
  • सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास) — शनिवार, 6 सितंबर 2087.
  • ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास) — शनिवार, 6 सितंबर 2087.
  • क्षीर व्रतारंभ — शनिवार, 6 सितंबर 2087.
  • सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल) — श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी — सोमवार, 8 सितंबर 2087.
  • परिवर्तन एकादशी — सोमवार, 8 सितंबर 2087.
  • कट दान — सोमवार, 8 सितंबर 2087.
  • गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 9 सितंबर 2087.
  • शक्र द्वादशी — मंगलवार, 9 सितंबर 2087.
  • शक्र ध्वजोत्थापन — मंगलवार, 9 सितंबर 2087.
  • विष्णु परिवर्तन महोत्सव — मंगलवार, 9 सितंबर 2087.
  • कल्कि द्वादशी — मंगलवार, 9 सितंबर 2087.
  • श्रवण द्वादशी — मंगलवार, 9 सितंबर 2087.
  • भौम प्रदोषम् (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 9 सितंबर 2087.
  • शुक्ल त्रयोदशी उपवास — मंगलवार, 9 सितंबर 2087.
  • वामन जयंती (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 9 सितंबर 2087.
  • श्रवण द्वादशी पारण — बुधवार, 10 सितंबर 2087.
  • अगस्त्यार्घ्य — बुधवार, 10 सितंबर 2087.
  • कदली व्रत (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 11 सितंबर 2087.
  • पूर्णिमा व्रत — गुरुवार, 11 सितंबर 2087.
  • लोकपाल पूजा — गुरुवार, 11 सितंबर 2087.
  • अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 11 सितंबर 2087.
  • अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 11 सितंबर 2087.
  • गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 11 सितंबर 2087.
  • अनंत व्रतारंभ (मध्याह्न) — गुरुवार, 11 सितंबर 2087.
  • सत्यनारायण स्वामी व्रत — गुरुवार, 11 सितंबर 2087.
  • उमा महेश्वर व्रत — शुक्रवार, 12 सितंबर 2087.
  • उपांग ललिता गौरी व्रत — शुक्रवार, 12 सितंबर 2087.
  • पितृपक्ष प्रारम्भ — शुक्रवार, 12 सितंबर 2087.
  • अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास) — शनिवार, 13 सितंबर 2087.
  • बृहद्गौरी व्रत — रविवार, 14 सितंबर 2087.
  • कज्जली व्रत — रविवार, 14 सितंबर 2087.
  • विशालाक्षी यात्रा — रविवार, 14 सितंबर 2087.
  • संकष्टी चतुर्थी — सोमवार, 15 सितंबर 2087.
  • चंद्र षष्ठी — मंगलवार, 16 सितंबर 2087.
  • महा भरणी — मंगलवार, 16 सितंबर 2087.
  • कन्या संक्रमण (10:45 AM) — बुधवार, 17 सितंबर 2087.
  • कृत्तिका व्रत — बुधवार, 17 सितंबर 2087.
  • सूर्य सावर्णि मन्वादि — गुरुवार, 18 सितंबर 2087.
  • मध्याष्टमी — गुरुवार, 18 सितंबर 2087.
  • महालक्ष्मी व्रत — गुरुवार, 18 सितंबर 2087.
  • कालाष्टमी — गुरुवार, 18 सितंबर 2087.
  • रोहिणी व्रत — गुरुवार, 18 सितंबर 2087.
  • आर्द्राष्टमी — शुक्रवार, 19 सितंबर 2087.
  • अहीन नवमी — शुक्रवार, 19 सितंबर 2087.
  • दुर्गा देवी उद्यापन — शुक्रवार, 19 सितंबर 2087.
  • व्यतीपात महालय — शुक्रवार, 19 सितंबर 2087.
  • महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास) — शनिवार, 20 सितंबर 2087.
  • यति महालय — सोमवार, 22 सितंबर 2087.
  • सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण) — सोमवार, 22 सितंबर 2087.
  • गजच्छाया — मंगलवार, 23 सितंबर 2087.
  • कलियुगादि — मंगलवार, 23 सितंबर 2087.
  • मघा त्रयोदशी श्राद्ध — मंगलवार, 23 सितंबर 2087.
  • मघा श्राद्ध — मंगलवार, 23 सितंबर 2087.
  • भौम प्रदोषम् (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 23 सितंबर 2087.
  • शस्त्रहत महालय — बुधवार, 24 सितंबर 2087.
  • मासिक शिवरात्रि (भाद्रपद मास) — बुधवार, 24 सितंबर 2087.
  • कृष्ण त्रयोदशी उपवास — बुधवार, 24 सितंबर 2087.
  • दर्श श्राद्ध — गुरुवार, 25 सितंबर 2087.
  • महालय अमावस्या — गुरुवार, 25 सितंबर 2087.
  • बथुकम्मा प्रारंभ — शुक्रवार, 26 सितंबर 2087.
  • एंगिली पुला बथुकम्मा — शुक्रवार, 26 सितंबर 2087.
  • घटस्थापना (आश्विन मास)07:05 AM — शनिवार, 27 सितंबर 2087.
  • शारदीय नवरात्रि आरम्भ — शनिवार, 27 सितंबर 2087.
  • आश्विन मासारंभ — शनिवार, 27 सितंबर 2087.
  • गज गौरी व्रत (आश्विन मास) — शनिवार, 27 सितंबर 2087.
  • नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्री — शनिवार, 27 सितंबर 2087. — शैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री क…
  • नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणी — रविवार, 28 सितंबर 2087. — दुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जी…
  • नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटा — सोमवार, 29 सितंबर 2087. — तीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के …
  • नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा — मंगलवार, 30 सितंबर 2087.
  • मासिक विनायक चतुर्थी — मंगलवार, 30 सितंबर 2087.

