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Kuala Lumpur · 2030: हिंदू त्योहार और व्रत: तिथियाँ व स्थानीय समय

Kuala Lumpur के लिए हिन्दू त्योहारों और व्रतों की तिथियां देखें। तिथि केवल अंग्रेजी तारीख से तय नहीं होती; सूर्योदय, तिथि की अवधि, नक्षत्र, चंद्र मास और संबंधित व्रत-नियम भी देखे जाते हैं।

इस कैलेंडर का उपयोग कैसे करें?

  • स्थान सही चुनें: सूर्योदय और तिथि की सीमा शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए अलग-अलग देशों में त्योहार की तारीख अलग हो सकती है।
  • तिथि का समय पढ़ें: यदि तिथि दो तारीखों में फैली हो, तो सूर्योदय, मध्याह्न, चंद्रोदय या प्रदोष का नियम दिन तय कर सकता है।
  • अपनी परंपरा का सम्मान करें: स्मार्त, वैष्णव, क्षेत्रीय, पारिवारिक और मंदिर परंपराओं के नियम अलग हो सकते हैं। आवश्यकता होने पर अपने गुरु या स्थानीय मंदिर का निर्णय मानें।

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सितंबर 2030 के हिन्दू त्योहार और व्रत

Kuala Lumpur के लिए सितंबर 2030 के त्योहार और व्रत की तिथियां:

