OnlineJyotish.com

Kuala Lumpur · 1916: हिंदू त्योहार और व्रत: तिथियाँ व स्थानीय समय

Kuala Lumpur के लिए हिन्दू त्योहारों और व्रतों की तिथियां देखें। तिथि केवल अंग्रेजी तारीख से तय नहीं होती; सूर्योदय, तिथि की अवधि, नक्षत्र, चंद्र मास और संबंधित व्रत-नियम भी देखे जाते हैं।

इस कैलेंडर का उपयोग कैसे करें?

  • स्थान सही चुनें: सूर्योदय और तिथि की सीमा शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए अलग-अलग देशों में त्योहार की तारीख अलग हो सकती है।
  • तिथि का समय पढ़ें: यदि तिथि दो तारीखों में फैली हो, तो सूर्योदय, मध्याह्न, चंद्रोदय या प्रदोष का नियम दिन तय कर सकता है।
  • अपनी परंपरा का सम्मान करें: स्मार्त, वैष्णव, क्षेत्रीय, पारिवारिक और मंदिर परंपराओं के नियम अलग हो सकते हैं। आवश्यकता होने पर अपने गुरु या स्थानीय मंदिर का निर्णय मानें।

महीने के अनुसार त्योहार खोजें

प्रमुख त्योहारों और व्रतों को देखने के लिए एक महीने और वर्ष का चयन करें।

सितंबर 1916 के हिन्दू त्योहार और व्रत

Kuala Lumpur के लिए सितंबर 1916 के त्योहार और व्रत की तिथियां:

