Harrow के लिए हिन्दू त्योहारों और व्रतों की तिथियां देखें। तिथि केवल अंग्रेजी तारीख से तय नहीं होती; सूर्योदय, तिथि की अवधि, नक्षत्र, चंद्र मास और संबंधित व्रत-नियम भी देखे जाते हैं।
इस कैलेंडर का उपयोग कैसे करें?
- स्थान सही चुनें: सूर्योदय और तिथि की सीमा शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए अलग-अलग देशों में त्योहार की तारीख अलग हो सकती है।
- तिथि का समय पढ़ें: यदि तिथि दो तारीखों में फैली हो, तो सूर्योदय, मध्याह्न, चंद्रोदय या प्रदोष का नियम दिन तय कर सकता है।
- अपनी परंपरा का सम्मान करें: स्मार्त, वैष्णव, क्षेत्रीय, पारिवारिक और मंदिर परंपराओं के नियम अलग हो सकते हैं। आवश्यकता होने पर अपने गुरु या स्थानीय मंदिर का निर्णय मानें।
महीने के अनुसार त्योहार खोजें
प्रमुख त्योहारों और व्रतों को देखने के लिए एक महीने और वर्ष का चयन करें।
सितंबर 2047 के हिन्दू त्योहार और व्रत
Harrow के लिए सितंबर 2047 के त्योहार और व्रत की तिथियां:
- गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास) — रविवार, 1 सितंबर 2047.
- शक्र द्वादशी — रविवार, 1 सितंबर 2047.
- शक्र ध्वजोत्थापन — रविवार, 1 सितंबर 2047.
- विष्णु परिवर्तन महोत्सव — रविवार, 1 सितंबर 2047.
- कल्कि द्वादशी — रविवार, 1 सितंबर 2047.
- भानु प्रदोषम् (भाद्रपद मास) — रविवार, 1 सितंबर 2047.
- शुक्ल त्रयोदशी उपवास — रविवार, 1 सितंबर 2047.
- वामन जयंती (भाद्रपद मास) — रविवार, 1 सितंबर 2047.
- कदली व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 3 सितंबर 2047.
- पूर्णिमा व्रत — मंगलवार, 3 सितंबर 2047.
- लोकपाल पूजा — मंगलवार, 3 सितंबर 2047.
- अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 3 सितंबर 2047.
- अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 3 सितंबर 2047.
- गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 3 सितंबर 2047.
- सत्यनारायण स्वामी व्रत — मंगलवार, 3 सितंबर 2047.
- उमा महेश्वर व्रत — बुधवार, 4 सितंबर 2047.
- उपांग ललिता गौरी व्रत — बुधवार, 4 सितंबर 2047.
- पितृपक्ष प्रारम्भ — बुधवार, 4 सितंबर 2047.
- अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 5 सितंबर 2047.
- बृहद्गौरी व्रत — शुक्रवार, 6 सितंबर 2047.
- कज्जली व्रत — शुक्रवार, 6 सितंबर 2047.
- विशालाक्षी यात्रा — शुक्रवार, 6 सितंबर 2047.
- संकष्टी चतुर्थी — शनिवार, 7 सितंबर 2047.
- चंद्र षष्ठी — सोमवार, 9 सितंबर 2047.
- महा भरणी — सोमवार, 9 सितंबर 2047.
- अगस्त्यार्घ्य — मंगलवार, 10 सितंबर 2047.
- कृत्तिका व्रत — मंगलवार, 10 सितंबर 2047.
- कालाष्टमी — बुधवार, 11 सितंबर 2047.
- रोहिणी व्रत — बुधवार, 11 सितंबर 2047.
- महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास) — गुरुवार, 12 सितंबर 2047.
- सूर्य सावर्णि मन्वादि — गुरुवार, 12 सितंबर 2047.
- मध्याष्टमी — गुरुवार, 12 सितंबर 2047.
- महालक्ष्मी व्रत — गुरुवार, 12 सितंबर 2047.
- दुर्गा देवी उद्यापन — गुरुवार, 12 सितंबर 2047.
- अहीन नवमी — शुक्रवार, 13 सितंबर 2047.
- व्यतीपात महालय — शुक्रवार, 13 सितंबर 2047.
- सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण) — रविवार, 15 सितंबर 2047.
- यति महालय — सोमवार, 16 सितंबर 2047.