  • गणेश चतुर्थी (भाद्रपद मास)गणेश चतुर्थी पूजा का समय: 12:01 PM — रविवार, 1 सितंबर 2030. — यह बाधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश के जन्म के सम्मान में मनाया जाने वाला दस दिवसीय त्योहार है, जो गणेश की मूर्तियों की स्थापना के साथ शुरू होता है।
  • मासिक विनायक चतुर्थी — रविवार, 1 सितंबर 2030.
  • ऋषि पंचमी (भाद्रपद मास) — सोमवार, 2 सितंबर 2030.
  • ललिता षष्ठी व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 3 सितंबर 2030.
  • सूर्य षष्ठी — मंगलवार, 3 सितंबर 2030.
  • स्कंद दर्शन — मंगलवार, 3 सितंबर 2030.
  • बौद्ध जयंती — मंगलवार, 3 सितंबर 2030.
  • अमुक्ताभरण सप्तमी — मंगलवार, 3 सितंबर 2030.
  • चंपा षष्ठी (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 3 सितंबर 2030.
  • मासिक षष्ठी व्रत — मंगलवार, 3 सितंबर 2030.
  • ज्येष्ठा गौरी आवाहन (भाद्रपद मास) — बुधवार, 4 सितंबर 2030.
  • दूर्वाष्टमी (अगस्त्य उदय की स्थानीय पुष्टि आवश्यक है) — बुधवार, 4 सितंबर 2030.
  • महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 5 सितंबर 2030.
  • ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 5 सितंबर 2030.
  • राधा अष्टमी (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 5 सितंबर 2030.
  • नंदा देवी पूजा — गुरुवार, 5 सितंबर 2030.
  • ज्येष्ठाष्टमी — गुरुवार, 5 सितंबर 2030.
  • पुत्री ज्येष्ठा व्रत — गुरुवार, 5 सितंबर 2030.
  • सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास) — शुक्रवार, 6 सितंबर 2030.
  • ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास) — शुक्रवार, 6 सितंबर 2030.
  • केदार व्रत — शुक्रवार, 6 सितंबर 2030.
  • क्षीर व्रतारंभ — शनिवार, 7 सितंबर 2030.
  • सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल) — श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी — रविवार, 8 सितंबर 2030.
  • परिवर्तन एकादशी — रविवार, 8 सितंबर 2030.
  • कट दान — रविवार, 8 सितंबर 2030.
  • गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास) — सोमवार, 9 सितंबर 2030.
  • शक्र द्वादशी — सोमवार, 9 सितंबर 2030.
  • शक्र ध्वजोत्थापन — सोमवार, 9 सितंबर 2030.
  • विष्णु परिवर्तन महोत्सव — सोमवार, 9 सितंबर 2030.
  • कल्कि द्वादशी — सोमवार, 9 सितंबर 2030.
  • श्रवण द्वादशी — सोमवार, 9 सितंबर 2030.
  • सोम प्रदोषम् (भाद्रपद मास) — सोमवार, 9 सितंबर 2030.
  • शुक्ल त्रयोदशी उपवास — सोमवार, 9 सितंबर 2030.
  • वामन जयंती (भाद्रपद मास) — सोमवार, 9 सितंबर 2030.
  • कदली व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 10 सितंबर 2030.
  • श्रवण द्वादशी पारण — मंगलवार, 10 सितंबर 2030.
  • अगस्त्यार्घ्य — मंगलवार, 10 सितंबर 2030.
  • अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 10 सितंबर 2030.
  • अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 10 सितंबर 2030.
  • गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 10 सितंबर 2030.
  • पूर्णिमा व्रत — बुधवार, 11 सितंबर 2030.
  • उमा महेश्वर व्रत — बुधवार, 11 सितंबर 2030.
  • उपांग ललिता गौरी व्रत — बुधवार, 11 सितंबर 2030.
  • लोकपाल पूजा — बुधवार, 11 सितंबर 2030.
  • सत्यनारायण स्वामी व्रत — बुधवार, 11 सितंबर 2030.
  • पितृपक्ष प्रारम्भ — गुरुवार, 12 सितंबर 2030.
  • अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास) — शुक्रवार, 13 सितंबर 2030.
  • बृहद्गौरी व्रत — शनिवार, 14 सितंबर 2030.
  • कज्जली व्रत — शनिवार, 14 सितंबर 2030.
  • विशालाक्षी यात्रा — शनिवार, 14 सितंबर 2030.
  • संकष्टी चतुर्थी — रविवार, 15 सितंबर 2030.
  • महा भरणी — सोमवार, 16 सितंबर 2030.
  • कन्या संक्रमण (11:11 AM) — मंगलवार, 17 सितंबर 2030.
  • चंद्र षष्ठी — मंगलवार, 17 सितंबर 2030.
  • कृत्तिका व्रत — मंगलवार, 17 सितंबर 2030.
  • रोहिणी व्रत — बुधवार, 18 सितंबर 2030.
  • सूर्य सावर्णि मन्वादि — गुरुवार, 19 सितंबर 2030.
  • मध्याष्टमी — गुरुवार, 19 सितंबर 2030.
  • कालाष्टमी — गुरुवार, 19 सितंबर 2030.
  • महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास) — शुक्रवार, 20 सितंबर 2030.
  • महालक्ष्मी व्रत — शुक्रवार, 20 सितंबर 2030.
  • आर्द्राष्टमी — शुक्रवार, 20 सितंबर 2030.
  • दुर्गा देवी उद्यापन — शुक्रवार, 20 सितंबर 2030.
  • अहीन नवमी — शनिवार, 21 सितंबर 2030.
  • सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण) — सोमवार, 23 सितंबर 2030.
  • यति महालय — मंगलवार, 24 सितंबर 2030.
  • गजच्छाया — बुधवार, 25 सितंबर 2030.
  • कलियुगादि — बुधवार, 25 सितंबर 2030.
  • मघा त्रयोदशी श्राद्ध — बुधवार, 25 सितंबर 2030.
  • मघा श्राद्ध — बुधवार, 25 सितंबर 2030.
  • सौम्य प्रदोषम् (भाद्रपद मास) — बुधवार, 25 सितंबर 2030.
  • मासिक शिवरात्रि (भाद्रपद मास) — बुधवार, 25 सितंबर 2030.
  • कृष्ण त्रयोदशी उपवास — बुधवार, 25 सितंबर 2030.
  • शस्त्रहत महालय — गुरुवार, 26 सितंबर 2030.
  • गजच्छाया अमावस्या (भाद्रपद मास) — शुक्रवार, 27 सितंबर 2030.
  • केदार गौरी व्रत (आश्विन मास) — शुक्रवार, 27 सितंबर 2030.
  • दर्श श्राद्ध — शुक्रवार, 27 सितंबर 2030.
  • महालय अमावस्या — शुक्रवार, 27 सितंबर 2030.
  • गज गौरी व्रत (आश्विन मास) — शुक्रवार, 27 सितंबर 2030.
  • बथुकम्मा प्रारंभ — शुक्रवार, 27 सितंबर 2030.
  • एंगिली पुला बथुकम्मा — शुक्रवार, 27 सितंबर 2030.
  • घटस्थापना (आश्विन मास)07:05 AM — शनिवार, 28 सितंबर 2030.
  • शारदीय नवरात्रि आरम्भ — शनिवार, 28 सितंबर 2030.
  • मातामह श्राद्ध (आश्विन मास) — शनिवार, 28 सितंबर 2030.
  • आश्विन मासारंभ — शनिवार, 28 सितंबर 2030.
  • नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्री — शनिवार, 28 सितंबर 2030. — शैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री क…
  • नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणी — रविवार, 29 सितंबर 2030. — दुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जी…
  • नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटा — सोमवार, 30 सितंबर 2030. — तीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के …
  • मासिक विनायक चतुर्थी — सोमवार, 30 सितंबर 2030.