  • सामवेदी उपाकर्म✓ — शुक्रवार, 1 सितंबर 1916.
  • गणेश चतुर्थी (भाद्रपद मास)गणेश चतुर्थी पूजा का समय: उपयुक्त पूजा समय उपलब्ध नहीं✓ — शुक्रवार, 1 सितंबर 1916. — यह बाधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश के जन्म के सम्मान में मनाया जाने वाला दस दिवसीय त्योहार है, जो गणेश की मूर्तियों की स्थापना के साथ शुरू होता है।
  • ऋषि पंचमी (भाद्रपद मास)✓ — शनिवार, 2 सितंबर 1916.
  • ललिता षष्ठी व्रत (भाद्रपद मास)✓ — रविवार, 3 सितंबर 1916.
  • सूर्य षष्ठी✓ — रविवार, 3 सितंबर 1916.
  • स्कंद दर्शन✓ — रविवार, 3 सितंबर 1916.
  • बौद्ध जयंती✓ — रविवार, 3 सितंबर 1916.
  • अमुक्ताभरण सप्तमी✓ — रविवार, 3 सितंबर 1916.
  • चंपा षष्ठी (भाद्रपद मास)✓ — रविवार, 3 सितंबर 1916.
  • ज्येष्ठा गौरी आवाहन (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 4 सितंबर 1916.
  • महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास)✓ — मंगलवार, 5 सितंबर 1916.
  • ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास)✓ — मंगलवार, 5 सितंबर 1916.
  • नंदा देवी पूजा✓ — मंगलवार, 5 सितंबर 1916.
  • ज्येष्ठाष्टमी✓ — मंगलवार, 5 सितंबर 1916.
  • पुत्री ज्येष्ठा व्रत✓ — मंगलवार, 5 सितंबर 1916.
  • दूर्वाष्टमी (अगस्त्य उदय की स्थानीय पुष्टि आवश्यक है; दूर्वा नक्षत्र अपवाद नियम लागू है)✓ — मंगलवार, 5 सितंबर 1916.
  • सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास)✓ — बुधवार, 6 सितंबर 1916.
  • ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ — बुधवार, 6 सितंबर 1916.
  • केदार व्रत✓ — बुधवार, 6 सितंबर 1916.
  • क्षीर व्रतारंभ✓ — गुरुवार, 7 सितंबर 1916.
  • सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)✓ संपन्न — श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी — शुक्रवार, 8 सितंबर 1916.
  • परिवर्तन एकादशी✓ — शुक्रवार, 8 सितंबर 1916.
  • कट दान✓ — शुक्रवार, 8 सितंबर 1916.
  • गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास)✓ — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • शक्र द्वादशी✓ — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • शक्र ध्वजोत्थापन✓ — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • विष्णु परिवर्तन महोत्सव✓ — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • कल्कि द्वादशी✓ — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • श्रवण द्वादशी✓ — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • अगस्त्यार्घ्य✓ — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • शनि प्रदोषम् (भाद्रपद मास)✓ — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • शुक्ल त्रयोदशी उपवास — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • वामन जयंती (भाद्रपद मास)✓ — शनिवार, 9 सितंबर 1916.
  • श्रवण द्वादशी पारण✓ — रविवार, 10 सितंबर 1916.
  • कदली व्रत (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 11 सितंबर 1916.
  • उपांग ललिता गौरी व्रत✓ — सोमवार, 11 सितंबर 1916.
  • लोकपाल पूजा✓ — सोमवार, 11 सितंबर 1916.
  • अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 11 सितंबर 1916.
  • अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 11 सितंबर 1916.
  • गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 11 सितंबर 1916.
  • पितृपक्ष प्रारम्भ✓ — मंगलवार, 12 सितंबर 1916.
  • अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास)✓ — बुधवार, 13 सितंबर 1916.
  • बृहद्गौरी व्रत✓ — गुरुवार, 14 सितंबर 1916.
  • कज्जली व्रत✓ — गुरुवार, 14 सितंबर 1916.
  • विशालाक्षी यात्रा✓ — गुरुवार, 14 सितंबर 1916.
  • महा भरणी✓ — शुक्रवार, 15 सितंबर 1916.
  • संकष्टी चतुर्थी — शुक्रवार, 15 सितंबर 1916.
  • कन्या संक्रमण (04:58 AM) — शनिवार, 16 सितंबर 1916.
  • चंद्र षष्ठी✓ — शनिवार, 16 सितंबर 1916.
  • कृत्तिका व्रत✓ — रविवार, 17 सितंबर 1916.
  • महालक्ष्मी व्रत✓ — सोमवार, 18 सितंबर 1916.
  • रोहिणी व्रत✓ — सोमवार, 18 सितंबर 1916.
  • सूर्य सावर्णि मन्वादि✓ — मंगलवार, 19 सितंबर 1916.
  • मध्याष्टमी✓ — मंगलवार, 19 सितंबर 1916.
  • आर्द्राष्टमी✓ — मंगलवार, 19 सितंबर 1916.
  • दुर्गा देवी उद्यापन✓ — मंगलवार, 19 सितंबर 1916.
  • महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास)✓ — बुधवार, 20 सितंबर 1916.
  • अहीन नवमी✓ — बुधवार, 20 सितंबर 1916.
  • यति महालय✓ — शनिवार, 23 सितंबर 1916.
  • सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण)✓ संपन्न — शनिवार, 23 सितंबर 1916.
  • गजच्छाया✓ — रविवार, 24 सितंबर 1916.
  • कलियुगादि✓ — रविवार, 24 सितंबर 1916.
  • मघा त्रयोदशी श्राद्ध✓ — रविवार, 24 सितंबर 1916.
  • मघा श्राद्ध✓ — रविवार, 24 सितंबर 1916.
  • भानु प्रदोषम् (भाद्रपद मास)✓ — रविवार, 24 सितंबर 1916.
  • शस्त्रहत महालय✓ — सोमवार, 25 सितंबर 1916.
  • मासिक शिवरात्रि (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 25 सितंबर 1916.
  • कृष्ण त्रयोदशी उपवास — सोमवार, 25 सितंबर 1916.
  • गजच्छाया अमावस्या (भाद्रपद मास)✓ — मंगलवार, 26 सितंबर 1916.
  • महालय अमावस्या✓ — मंगलवार, 26 सितंबर 1916.
  • गज गौरी व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 26 सितंबर 1916.
  • बथुकम्मा प्रारंभ✓ — बुधवार, 27 सितंबर 1916.
  • एंगिली पुला बथुकम्मा✓ — बुधवार, 27 सितंबर 1916.
  • घटस्थापना (आश्विन मास)06:02 AM — गुरुवार, 28 सितंबर 1916.
  • शारदीय नवरात्रि आरम्भ✓ — गुरुवार, 28 सितंबर 1916.
  • आश्विन मासारंभ✓ — गुरुवार, 28 सितंबर 1916.
  • नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्री✓ — गुरुवार, 28 सितंबर 1916. — शैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री क…
  • नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणी✓ — शुक्रवार, 29 सितंबर 1916. — दुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जी…
  • नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटा✓ — शनिवार, 30 सितंबर 1916. — तीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के …