हिंदू त्यौहार और महत्वपूर्ण दिन

शहर: San Jose (37.3382, -121.8863) | समय क्षेत्र: America/Los_Angeles

September 2087

01सितंबरसोमवारशुक्ल पंचमी (समाप्ति (2nd) सुबह 4:29)
🔔ऋषि पंचमी (भाद्रपद मास)
02सितंबरमंगलवारशुक्ल षष्ठी (समाप्ति (3rd) सुबह 7:03)
🔔ललिता षष्ठी व्रत (भाद्रपद मास)
🔔सूर्य षष्ठी
🔔स्कंद दर्शन
🔔बौद्ध जयंती
🔔चंपा षष्ठी (भाद्रपद मास)
🔔मासिक षष्ठी व्रत
03सितंबरबुधवारशुक्ल षष्ठी (समाप्ति सुबह 7:03)
🔔अमुक्ताभरण सप्तमी
04सितंबरगुरुवारशुक्ल सप्तमी (समाप्ति सुबह 9:37)
🔔ज्येष्ठा गौरी आवाहन (भाद्रपद मास)
🔔दूर्वाष्टमी (अगस्त्य उदय की स्थानीय पुष्टि आवश्यक है)
05सितंबरशुक्रवारशुक्ल अष्टमी (समाप्ति सुबह 11:57)
🔔महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास)
🔔ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास)
🔔राधा अष्टमी (भाद्रपद मास)
🔔नंदा देवी पूजा
🔔केदार व्रत
🔔ज्येष्ठाष्टमी
🔔पुत्री ज्येष्ठा व्रत
06सितंबरशनिवारशुक्ल नवमी (समाप्ति दोपहर 1:47)
🔔सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास)
🔔ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास)
🔔क्षीर व्रतारंभ
08सितंबरसोमवारशुक्ल एकादशी (समाप्ति दोपहर 3:19)
🔔सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)
— श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी
🔔परिवर्तन एकादशी
🔔कट दान
09सितंबरमंगलवारशुक्ल द्वादशी (समाप्ति दोपहर 2:54)
🔔गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास)
🔔शक्र द्वादशी
🔔शक्र ध्वजोत्थापन
🔔विष्णु परिवर्तन महोत्सव
🔔कल्कि द्वादशी
🔔श्रवण द्वादशी
🔔शुक्ल त्रयोदशी उपवास
— उपवास: मंगलवार, 09 सितंबर 2087 06:49 AM - बुधवार, 10 सितंबर 2087 01:46 PM
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ बुधवार, 10 सितंबर 2087 01:46 PM
🔔वामन जयंती (भाद्रपद मास)
10सितंबरबुधवारशुक्ल त्रयोदशी (समाप्ति दोपहर 1:46)
🔔श्रवण द्वादशी पारण
🔔अगस्त्यार्घ्य
11सितंबरगुरुवारशुक्ल चतुर्दशी (समाप्ति दोपहर 12:00)
🔔कदली व्रत (भाद्रपद मास)
🔔पूर्णिमा व्रत
🔔लोकपाल पूजा
🔔अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)
🔔अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)
🔔गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)
🔔अनंत व्रतारंभ (मध्याह्न)
🔔सत्यनारायण स्वामी व्रत
12सितंबरशुक्रवारशुक्ल पूर्णिमा (समाप्ति सुबह 9:43)
🔔उमा महेश्वर व्रत
🔔उपांग ललिता गौरी व्रत
🔔पितृपक्ष प्रारम्भ
13सितंबरशनिवारकृष्ण प्रतिपदा (समाप्ति सुबह 7:06)
🔔अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास)
14सितंबररविवारकृष्ण तृतीया (समाप्ति (15th) रात 1:24)
🔔बृहद्गौरी व्रत
🔔कज्जली व्रत
🔔विशालाक्षी यात्रा
15सितंबरसोमवारकृष्ण चतुर्थी (समाप्ति रात 10:35)
🔔संकष्टी चतुर्थी — चंद्रोदय: 09:12 PM
16सितंबरमंगलवारकृष्ण पंचमी (समाप्ति रात 7:55)
🔔चंद्र षष्ठी
🔔महा भरणी
17सितंबरबुधवारकृष्ण षष्ठी (समाप्ति शाम 5:29)