हिंदू त्यौहार और महत्वपूर्ण दिन

शहर: Kuala Lumpur (3.139, 101.6869) | समय क्षेत्र: Asia/Kuala_Lumpur

September 2030

01सितंबररविवारशुक्ल चतुर्थी (समाप्ति (2nd) रात 1:08)
🔔गणेश चतुर्थी (भाद्रपद मास)
गणेश चतुर्थी पूजा का समय: 12:01 PM - 02:25 PM
मध्याह्न काल: दोपहर 12:00 - दोपहर 2:25
🔔मासिक विनायक चतुर्थी
02सितंबरसोमवारशुक्ल पंचमी (समाप्ति रात 11:07)
🔔ऋषि पंचमी (भाद्रपद मास)
03सितंबरमंगलवारशुक्ल षष्ठी (समाप्ति रात 9:03)
🔔ललिता षष्ठी व्रत (भाद्रपद मास)
🔔सूर्य षष्ठी
🔔स्कंद दर्शन
🔔बौद्ध जयंती
🔔अमुक्ताभरण सप्तमी
🔔चंपा षष्ठी (भाद्रपद मास)
🔔मासिक षष्ठी व्रत
04सितंबरबुधवारशुक्ल सप्तमी (समाप्ति शाम 6:58)
🔔ज्येष्ठा गौरी आवाहन (भाद्रपद मास)
🔔दूर्वाष्टमी (अगस्त्य उदय की स्थानीय पुष्टि आवश्यक है)
05सितंबरगुरुवारशुक्ल अष्टमी (समाप्ति शाम 4:53)
🔔महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास)
🔔ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास)
🔔राधा अष्टमी (भाद्रपद मास)
🔔नंदा देवी पूजा
🔔ज्येष्ठाष्टमी
🔔पुत्री ज्येष्ठा व्रत
06सितंबरशुक्रवारशुक्ल नवमी (समाप्ति दोपहर 2:48)
🔔सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास)
🔔ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास)
🔔केदार व्रत
07सितंबरशनिवारशुक्ल दशमी (समाप्ति दोपहर 12:47)
🔔क्षीर व्रतारंभ
08सितंबररविवारशुक्ल एकादशी (समाप्ति सुबह 10:51)
🔔सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)
— श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी
🔔परिवर्तन एकादशी
🔔कट दान
09सितंबरसोमवारशुक्ल द्वादशी (समाप्ति सुबह 9:02)
🔔गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास)
🔔शक्र द्वादशी
🔔शक्र ध्वजोत्थापन
🔔विष्णु परिवर्तन महोत्सव
🔔कल्कि द्वादशी
🔔श्रवण द्वादशी
🔔शुक्ल त्रयोदशी उपवास
— उपवास: सोमवार, 09 सितंबर 2030 07:09 AM - मंगलवार, 10 सितंबर 2030 07:27 AM
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ मंगलवार, 10 सितंबर 2030 07:27 AM
🔔वामन जयंती (भाद्रपद मास)
10सितंबरमंगलवारशुक्ल त्रयोदशी (समाप्ति सुबह 7:27)
🔔कदली व्रत (भाद्रपद मास)
🔔श्रवण द्वादशी पारण
🔔अगस्त्यार्घ्य
🔔अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)
🔔अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)
🔔गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)
11सितंबरबुधवारशुक्ल पूर्णिमा (समाप्ति (12th) सुबह 5:17)
🔔पूर्णिमा व्रत
🔔उमा महेश्वर व्रत
🔔उपांग ललिता गौरी व्रत
🔔लोकपाल पूजा
🔔सत्यनारायण स्वामी व्रत
12सितंबरगुरुवारकृष्ण प्रतिपदा (समाप्ति (13th) सुबह 4:55)
🔔पितृपक्ष प्रारम्भ
13सितंबरशुक्रवारकृष्ण द्वितीया (समाप्ति (14th) सुबह 5:09)
🔔अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास)
14सितंबरशनिवारकृष्ण तृतीया (समाप्ति (15th) सुबह 6:01)
🔔बृहद्गौरी व्रत
🔔कज्जली व्रत
🔔विशालाक्षी यात्रा
15सितंबररविवारकृष्ण चतुर्थी (समाप्ति (16th) सुबह 7:32)
🔔संकष्टी चतुर्थी — चंद्रोदय: 09:47 PM
16सितंबरसोमवारकृष्ण चतुर्थी (समाप्ति सुबह 7:32)
🔔महा भरणी