- कन्या संक्रमण (12:45 PM) — मंगलवार, 17 सितंबर 2047.
- गजच्छाया — मंगलवार, 17 सितंबर 2047.
- कलियुगादि — मंगलवार, 17 सितंबर 2047.
- मघा त्रयोदशी श्राद्ध — मंगलवार, 17 सितंबर 2047.
- मघा श्राद्ध — मंगलवार, 17 सितंबर 2047.
- भौम प्रदोषम् (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 17 सितंबर 2047.
- मासिक शिवरात्रि (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 17 सितंबर 2047.
- शस्त्रहत महालय — बुधवार, 18 सितंबर 2047.
- कृष्ण त्रयोदशी उपवास — बुधवार, 18 सितंबर 2047.
- केदार गौरी व्रत (आश्विन मास) — गुरुवार, 19 सितंबर 2047.
- दर्श श्राद्ध — गुरुवार, 19 सितंबर 2047.
- महालय अमावस्या — गुरुवार, 19 सितंबर 2047.
- बथुकम्मा प्रारंभ — गुरुवार, 19 सितंबर 2047.
- एंगिली पुला बथुकम्मा — गुरुवार, 19 सितंबर 2047.
- घटस्थापना (आश्विन मास)06:50 AM — शुक्रवार, 20 सितंबर 2047.
- शारदीय नवरात्रि आरम्भ — शुक्रवार, 20 सितंबर 2047.
- मातामह श्राद्ध (आश्विन मास) — शुक्रवार, 20 सितंबर 2047.
- आश्विन मासारंभ — शुक्रवार, 20 सितंबर 2047.
- नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्री — शुक्रवार, 20 सितंबर 2047. — शैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री क…
- नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणी — शनिवार, 21 सितंबर 2047. — दुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जी…
- नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटा — रविवार, 22 सितंबर 2047. — तीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के …
- मासिक विनायक चतुर्थी — रविवार, 22 सितंबर 2047.
- ललिता पंचमी (आश्विन मास) — सोमवार, 23 सितंबर 2047.
- नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा — सोमवार, 23 सितंबर 2047.
- नवरात्रि दिन 5 — स्कंदमाता — मंगलवार, 24 सितंबर 2047. — पांचवां स्वरूप स्कंदमाता हैं, जिन्हें 'अग्नि की देवी' भी कहा जाता है। उनके नाम का अर्थ है 'स्कंद की माता', स्कंद युद्ध के देवता कार्तिकेय हैं। वह शेर पर सवार…
- मासिक षष्ठी व्रत — मंगलवार, 24 सितंबर 2047.
- नवरात्रि दिन 6 — कात्यायनी — बुधवार, 25 सितंबर 2047. — छठे दिन पूजी जाने वाली कात्यायनी, देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप है। उनका जन्म राक्षस महिषासुर को हराने के लिए देवताओं की সম্মিলিত ऊर्जा से हुआ था। वह शेर की स…
- मासिक दुर्गाष्टमी (आश्विन मास) — गुरुवार, 26 सितंबर 2047.
- सद्दुल बथुकम्मा — गुरुवार, 26 सितंबर 2047.
- बथुकम्मा समापन — गुरुवार, 26 सितंबर 2047.
- दुर्गा अष्टमी — गुरुवार, 26 सितंबर 2047. — इसे महा अष्टमी भी कहा जाता है, यह नवरात्रि उत्सव का एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन, दुर्गा के आठवें स्वरूप **महागौरी** की पूजा की जाती है। वह शांति और …
- महा अष्टमी — गुरुवार, 26 सितंबर 2047.
- महागौरी — गुरुवार, 26 सितंबर 2047.
- सरस्वती आवाहन (पूजा प्रारंभ) — गुरुवार, 26 सितंबर 2047.
- गज गौरी व्रत (आश्विन मास) — शुक्रवार, 27 सितंबर 2047.
- महानवमी — शुक्रवार, 27 सितंबर 2047.
- सरस्वती पूजा / आयुध पूजा — शुक्रवार, 27 सितंबर 2047.
- अपराजिता पूजा (आश्विन मास) — शनिवार, 28 सितंबर 2047.
- विजय यात्रा (सीमोल्लंघन) (आश्विन मास) — शनिवार, 28 सितंबर 2047.