हिंदू त्यौहार और महत्वपूर्ण दिन

शहर: Kuala Lumpur (3.139, 101.6869) | समय क्षेत्र: Asia/Kuala_Lumpur

September 1916

01सितंबरशुक्रवारशुक्ल चतुर्थी (समाप्ति (2nd) तड़के 2:56)
🔔सामवेदी उपाकर्म✓ संपन्न
🔔गणेश चतुर्थी (भाद्रपद मास)
गणेश चतुर्थी पूजा का समय: उपयुक्त पूजा समय उपलब्ध नहीं✓ संपन्न
02सितंबरशनिवारशुक्ल पंचमी (समाप्ति (3rd) तड़के 2:28)
🔔ऋषि पंचमी (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
03सितंबररविवारशुक्ल षष्ठी (समाप्ति (4th) रात 1:33)
🔔ललिता षष्ठी व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔सूर्य षष्ठी✓ संपन्न
🔔स्कंद दर्शन✓ संपन्न
🔔बौद्ध जयंती✓ संपन्न
🔔अमुक्ताभरण सप्तमी✓ संपन्न
🔔चंपा षष्ठी (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
04सितंबरसोमवारशुक्ल सप्तमी (समाप्ति (5th) रात 12:14)
🔔ज्येष्ठा गौरी आवाहन (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
05सितंबरमंगलवारशुक्ल अष्टमी (समाप्ति रात 10:31)
🔔महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔नंदा देवी पूजा✓ संपन्न
🔔ज्येष्ठाष्टमी✓ संपन्न
🔔पुत्री ज्येष्ठा व्रत✓ संपन्न
🔔दूर्वाष्टमी (अगस्त्य उदय की स्थानीय पुष्टि आवश्यक है; दूर्वा नक्षत्र अपवाद नियम लागू है)✓ संपन्न
06सितंबरबुधवारशुक्ल नवमी (समाप्ति रात 8:25)
🔔सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔केदार व्रत✓ संपन्न
07सितंबरगुरुवारशुक्ल दशमी (समाप्ति शाम 5:58)
🔔क्षीर व्रतारंभ✓ संपन्न
08सितंबरशुक्रवारशुक्ल एकादशी (समाप्ति दोपहर 3:15)
🔔सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)✓ संपन्न
— श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी
🔔परिवर्तन एकादशी✓ संपन्न
🔔कट दान✓ संपन्न
09सितंबरशनिवारशुक्ल द्वादशी (समाप्ति दोपहर 12:20)
🔔गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔शक्र द्वादशी✓ संपन्न
🔔शक्र ध्वजोत्थापन✓ संपन्न
🔔विष्णु परिवर्तन महोत्सव✓ संपन्न
🔔कल्कि द्वादशी✓ संपन्न
🔔श्रवण द्वादशी✓ संपन्न
🔔अगस्त्यार्घ्य✓ संपन्न
🔔शुक्ल त्रयोदशी उपवास
— उपवास: शनिवार, 09 सितंबर 1916 06:06 AM - रविवार, 10 सितंबर 1916 09:18 AM✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ रविवार, 10 सितंबर 1916 09:18 AM
🔔वामन जयंती (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
10सितंबररविवारशुक्ल त्रयोदशी (समाप्ति सुबह 9:18)
🔔श्रवण द्वादशी पारण✓ संपन्न
11सितंबरसोमवारशुक्ल चतुर्दशी (समाप्ति सुबह 6:19)
🔔कदली व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔उपांग ललिता गौरी व्रत✓ संपन्न
🔔लोकपाल पूजा✓ संपन्न
🔔अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
12सितंबरमंगलवारकृष्ण प्रतिपदा (समाप्ति (13th) रात 1:00)
🔔पितृपक्ष प्रारम्भ✓ संपन्न
13सितंबरबुधवारकृष्ण द्वितीया (समाप्ति रात 10:58)
🔔अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
14सितंबरगुरुवारकृष्ण तृतीया (समाप्ति रात 9:33)
🔔बृहद्गौरी व्रत✓ संपन्न
🔔कज्जली व्रत✓ संपन्न
🔔विशालाक्षी यात्रा✓ संपन्न
15सितंबरशुक्रवारकृष्ण चतुर्थी (समाप्ति रात 8:52)
🔔महा भरणी✓ संपन्न
🔔संकष्टी चतुर्थी — चंद्रोदय: 09:05 PM✓ संपन्न
16सितंबरशनिवारकृष्ण पंचमी (समाप्ति रात 8:59)