🔔कन्या संक्रमण (10:45 AM) — पुण्यकाल: 10:45 AM - 05:09 PM
🔔कृत्तिका व्रत
18सितंबरगुरुवारकृष्ण सप्तमी (समाप्ति दोपहर 3:21)
🔔सूर्य सावर्णि मन्वादि
🔔मध्याष्टमी
🔔महालक्ष्मी व्रत
🔔कालाष्टमी
🔔रोहिणी व्रत
19सितंबरशुक्रवारकृष्ण अष्टमी (समाप्ति दोपहर 1:33)
🔔आर्द्राष्टमी
🔔अहीन नवमी
🔔दुर्गा देवी उद्यापन
🔔व्यतीपात महालय
20सितंबरशनिवारकृष्ण नवमी (समाप्ति दोपहर 12:06)
🔔महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास)
22सितंबरसोमवारकृष्ण एकादशी (समाप्ति सुबह 10:19)
🔔यति महालय
🔔सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण)
— पारण (व्रत तोड़ना): मंगलवार, 23 सितंबर 2087 07:00 AM - 07:45 AM
23सितंबरमंगलवारकृष्ण द्वादशी (समाप्ति सुबह 10:01)
🔔गजच्छाया
🔔कलियुगादि
🔔मघा त्रयोदशी श्राद्ध
🔔मघा श्राद्ध
24सितंबरबुधवारकृष्ण त्रयोदशी (समाप्ति सुबह 10:09)
🔔शस्त्रहत महालय
🔔कृष्ण त्रयोदशी उपवास
— उपवास: बुधवार, 24 सितंबर 2087 07:01 AM - गुरुवार, 25 सितंबर 2087 07:02 AM
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ गुरुवार, 25 सितंबर 2087 07:02 AM
25सितंबरगुरुवारकृष्ण चतुर्दशी (समाप्ति सुबह 10:44)
🔔दर्श श्राद्ध
🔔महालय अमावस्या
26सितंबरशुक्रवारअमावस्या (समाप्ति सुबह 11:47)
🔔बथुकम्मा प्रारंभ
🔔एंगिली पुला बथुकम्मा
27सितंबरशनिवारशुक्ल प्रतिपदा (समाप्ति दोपहर 1:20)
🔔घटस्थापना (आश्विन मास)
07:05 AM - 01:20 PM
🔔शारदीय नवरात्रि आरम्भ
🔔आश्विन मासारंभ
🔔गज गौरी व्रत (आश्विन मास)
— प्रवेश समय: 04:06 PM (हस्त नक्षत्र प्रवेश)
🔔नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्रीशैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है और इन्हें देवी सती का पुनर्जन्म माना जाता है। इनके दो हाथ हैं, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण किए हुए यह नंदी बैल पर विराजमान हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव की সম্মিলিত शक्ति का प्रतीक होने के कारण, इनकी पूजा बल, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए की जाती है।
28सितंबररविवारशुक्ल द्वितीया (समाप्ति दोपहर 3:19)
🔔नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणीदुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, जिससे उनकी अपार भक्ति और आत्म-संयम का प्रदर्शन हुआ। भक्त समर्पण और अटूट विश्वास के लिए उनकी पूजा करते हैं।
29सितंबरसोमवारशुक्ल तृतीया (समाप्ति शाम 5:42)
🔔नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटातीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के आकार का अर्धचंद्र' पड़ा। वह दस हाथों में विभिन्न हथियार धारण किए हुए बाघ पर सवार होती हैं, और उनकी तीसरी आंख हमेशा खुली रहती है, जो बुराई से लड़ने की उनकी तत्परता को दर्शाती है। वह अपने भक्तों को शांति और साहस प्रदान करने वाली एक करुणामयी माँ हैं।
30सितंबरमंगलवारशुक्ल चतुर्थी (समाप्ति रात 8:19)
🔔नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा
🔔मासिक विनायक चतुर्थी