- विजयदशमी / दशहरा / साढ़े तीन मुहूर्त — शनिवार, 28 सितंबर 2047. — यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो रावण पर भगवान राम की विजय का स्मरण कराता है।
- सरस्वती विसर्जन (पूजा समाप्त) — शनिवार, 28 सितंबर 2047.
- सर्वेषां पाशांकुशा एकादशी (अश्विन शुक्ल) — रविवार, 29 सितंबर 2047.
- सरस्वती विसर्जन (पूजा समाप्त) — रविवार, 29 सितंबर 2047.
- अशोक त्रयोदशी व्रत (आश्विन मास) — सोमवार, 30 सितंबर 2047.
- शुक्ल त्रयोदशी उपवास — सोमवार, 30 सितंबर 2047.
हिंदू त्यौहार और महत्वपूर्ण दिन
September 2047
| 01सितंबररविवार | शुक्ल द्वादशी (समाप्ति सुबह 9:53) 🔔गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास) 🔔शक्र द्वादशी 🔔शक्र ध्वजोत्थापन 🔔विष्णु परिवर्तन महोत्सव 🔔कल्कि द्वादशी 🔔शुक्ल त्रयोदशी उपवास — उपवास: रविवार, 01 सितंबर 2047 06:19 AM - सोमवार, 02 सितंबर 2047 09:30 AM — पारण (व्रत तोड़ना): ≥ सोमवार, 02 सितंबर 2047 09:30 AM 🔔वामन जयंती (भाद्रपद मास) |
| 03सितंबरमंगलवार | शुक्ल चतुर्दशी (समाप्ति सुबह 9:30) 🔔कदली व्रत (भाद्रपद मास) 🔔पूर्णिमा व्रत 🔔लोकपाल पूजा 🔔अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास) 🔔अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास) 🔔गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास) 🔔सत्यनारायण स्वामी व्रत |
| 04सितंबरबुधवार | शुक्ल पूर्णिमा (समाप्ति सुबह 9:54) 🔔उमा महेश्वर व्रत 🔔उपांग ललिता गौरी व्रत 🔔पितृपक्ष प्रारम्भ |
| 05सितंबरगुरुवार | कृष्ण प्रतिपदा (समाप्ति सुबह 10:44) 🔔अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास) |
| 06सितंबरशुक्रवार | कृष्ण द्वितीया (समाप्ति दोपहर 12:02) 🔔बृहद्गौरी व्रत 🔔कज्जली व्रत 🔔विशालाक्षी यात्रा |
| 07सितंबरशनिवार | कृष्ण तृतीया (समाप्ति दोपहर 1:47) 🔔संकष्टी चतुर्थी — चंद्रोदय: 08:35 PM |
| 09सितंबरसोमवार | कृष्ण पंचमी (समाप्ति शाम 6:19) 🔔चंद्र षष्ठी 🔔महा भरणी |
| 10सितंबरमंगलवार | कृष्ण षष्ठी (समाप्ति रात 8:50) 🔔अगस्त्यार्घ्य 🔔कृत्तिका व्रत |
| 11सितंबरबुधवार | कृष्ण सप्तमी (समाप्ति रात 11:13) 🔔कालाष्टमी 🔔रोहिणी व्रत |
| 12सितंबरगुरुवार | कृष्ण अष्टमी (समाप्ति (13th) रात 1:15) 🔔महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास) 🔔सूर्य सावर्णि मन्वादि 🔔मध्याष्टमी 🔔महालक्ष्मी व्रत 🔔दुर्गा देवी उद्यापन |
| 13सितंबरशुक्रवार | कृष्ण नवमी (समाप्ति (14th) तड़के 2:43) 🔔अहीन नवमी 🔔व्यतीपात महालय |
| 15सितंबररविवार | कृष्ण एकादशी (समाप्ति (16th) तड़के 3:20) 🔔सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण) — पारण (व्रत तोड़ना): सोमवार, 16 सितंबर 2047 09:06 AM - 01:26 PM |
| 16सितंबरसोमवार | कृष्ण द्वादशी (समाप्ति (17th) तड़के 2:24) 🔔यति महालय |
| 17सितंबरमंगलवार | कृष्ण त्रयोदशी (समाप्ति (18th) रात 12:43) 🔔कन्या संक्रमण (12:45 PM) — पुण्यकाल: 12:45 PM - 07:06 PM 🔔गजच्छाया 🔔कलियुगादि 🔔मघा त्रयोदशी श्राद्ध 🔔मघा श्राद्ध |
| 18सितंबरबुधवार | कृष्ण चतुर्दशी (समाप्ति रात 10:22) 🔔शस्त्रहत महालय 🔔कृष्ण त्रयोदशी उपवास — उपवास: बुधवार, 18 सितंबर 2047 06:46 AM - गुरुवार, 19 सितंबर 2047 06:47 AM — पारण (व्रत तोड़ना): ≥ गुरुवार, 19 सितंबर 2047 06:47 AM |