🔔कन्या संक्रमण (04:58 AM) — पुण्यकाल: 06:04 AM - 12:28 PM✓ संपन्न
🔔चंद्र षष्ठी✓ संपन्न
17सितंबररविवारकृष्ण षष्ठी (समाप्ति रात 9:53)
🔔कृत्तिका व्रत✓ संपन्न
18सितंबरसोमवारकृष्ण सप्तमी (समाप्ति रात 11:32)
🔔महालक्ष्मी व्रत✓ संपन्न
🔔रोहिणी व्रत✓ संपन्न
19सितंबरमंगलवारकृष्ण अष्टमी (समाप्ति (20th) रात 1:44)
🔔सूर्य सावर्णि मन्वादि✓ संपन्न
🔔मध्याष्टमी✓ संपन्न
🔔आर्द्राष्टमी✓ संपन्न
🔔दुर्गा देवी उद्यापन✓ संपन्न
20सितंबरबुधवारकृष्ण नवमी (समाप्ति (21st) सुबह 4:17)
🔔महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔अहीन नवमी✓ संपन्न
23सितंबरशनिवारकृष्ण एकादशी (समाप्ति सुबह 9:23)
🔔यति महालय✓ संपन्न
🔔सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण)✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): रविवार, 24 सितंबर 1916 06:02 AM - 07:23 AM✓ संपन्न
24सितंबररविवारकृष्ण द्वादशी (समाप्ति सुबह 11:29)
🔔गजच्छाया✓ संपन्न
🔔कलियुगादि✓ संपन्न
🔔मघा त्रयोदशी श्राद्ध✓ संपन्न
🔔मघा श्राद्ध✓ संपन्न
25सितंबरसोमवारकृष्ण त्रयोदशी (समाप्ति दोपहर 1:04)
🔔शस्त्रहत महालय✓ संपन्न
🔔कृष्ण त्रयोदशी उपवास
— उपवास: सोमवार, 25 सितंबर 1916 06:01 AM - मंगलवार, 26 सितंबर 1916 06:01 AM✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ मंगलवार, 26 सितंबर 1916 06:01 AM
26सितंबरमंगलवारकृष्ण चतुर्दशी (समाप्ति दोपहर 2:06)
🔔गजच्छाया अमावस्या (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔महालय अमावस्या✓ संपन्न
🔔गज गौरी व्रत (भाद्रपद मास)
— प्रवेश समय: 10:17 AM (हस्त नक्षत्र प्रवेश)✓ संपन्न
27सितंबरबुधवारअमावस्या (समाप्ति दोपहर 2:33)
🔔बथुकम्मा प्रारंभ✓ संपन्न
🔔एंगिली पुला बथुकम्मा✓ संपन्न
28सितंबरगुरुवारशुक्ल प्रतिपदा (समाप्ति दोपहर 2:29)
🔔घटस्थापना (आश्विन मास)
06:02 AM - 01:01 PM✓ संपन्न
🔔शारदीय नवरात्रि आरम्भ✓ संपन्न
🔔आश्विन मासारंभ✓ संपन्न
🔔नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्री✓ संपन्नशैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है और इन्हें देवी सती का पुनर्जन्म माना जाता है। इनके दो हाथ हैं, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण किए हुए यह नंदी बैल पर विराजमान हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव की সম্মিলিত शक्ति का प्रतीक होने के कारण, इनकी पूजा बल, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए की जाती है।
29सितंबरशुक्रवारशुक्ल द्वितीया (समाप्ति दोपहर 1:59)
🔔नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणी✓ संपन्नदुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, जिससे उनकी अपार भक्ति और आत्म-संयम का प्रदर्शन हुआ। भक्त समर्पण और अटूट विश्वास के लिए उनकी पूजा करते हैं।
30सितंबरशनिवारशुक्ल तृतीया (समाप्ति दोपहर 1:05)
🔔नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटा✓ संपन्नतीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के आकार का अर्धचंद्र' पड़ा। वह दस हाथों में विभिन्न हथियार धारण किए हुए बाघ पर सवार होती हैं, और उनकी तीसरी आंख हमेशा खुली रहती है, जो बुराई से लड़ने की उनकी तत्परता को दर्शाती है। वह अपने भक्तों को शांति और साहस प्रदान करने वाली एक करुणामयी माँ हैं।

