OnlineJyotish.com

Jersey City · 2071: हिंदू त्योहार और व्रत: तिथियाँ व स्थानीय समय

Jersey City के लिए हिन्दू त्योहारों और व्रतों की तिथियां देखें। तिथि केवल अंग्रेजी तारीख से तय नहीं होती; सूर्योदय, तिथि की अवधि, नक्षत्र, चंद्र मास और संबंधित व्रत-नियम भी देखे जाते हैं।

इस कैलेंडर का उपयोग कैसे करें?

  • स्थान सही चुनें: सूर्योदय और तिथि की सीमा शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए अलग-अलग देशों में त्योहार की तारीख अलग हो सकती है।
  • तिथि का समय पढ़ें: यदि तिथि दो तारीखों में फैली हो, तो सूर्योदय, मध्याह्न, चंद्रोदय या प्रदोष का नियम दिन तय कर सकता है।
  • अपनी परंपरा का सम्मान करें: स्मार्त, वैष्णव, क्षेत्रीय, पारिवारिक और मंदिर परंपराओं के नियम अलग हो सकते हैं। आवश्यकता होने पर अपने गुरु या स्थानीय मंदिर का निर्णय मानें।

महीने के अनुसार त्योहार खोजें

प्रमुख त्योहारों और व्रतों को देखने के लिए एक महीने और वर्ष का चयन करें।

सितंबर 2071 के हिन्दू त्योहार और व्रत

Jersey City के लिए सितंबर 2071 के त्योहार और व्रत की तिथियां:

  • महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 1 सितंबर 2071.
  • ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 1 सितंबर 2071.
  • राधा अष्टमी (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 1 सितंबर 2071.
  • नंदा देवी पूजा — मंगलवार, 1 सितंबर 2071.
  • ज्येष्ठाष्टमी — मंगलवार, 1 सितंबर 2071.
  • पुत्री ज्येष्ठा व्रत — मंगलवार, 1 सितंबर 2071.
  • सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास) — बुधवार, 2 सितंबर 2071.
  • केदार व्रत — बुधवार, 2 सितंबर 2071.
  • ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 3 सितंबर 2071.
  • क्षीर व्रतारंभ — गुरुवार, 3 सितंबर 2071.
  • सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल) — श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी — शुक्रवार, 4 सितंबर 2071.
  • परिवर्तन एकादशी — शुक्रवार, 4 सितंबर 2071.
  • कट दान — शुक्रवार, 4 सितंबर 2071.
  • शक्र द्वादशी — शनिवार, 5 सितंबर 2071.
  • शक्र ध्वजोत्थापन — शनिवार, 5 सितंबर 2071.
  • विष्णु परिवर्तन महोत्सव — शनिवार, 5 सितंबर 2071.
  • कल्कि द्वादशी — शनिवार, 5 सितंबर 2071.
  • श्रवण द्वादशी — शनिवार, 5 सितंबर 2071.
  • वामन जयंती (भाद्रपद मास) — शनिवार, 5 सितंबर 2071.
  • गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास) — रविवार, 6 सितंबर 2071.
  • श्रवण द्वादशी पारण — रविवार, 6 सितंबर 2071.
  • भानु प्रदोषम् (भाद्रपद मास) — रविवार, 6 सितंबर 2071.
  • शुक्ल त्रयोदशी उपवास — रविवार, 6 सितंबर 2071.
  • कदली व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 8 सितंबर 2071.
  • पूर्णिमा व्रत — मंगलवार, 8 सितंबर 2071.
  • लोकपाल पूजा — मंगलवार, 8 सितंबर 2071.
  • अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 8 सितंबर 2071.
  • अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 8 सितंबर 2071.
  • गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 8 सितंबर 2071.
  • सत्यनारायण स्वामी व्रत — मंगलवार, 8 सितंबर 2071.
  • उमा महेश्वर व्रत — बुधवार, 9 सितंबर 2071.
  • उपांग ललिता गौरी व्रत — बुधवार, 9 सितंबर 2071.
  • पितृपक्ष प्रारम्भ — बुधवार, 9 सितंबर 2071.
  • अगस्त्यार्घ्य — गुरुवार, 10 सितंबर 2071.
  • अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 10 सितंबर 2071.
  • बृहद्गौरी व्रत — शुक्रवार, 11 सितंबर 2071.
  • कज्जली व्रत — शुक्रवार, 11 सितंबर 2071.
  • विशालाक्षी यात्रा — शुक्रवार, 11 सितंबर 2071.
  • संकष्टी चतुर्थी — शनिवार, 12 सितंबर 2071.
  • महा भरणी — रविवार, 13 सितंबर 2071.
  • चंद्र षष्ठी — सोमवार, 14 सितंबर 2071.
  • कृत्तिका व्रत — मंगलवार, 15 सितंबर 2071.
  • महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास) — बुधवार, 16 सितंबर 2071.
  • सूर्य सावर्णि मन्वादि — बुधवार, 16 सितंबर 2071.
  • मध्याष्टमी — बुधवार, 16 सितंबर 2071.
  • महालक्ष्मी व्रत — बुधवार, 16 सितंबर 2071.
  • कालाष्टमी — बुधवार, 16 सितंबर 2071.
  • रोहिणी व्रत — बुधवार, 16 सितंबर 2071.
  • कन्या संक्रमण (11:21 AM) — गुरुवार, 17 सितंबर 2071.
  • अहीन नवमी — गुरुवार, 17 सितंबर 2071.
  • दुर्गा देवी उद्यापन — गुरुवार, 17 सितंबर 2071.
  • व्यतीपात महालय — गुरुवार, 17 सितंबर 2071.
  • सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण) — शनिवार, 19 सितंबर 2071.
  • यति महालय — रविवार, 20 सितंबर 2071.
  • गजच्छाया — सोमवार, 21 सितंबर 2071.
  • कलियुगादि — सोमवार, 21 सितंबर 2071.
  • मघा त्रयोदशी श्राद्ध — सोमवार, 21 सितंबर 2071.
  • मघा श्राद्ध — सोमवार, 21 सितंबर 2071.
  • मासिक शिवरात्रि (भाद्रपद मास) — सोमवार, 21 सितंबर 2071.
  • कृष्ण त्रयोदशी उपवास — सोमवार, 21 सितंबर 2071.
  • दर्श श्राद्ध — मंगलवार, 22 सितंबर 2071.
  • शस्त्रहत महालय — मंगलवार, 22 सितंबर 2071.
  • महालय अमावस्या — मंगलवार, 22 सितंबर 2071.
  • सूर्य ग्रहण — आंशिक • स्थानीय रूप से दृश्यमान — बुधवार, 23 सितंबर 2071.
  • बथुकम्मा प्रारंभ — बुधवार, 23 सितंबर 2071.
  • एंगिली पुला बथुकम्मा — बुधवार, 23 सितंबर 2071.
  • घटस्थापना (आश्विन मास)06:51 AM — गुरुवार, 24 सितंबर 2071.
  • शारदीय नवरात्रि आरम्भ — गुरुवार, 24 सितंबर 2071.
  • आश्विन मासारंभ — गुरुवार, 24 सितंबर 2071.
  • नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्री — गुरुवार, 24 सितंबर 2071. — शैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री क…
  • नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणी — शुक्रवार, 25 सितंबर 2071. — दुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जी…
  • नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटा — शनिवार, 26 सितंबर 2071. — तीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के …
  • मासिक विनायक चतुर्थी — शनिवार, 26 सितंबर 2071.
  • ललिता पंचमी (आश्विन मास) — रविवार, 27 सितंबर 2071.
  • गज गौरी व्रत (आश्विन मास) — रविवार, 27 सितंबर 2071.
  • नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा — रविवार, 27 सितंबर 2071.
  • नवरात्रि दिन 5 — स्कंदमाता — सोमवार, 28 सितंबर 2071. — पांचवां स्वरूप स्कंदमाता हैं, जिन्हें 'अग्नि की देवी' भी कहा जाता है। उनके नाम का अर्थ है 'स्कंद की माता', स्कंद युद्ध के देवता कार्तिकेय हैं। वह शेर पर सवार…
  • मासिक षष्ठी व्रत — सोमवार, 28 सितंबर 2071.
  • नवरात्रि दिन 6 — कात्यायनी — मंगलवार, 29 सितंबर 2071. — छठे दिन पूजी जाने वाली कात्यायनी, देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप है। उनका जन्म राक्षस महिषासुर को हराने के लिए देवताओं की সম্মিলিত ऊर्जा से हुआ था। वह शेर की स…
  • नवरात्रि दिन 7 — कालरात्रि — बुधवार, 30 सितंबर 2071. — कालरात्रि देवी दुर्गा का सातवां और सबसे भयानक स्वरूप है। उनका नाम 'काल' (समय/मृत्यु) और 'रात्रि' का संयोजन है। वह अंधकार और अज्ञान को समाप्त करने वाली शक्ति …
  • सरस्वती आवाहन (पूजा प्रारंभ) — बुधवार, 30 सितंबर 2071.