| 19सितंबरगुरुवार | अमावस्या (समाप्ति रात 7:31) 🔔केदार गौरी व्रत (आश्विन मास) 🔔दर्श श्राद्ध 🔔महालय अमावस्या 🔔बथुकम्मा प्रारंभ 🔔एंगिली पुला बथुकम्मा |
| 20सितंबरशुक्रवार | शुक्ल प्रतिपदा (समाप्ति शाम 4:20) 🔔घटस्थापना (आश्विन मास) 06:50 AM - 04:20 PM 🔔शारदीय नवरात्रि आरम्भ 🔔मातामह श्राद्ध (आश्विन मास) 🔔आश्विन मासारंभ 🔔नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्रीशैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है और इन्हें देवी सती का पुनर्जन्म माना जाता है। इनके दो हाथ हैं, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण किए हुए यह नंदी बैल पर विराजमान हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव की সম্মিলিত शक्ति का प्रतीक होने के कारण, इनकी पूजा बल, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए की जाती है। |
| 21सितंबरशनिवार | शुक्ल द्वितीया (समाप्ति दोपहर 1:00) 🔔नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणीदुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, जिससे उनकी अपार भक्ति और आत्म-संयम का प्रदर्शन हुआ। भक्त समर्पण और अटूट विश्वास के लिए उनकी पूजा करते हैं। |
| 22सितंबररविवार | शुक्ल तृतीया (समाप्ति सुबह 9:40) 🔔नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटातीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के आकार का अर्धचंद्र' पड़ा। वह दस हाथों में विभिन्न हथियार धारण किए हुए बाघ पर सवार होती हैं, और उनकी तीसरी आंख हमेशा खुली रहती है, जो बुराई से लड़ने की उनकी तत्परता को दर्शाती है। वह अपने भक्तों को शांति और साहस प्रदान करने वाली एक करुणामयी माँ हैं। 🔔मासिक विनायक चतुर्थी |
| 23सितंबरसोमवार | शुक्ल पंचमी (समाप्ति (24th) तड़के 3:39) 🔔ललिता पंचमी (आश्विन मास) 🔔नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा |
| 24सितंबरमंगलवार | शुक्ल षष्ठी (समाप्ति (25th) रात 1:13) 🔔नवरात्रि दिन 5 — स्कंदमातापांचवां स्वरूप स्कंदमाता हैं, जिन्हें 'अग्नि की देवी' भी कहा जाता है। उनके नाम का अर्थ है 'स्कंद की माता', स्कंद युद्ध के देवता कार्तिकेय हैं। वह शेर पर सवार होती हैं, उनकी चार भुजाएँ हैं, और वह अपनी गोद में बाल स्कंद को धारण करती हैं। स्कंदमाता की पूजा करने से उनके पुत्र स्कंद की भी पूजा हो जाती है, इसलिए भक्तों को दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वह माँ के प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक हैं। 🔔मासिक षष्ठी व्रत |
| 25सितंबरबुधवार | शुक्ल सप्तमी (समाप्ति रात 11:15) 🔔नवरात्रि दिन 6 — कात्यायनीछठे दिन पूजी जाने वाली कात्यायनी, देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप है। उनका जन्म राक्षस महिषासुर को हराने के लिए देवताओं की সম্মিলিত ऊर्जा से हुआ था। वह शेर की सवारी करती हैं, और अपने हाथों में तलवार और कमल धारण करती हैं। साहस और शक्ति के प्रतीक के रूप में, भक्त व्यक्तिगत चुनौतियों पर विजय पाने और नकारात्मकता को दूर करने के लिए उनकी पूजा करते हैं। |