यह त्योहारों और महत्वपूर्ण दिनों का कैलेंडर हिंदू धर्मग्रंथों जैसे निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि में दिए गए नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे दुनिया भर में हिंदू धर्म का पालन करने वाले सभी लोगों के लाभ के लिए बनाया गया है। यदि आपको इस कैलेंडर में किसी त्योहार या किसी महत्वपूर्ण दिन के संबंध में कोई त्रुटि मिलती है, या यदि आपके क्षेत्र से संबंधित कोई त्योहार शामिल नहीं है, तो कृपया मुझे admin@onlinejyotish.com पर ईमेल करके सूचित करें। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।


शब्दावली: हिन्दू कैलेंडर के शब्द

व्रत और त्योहारों को ठीक से मनाने के लिए, ये मुख्य अवधारणाएं आवश्यक हैं:

शब्द अर्थ
तिथि एक चंद्र दिवस। यह चंद्रमा द्वारा सूर्य से 12 डिग्री दूर जाने में लिया गया समय है।
नक्षत्र एक चंद्र हवेली या तारा मंडल जिससे चंद्रमा गुजर रहा है।
पूर्णिमांत / अमावास्यांत पूर्णिमांत महीने पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं (उत्तर भारत)। अमावास्यांत महीने अमावस्या पर समाप्त होते हैं (दक्षिण भारत)।
स्मार्त बनाम वैष्णव विभिन्न संप्रदाय सख्त सूर्योदय नियमों के आधार पर अलग-अलग दिनों में एकादशी/अष्टमी मनाते हैं।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

Frequently Asked Questions

त्योहार इस बात पर निर्भर करते हैं कि सूर्योदय के समय कौन सी तिथि सक्रिय है। आपका स्थानीय मंदिर एक अलग गणना पद्धति (सूर्य सिद्धांत बनाम दृग्गणित) का उपयोग कर सकता है।

स्मार्त उस दिन उपवास करते हैं जब सूर्योदय के समय एकादशी मौजूद होती है। वैष्णव कड़ाई से मांग करते हैं कि दिन सूर्योदय के समय दशमी ओवरलैप से मुक्त हो।

यदि त्योहार के दिन ग्रहण होता है, तो अनुष्ठान, पूजा और उपवास के समय को बदलना पड़ता है।

तिथियां कैसे तैयार की जाती हैं: खगोलीय स्थितियों के लिए स्विस एफेमेरिस का उपयोग किया जाता है। त्योहार-निर्णय के पारंपरिक नियम श्री संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में बनाए रखे जाते हैं। क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

जो लोग अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए OnlineJyotish.com Exclusive और Premium जन्मकुंडली प्रदान करता है। 400 से अधिक पृष्ठों वाली इस विस्तृत जन्मकुंडली में प्रत्येक भाव का विश्लेषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह, संतान, नौकरी एवं करियर, भाग्य और जीवन के उद्देश्य से संबंधित विशेष विश्लेषण, योग, दोष एवं उनके उपायों का संपूर्ण विवरण, षड्वर्ग फल, ग्रह अवस्थाओं के फल, अष्टकवर्ग विश्लेषण एवं फल, विंशोपक बल और उनके परिणाम, 100 वर्षों के दशा, अंतर्दशा एवं प्रत्यंतरदशा फल, 100 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के गोचर की तिथियाँ तथा अगले 10 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के विस्तृत गोचर फल सहित अनेक विशेष जानकारियाँ सम्मिलित हैं। यह 400 से अधिक पृष्ठों वाली एक विस्तृत बृहत् जन्मकुंडली है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके कुछ ही क्षणों में अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें।

अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें
नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।