17सितंबरमंगलवारकृष्ण पंचमी (समाप्ति सुबह 9:35)
🔔कन्या संक्रमण (11:11 AM) — पुण्यकाल: 11:11 AM - 05:35 PM
🔔चंद्र षष्ठी
🔔कृत्तिका व्रत
18सितंबरबुधवारकृष्ण षष्ठी (समाप्ति दोपहर 12:02)
🔔रोहिणी व्रत
19सितंबरगुरुवारकृष्ण सप्तमी (समाप्ति दोपहर 2:39)
🔔सूर्य सावर्णि मन्वादि
🔔मध्याष्टमी
🔔कालाष्टमी
20सितंबरशुक्रवारकृष्ण अष्टमी (समाप्ति शाम 5:09)
🔔महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास)
🔔महालक्ष्मी व्रत
🔔आर्द्राष्टमी
🔔दुर्गा देवी उद्यापन
21सितंबरशनिवारकृष्ण नवमी (समाप्ति रात 7:17)
🔔अहीन नवमी
23सितंबरसोमवारकृष्ण एकादशी (समाप्ति रात 9:41)
🔔सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण)
— पारण (व्रत तोड़ना): मंगलवार, 24 सितंबर 2030 07:05 AM - 10:45 AM
24सितंबरमंगलवारकृष्ण द्वादशी (समाप्ति रात 9:45)
🔔यति महालय
25सितंबरबुधवारकृष्ण त्रयोदशी (समाप्ति रात 9:05)
🔔गजच्छाया
🔔कलियुगादि
🔔मघा त्रयोदशी श्राद्ध
🔔मघा श्राद्ध
🔔कृष्ण त्रयोदशी उपवास
— उपवास: बुधवार, 25 सितंबर 2030 07:05 AM - गुरुवार, 26 सितंबर 2030 07:04 AM
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ गुरुवार, 26 सितंबर 2030 07:04 AM
26सितंबरगुरुवारकृष्ण चतुर्दशी (समाप्ति रात 7:45)
🔔शस्त्रहत महालय
27सितंबरशुक्रवारअमावस्या (समाप्ति शाम 5:54)
🔔गजच्छाया अमावस्या (भाद्रपद मास)
🔔केदार गौरी व्रत (आश्विन मास)
🔔दर्श श्राद्ध
🔔महालय अमावस्या
🔔गज गौरी व्रत (आश्विन मास)
— प्रवेश समय: 04:32 PM (हस्त नक्षत्र प्रवेश)
🔔बथुकम्मा प्रारंभ
🔔एंगिली पुला बथुकम्मा
28सितंबरशनिवारशुक्ल प्रतिपदा (समाप्ति दोपहर 3:39)
🔔घटस्थापना (आश्विन मास)
07:05 AM - 03:40 PM
🔔शारदीय नवरात्रि आरम्भ
🔔मातामह श्राद्ध (आश्विन मास)
🔔आश्विन मासारंभ
🔔नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्रीशैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है और इन्हें देवी सती का पुनर्जन्म माना जाता है। इनके दो हाथ हैं, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण किए हुए यह नंदी बैल पर विराजमान हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव की সম্মিলিত शक्ति का प्रतीक होने के कारण, इनकी पूजा बल, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए की जाती है।
29सितंबररविवारशुक्ल द्वितीया (समाप्ति दोपहर 1:10)
🔔नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणीदुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, जिससे उनकी अपार भक्ति और आत्म-संयम का प्रदर्शन हुआ। भक्त समर्पण और अटूट विश्वास के लिए उनकी पूजा करते हैं।
30सितंबरसोमवारशुक्ल तृतीया (समाप्ति सुबह 10:33)
🔔नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटातीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के आकार का अर्धचंद्र' पड़ा। वह दस हाथों में विभिन्न हथियार धारण किए हुए बाघ पर सवार होती हैं, और उनकी तीसरी आंख हमेशा खुली रहती है, जो बुराई से लड़ने की उनकी तत्परता को दर्शाती है। वह अपने भक्तों को शांति और साहस प्रदान करने वाली एक करुणामयी माँ हैं।
🔔मासिक विनायक चतुर्थी