हिंदू त्यौहार और महत्वपूर्ण दिन

शहर: Jersey City (40.7178, -74.0431) | समय क्षेत्र: America/New_York

September 2071

01सितंबरमंगलवारशुक्ल अष्टमी (समाप्ति रात 7:57)
🔔महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास)
🔔ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास)
🔔राधा अष्टमी (भाद्रपद मास)
🔔नंदा देवी पूजा
🔔ज्येष्ठाष्टमी
🔔पुत्री ज्येष्ठा व्रत
02सितंबरबुधवारशुक्ल नवमी (समाप्ति रात 9:52)
🔔सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास)
🔔केदार व्रत
03सितंबरगुरुवारशुक्ल दशमी (समाप्ति (4th) रात 12:09)
🔔ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास)
🔔क्षीर व्रतारंभ
04सितंबरशुक्रवारशुक्ल एकादशी (समाप्ति (5th) तड़के 2:35)
🔔सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)
— श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी
🔔परिवर्तन एकादशी
🔔कट दान
05सितंबरशनिवारशुक्ल द्वादशी (समाप्ति (6th) सुबह 5:00)
🔔शक्र द्वादशी
🔔शक्र ध्वजोत्थापन
🔔विष्णु परिवर्तन महोत्सव
🔔कल्कि द्वादशी
🔔श्रवण द्वादशी
🔔वामन जयंती (भाद्रपद मास)
06सितंबररविवारशुक्ल त्रयोदशी (समाप्ति (7th) सुबह 7:15)
🔔गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास)
🔔श्रवण द्वादशी पारण
🔔शुक्ल त्रयोदशी उपवास
— उपवास: रविवार, 06 सितंबर 2071 06:32 AM - सोमवार, 07 सितंबर 2071 07:15 AM
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ सोमवार, 07 सितंबर 2071 07:15 AM
08सितंबरमंगलवारशुक्ल चतुर्दशी (समाप्ति सुबह 9:14)
🔔कदली व्रत (भाद्रपद मास)
🔔पूर्णिमा व्रत
🔔लोकपाल पूजा
🔔अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)
🔔अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)
🔔गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)
🔔सत्यनारायण स्वामी व्रत
09सितंबरबुधवारशुक्ल पूर्णिमा (समाप्ति सुबह 10:51)
🔔उमा महेश्वर व्रत
🔔उपांग ललिता गौरी व्रत
🔔पितृपक्ष प्रारम्भ
10सितंबरगुरुवारकृष्ण प्रतिपदा (समाप्ति दोपहर 12:05)
🔔अगस्त्यार्घ्य
🔔अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास)
11सितंबरशुक्रवारकृष्ण द्वितीया (समाप्ति दोपहर 12:53)
🔔बृहद्गौरी व्रत
🔔कज्जली व्रत
🔔विशालाक्षी यात्रा
12सितंबरशनिवारकृष्ण तृतीया (समाप्ति दोपहर 1:14)
🔔संकष्टी चतुर्थी — चंद्रोदय: 08:39 PM
13सितंबररविवारकृष्ण चतुर्थी (समाप्ति दोपहर 1:07)
🔔महा भरणी
14सितंबरसोमवारकृष्ण पंचमी (समाप्ति दोपहर 12:32)
🔔चंद्र षष्ठी
15सितंबरमंगलवारकृष्ण षष्ठी (समाप्ति सुबह 11:30)
🔔कृत्तिका व्रत
16सितंबरबुधवारकृष्ण सप्तमी (समाप्ति सुबह 10:01)
🔔महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास)
🔔सूर्य सावर्णि मन्वादि
🔔मध्याष्टमी
🔔महालक्ष्मी व्रत
🔔कालाष्टमी
🔔रोहिणी व्रत
17सितंबरगुरुवारकृष्ण अष्टमी (समाप्ति सुबह 8:08)
🔔कन्या संक्रमण (11:21 AM) — पुण्यकाल: 11:21 AM - 05:45 PM
🔔अहीन नवमी
🔔दुर्गा देवी उद्यापन
🔔व्यतीपात महालय
19सितंबरशनिवारकृष्ण एकादशी (समाप्ति (20th) रात 12:30)
🔔सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण)
— पारण (व्रत तोड़ना): रविवार, 20 सितंबर 2071 06:46 AM - 10:28 AM
20सितंबररविवारकृष्ण द्वादशी (समाप्ति रात 9:36)
🔔यति महालय
21सितंबरसोमवारकृष्ण त्रयोदशी (समाप्ति शाम 6:41)
🔔गजच्छाया
🔔कलियुगादि
🔔मघा त्रयोदशी श्राद्ध
🔔मघा श्राद्ध
🔔कृष्ण त्रयोदशी उपवास
— उपवास: सोमवार, 21 सितंबर 2071 06:47 AM - मंगलवार, 22 सितंबर 2071 06:48 AM
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ मंगलवार, 22 सितंबर 2071 06:48 AM
22सितंबरमंगलवारकृष्ण चतुर्दशी (समाप्ति दोपहर 3:54)
🔔दर्श श्राद्ध
🔔शस्त्रहत महालय
🔔महालय अमावस्या