यह त्योहारों और महत्वपूर्ण दिनों का कैलेंडर हिंदू धर्मग्रंथों जैसे निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि में दिए गए नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे दुनिया भर में हिंदू धर्म का पालन करने वाले सभी लोगों के लाभ के लिए बनाया गया है। यदि आपको इस कैलेंडर में किसी त्योहार या किसी महत्वपूर्ण दिन के संबंध में कोई त्रुटि मिलती है, या यदि आपके क्षेत्र से संबंधित कोई त्योहार शामिल नहीं है, तो कृपया मुझे admin@onlinejyotish.com पर ईमेल करके सूचित करें। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।


शब्दावली: हिन्दू कैलेंडर के शब्द

व्रत और त्योहारों को ठीक से मनाने के लिए, ये मुख्य अवधारणाएं आवश्यक हैं:

शब्द अर्थ
तिथि एक चंद्र दिवस। यह चंद्रमा द्वारा सूर्य से 12 डिग्री दूर जाने में लिया गया समय है।
नक्षत्र एक चंद्र हवेली या तारा मंडल जिससे चंद्रमा गुजर रहा है।
पूर्णिमांत / अमावास्यांत पूर्णिमांत महीने पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं (उत्तर भारत)। अमावास्यांत महीने अमावस्या पर समाप्त होते हैं (दक्षिण भारत)।
स्मार्त बनाम वैष्णव विभिन्न संप्रदाय सख्त सूर्योदय नियमों के आधार पर अलग-अलग दिनों में एकादशी/अष्टमी मनाते हैं।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

Frequently Asked Questions

त्योहार इस बात पर निर्भर करते हैं कि सूर्योदय के समय कौन सी तिथि सक्रिय है। आपका स्थानीय मंदिर एक अलग गणना पद्धति (सूर्य सिद्धांत बनाम दृग्गणित) का उपयोग कर सकता है।

स्मार्त उस दिन उपवास करते हैं जब सूर्योदय के समय एकादशी मौजूद होती है। वैष्णव कड़ाई से मांग करते हैं कि दिन सूर्योदय के समय दशमी ओवरलैप से मुक्त हो।

यदि त्योहार के दिन ग्रहण होता है, तो अनुष्ठान, पूजा और उपवास के समय को बदलना पड़ता है।

तिथियां कैसे तैयार की जाती हैं: खगोलीय स्थितियों के लिए स्विस एफेमेरिस का उपयोग किया जाता है। त्योहार-निर्णय के पारंपरिक नियम श्री संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में बनाए रखे जाते हैं। क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।