यह त्योहारों और महत्वपूर्ण दिनों का कैलेंडर हिंदू धर्मग्रंथों जैसे निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि में दिए गए नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे दुनिया भर में हिंदू धर्म का पालन करने वाले सभी लोगों के लाभ के लिए बनाया गया है। यदि आपको इस कैलेंडर में किसी त्योहार या किसी महत्वपूर्ण दिन के संबंध में कोई त्रुटि मिलती है, या यदि आपके क्षेत्र से संबंधित कोई त्योहार शामिल नहीं है, तो कृपया मुझे admin@onlinejyotish.com पर ईमेल करके सूचित करें। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।


शब्दावली: हिन्दू कैलेंडर के शब्द

व्रत और त्योहारों को ठीक से मनाने के लिए, ये मुख्य अवधारणाएं आवश्यक हैं:

शब्द अर्थ
तिथि एक चंद्र दिवस। यह चंद्रमा द्वारा सूर्य से 12 डिग्री दूर जाने में लिया गया समय है।
नक्षत्र एक चंद्र हवेली या तारा मंडल जिससे चंद्रमा गुजर रहा है।
पूर्णिमांत / अमावास्यांत पूर्णिमांत महीने पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं (उत्तर भारत)। अमावास्यांत महीने अमावस्या पर समाप्त होते हैं (दक्षिण भारत)।
स्मार्त बनाम वैष्णव विभिन्न संप्रदाय सख्त सूर्योदय नियमों के आधार पर अलग-अलग दिनों में एकादशी/अष्टमी मनाते हैं।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

Frequently Asked Questions

त्योहार इस बात पर निर्भर करते हैं कि सूर्योदय के समय कौन सी तिथि सक्रिय है। आपका स्थानीय मंदिर एक अलग गणना पद्धति (सूर्य सिद्धांत बनाम दृग्गणित) का उपयोग कर सकता है।

स्मार्त उस दिन उपवास करते हैं जब सूर्योदय के समय एकादशी मौजूद होती है। वैष्णव कड़ाई से मांग करते हैं कि दिन सूर्योदय के समय दशमी ओवरलैप से मुक्त हो।

यदि त्योहार के दिन ग्रहण होता है, तो अनुष्ठान, पूजा और उपवास के समय को बदलना पड़ता है।

तिथियां कैसे तैयार की जाती हैं: खगोलीय स्थितियों के लिए स्विस एफेमेरिस का उपयोग किया जाता है। त्योहार-निर्णय के पारंपरिक नियम श्री संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में बनाए रखे जाते हैं। क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।