| 26सितंबरगुरुवार | शुक्ल अष्टमी (समाप्ति रात 9:49) 🔔मासिक दुर्गाष्टमी (आश्विन मास) 🔔सद्दुल बथुकम्मा 🔔बथुकम्मा समापन 🔔दुर्गा अष्टमीइसे महा अष्टमी भी कहा जाता है, यह नवरात्रि उत्सव का एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन, दुर्गा के आठवें स्वरूप **महागौरी** की पूजा की जाती है। वह शांति और पवित्रता का प्रतीक हैं। माना जाता है कि इसी दिन देवी चामुंडा राक्षसों का संहार करने के लिए दुर्गा के मस्तक से प्रकट हुई थीं। कन्या पूजन (छोटी लड़कियों की पूजा) और अस्त्र पूजा (हथियारों की पूजा) जैसे अनुष्ठान आमतौर पर किए जाते हैं। 🔔महा अष्टमी 🔔महागौरी 🔔सरस्वती आवाहन (पूजा प्रारंभ) |
| 27सितंबरशुक्रवार | शुक्ल नवमी (समाप्ति रात 8:55) 🔔गज गौरी व्रत (आश्विन मास) — प्रवेश समय: 06:05 PM (हस्त नक्षत्र प्रवेश) 🔔सरस्वती पूजा / आयुध पूजा |
| 28सितंबरशनिवार | शुक्ल दशमी (समाप्ति रात 8:30) 🔔अपराजिता पूजा (आश्विन मास) 🔔विजय यात्रा (सीमोल्लंघन) (आश्विन मास) 🔔विजयदशमी / दशहरा / साढ़े तीन मुहूर्तयह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो रावण पर भगवान राम की विजय का स्मरण कराता है। 🔔सरस्वती विसर्जन (पूजा समाप्त) |
| 29सितंबररविवार | शुक्ल एकादशी (समाप्ति रात 8:33) 🔔सर्वेषां पाशांकुशा एकादशी (अश्विन शुक्ल) — पारण (व्रत तोड़ना): सोमवार, 30 सितंबर 2047 07:05 AM - 10:34 AM 🔔सरस्वती विसर्जन (पूजा समाप्त) |
| 30सितंबरसोमवार | शुक्ल द्वादशी (समाप्ति रात 9:01) 🔔अशोक त्रयोदशी व्रत (आश्विन मास) 🔔शुक्ल त्रयोदशी उपवास — उपवास: सोमवार, 30 सितंबर 2047 07:05 AM - मंगलवार, 01 अक्टूबर 2047 09:53 PM — पारण (व्रत तोड़ना): ≥ मंगलवार, 01 अक्टूबर 2047 09:53 PM |
यह त्योहारों और महत्वपूर्ण दिनों का कैलेंडर हिंदू धर्मग्रंथों जैसे निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि में दिए गए नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे दुनिया भर में हिंदू धर्म का पालन करने वाले सभी लोगों के लाभ के लिए बनाया गया है। यदि आपको इस कैलेंडर में किसी त्योहार या किसी महत्वपूर्ण दिन के संबंध में कोई त्रुटि मिलती है, या यदि आपके क्षेत्र से संबंधित कोई त्योहार शामिल नहीं है, तो कृपया मुझे admin@onlinejyotish.com पर ईमेल करके सूचित करें। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।
शब्दावली: हिन्दू कैलेंडर के शब्द
व्रत और त्योहारों को ठीक से मनाने के लिए, ये मुख्य अवधारणाएं आवश्यक हैं:
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| तिथि | एक चंद्र दिवस। यह चंद्रमा द्वारा सूर्य से 12 डिग्री दूर जाने में लिया गया समय है। |
| नक्षत्र | एक चंद्र हवेली या तारा मंडल जिससे चंद्रमा गुजर रहा है। |
| पूर्णिमांत / अमावास्यांत | पूर्णिमांत महीने पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं (उत्तर भारत)। अमावास्यांत महीने अमावस्या पर समाप्त होते हैं (दक्षिण भारत)। |
| स्मार्त बनाम वैष्णव | विभिन्न संप्रदाय सख्त सूर्योदय नियमों के आधार पर अलग-अलग दिनों में एकादशी/अष्टमी मनाते हैं। |
सामान्य प्रश्न (FAQ)
Frequently Asked Questions
तिथियां कैसे तैयार की जाती हैं: खगोलीय स्थितियों के लिए स्विस एफेमेरिस का उपयोग किया जाता है। त्योहार-निर्णय के पारंपरिक नियम श्री संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में बनाए रखे जाते हैं। क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है।
शहर · वर्ष
Harrow
2047 · सितंबर
Europe/London