23सितंबरबुधवारअमावस्या (समाप्ति दोपहर 1:21)
🔔सूर्य ग्रहण — आंशिक • स्थानीय रूप से दृश्यमान — प्रारंभ समय: 11:51 • समाप्ति समय: 13:54 (23 Sep 2071) (भाद्रपद मास)
🔔बथुकम्मा प्रारंभ
🔔एंगिली पुला बथुकम्मा
24सितंबरगुरुवारशुक्ल प्रतिपदा (समाप्ति सुबह 11:12)
🔔घटस्थापना (आश्विन मास)
06:51 AM - 11:12 AM
🔔शारदीय नवरात्रि आरम्भ
🔔आश्विन मासारंभ
🔔नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्रीशैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है और इन्हें देवी सती का पुनर्जन्म माना जाता है। इनके दो हाथ हैं, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण किए हुए यह नंदी बैल पर विराजमान हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव की সম্মিলিত शक्ति का प्रतीक होने के कारण, इनकी पूजा बल, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए की जाती है।
25सितंबरशुक्रवारशुक्ल द्वितीया (समाप्ति सुबह 9:33)
🔔नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणीदुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, जिससे उनकी अपार भक्ति और आत्म-संयम का प्रदर्शन हुआ। भक्त समर्पण और अटूट विश्वास के लिए उनकी पूजा करते हैं।
26सितंबरशनिवारशुक्ल तृतीया (समाप्ति सुबह 8:30)
🔔नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटातीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के आकार का अर्धचंद्र' पड़ा। वह दस हाथों में विभिन्न हथियार धारण किए हुए बाघ पर सवार होती हैं, और उनकी तीसरी आंख हमेशा खुली रहती है, जो बुराई से लड़ने की उनकी तत्परता को दर्शाती है। वह अपने भक्तों को शांति और साहस प्रदान करने वाली एक करुणामयी माँ हैं।
🔔मासिक विनायक चतुर्थी
27सितंबररविवारशुक्ल चतुर्थी (समाप्ति सुबह 8:09)
🔔ललिता पंचमी (आश्विन मास)
🔔गज गौरी व्रत (आश्विन मास)
— प्रवेश समय: 04:40 PM (हस्त नक्षत्र प्रवेश)
🔔नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा
28सितंबरसोमवारशुक्ल पंचमी (समाप्ति सुबह 8:32)
🔔नवरात्रि दिन 5 — स्कंदमातापांचवां स्वरूप स्कंदमाता हैं, जिन्हें 'अग्नि की देवी' भी कहा जाता है। उनके नाम का अर्थ है 'स्कंद की माता', स्कंद युद्ध के देवता कार्तिकेय हैं। वह शेर पर सवार होती हैं, उनकी चार भुजाएँ हैं, और वह अपनी गोद में बाल स्कंद को धारण करती हैं। स्कंदमाता की पूजा करने से उनके पुत्र स्कंद की भी पूजा हो जाती है, इसलिए भक्तों को दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वह माँ के प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक हैं।
🔔मासिक षष्ठी व्रत
29सितंबरमंगलवारशुक्ल षष्ठी (समाप्ति सुबह 9:37)
🔔नवरात्रि दिन 6 — कात्यायनीछठे दिन पूजी जाने वाली कात्यायनी, देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप है। उनका जन्म राक्षस महिषासुर को हराने के लिए देवताओं की সম্মিলিত ऊर्जा से हुआ था। वह शेर की सवारी करती हैं, और अपने हाथों में तलवार और कमल धारण करती हैं। साहस और शक्ति के प्रतीक के रूप में, भक्त व्यक्तिगत चुनौतियों पर विजय पाने और नकारात्मकता को दूर करने के लिए उनकी पूजा करते हैं।
30सितंबरबुधवारशुक्ल सप्तमी (समाप्ति सुबह 11:19)
🔔नवरात्रि दिन 7 — कालरात्रिकालरात्रि देवी दुर्गा का सातवां और सबसे भयानक स्वरूप है। उनका नाम 'काल' (समय/मृत्यु) और 'रात्रि' का संयोजन है। वह अंधकार और अज्ञान को समाप्त करने वाली शक्ति का प्रतीक है। अपने भयानक रूप के बावजूद, उन्हें 'शुभंकरी' (शुभ करने वाली) भी कहा जाता है क्योंकि वह अपने भक्तों को निडर बनाती हैं। उनका वाहन गधा है, और उन्हें सभी बुरी आत्माओं का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
🔔सरस्वती आवाहन (पूजा प्रारंभ)

यह त्योहारों और महत्वपूर्ण दिनों का कैलेंडर हिंदू धर्मग्रंथों जैसे निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि में दिए गए नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे दुनिया भर में हिंदू धर्म का पालन करने वाले सभी लोगों के लाभ के लिए बनाया गया है। यदि आपको इस कैलेंडर में किसी त्योहार या किसी महत्वपूर्ण दिन के संबंध में कोई त्रुटि मिलती है, या यदि आपके क्षेत्र से संबंधित कोई त्योहार शामिल नहीं है, तो कृपया मुझे admin@onlinejyotish.com पर ईमेल करके सूचित करें। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।


शब्दावली: हिन्दू कैलेंडर के शब्द

व्रत और त्योहारों को ठीक से मनाने के लिए, ये मुख्य अवधारणाएं आवश्यक हैं:

शब्द अर्थ
तिथि एक चंद्र दिवस। यह चंद्रमा द्वारा सूर्य से 12 डिग्री दूर जाने में लिया गया समय है।
नक्षत्र एक चंद्र हवेली या तारा मंडल जिससे चंद्रमा गुजर रहा है।
पूर्णिमांत / अमावास्यांत पूर्णिमांत महीने पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं (उत्तर भारत)। अमावास्यांत महीने अमावस्या पर समाप्त होते हैं (दक्षिण भारत)।
स्मार्त बनाम वैष्णव विभिन्न संप्रदाय सख्त सूर्योदय नियमों के आधार पर अलग-अलग दिनों में एकादशी/अष्टमी मनाते हैं।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

Frequently Asked Questions

त्योहार इस बात पर निर्भर करते हैं कि सूर्योदय के समय कौन सी तिथि सक्रिय है। आपका स्थानीय मंदिर एक अलग गणना पद्धति (सूर्य सिद्धांत बनाम दृग्गणित) का उपयोग कर सकता है।

स्मार्त उस दिन उपवास करते हैं जब सूर्योदय के समय एकादशी मौजूद होती है। वैष्णव कड़ाई से मांग करते हैं कि दिन सूर्योदय के समय दशमी ओवरलैप से मुक्त हो।

यदि त्योहार के दिन ग्रहण होता है, तो अनुष्ठान, पूजा और उपवास के समय को बदलना पड़ता है।

तिथियां कैसे तैयार की जाती हैं: खगोलीय स्थितियों के लिए स्विस एफेमेरिस का उपयोग किया जाता है। त्योहार-निर्णय के पारंपरिक नियम श्री संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में बनाए रखे जाते हैं। क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

जो लोग अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए OnlineJyotish.com Exclusive और Premium जन्मकुंडली प्रदान करता है। 400 से अधिक पृष्ठों वाली इस विस्तृत जन्मकुंडली में प्रत्येक भाव का विश्लेषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह, संतान, नौकरी एवं करियर, भाग्य और जीवन के उद्देश्य से संबंधित विशेष विश्लेषण, योग, दोष एवं उनके उपायों का संपूर्ण विवरण, षड्वर्ग फल, ग्रह अवस्थाओं के फल, अष्टकवर्ग विश्लेषण एवं फल, विंशोपक बल और उनके परिणाम, 100 वर्षों के दशा, अंतर्दशा एवं प्रत्यंतरदशा फल, 100 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के गोचर की तिथियाँ तथा अगले 10 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के विस्तृत गोचर फल सहित अनेक विशेष जानकारियाँ सम्मिलित हैं। यह 400 से अधिक पृष्ठों वाली एक विस्तृत बृहत् जन्मकुंडली है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके कुछ ही क्षणों में अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें।

अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें
नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।