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Durban · 1936: हिंदू त्योहार और व्रत: तिथियाँ व स्थानीय समय

Durban के लिए हिन्दू त्योहारों और व्रतों की तिथियां देखें। तिथि केवल अंग्रेजी तारीख से तय नहीं होती; सूर्योदय, तिथि की अवधि, नक्षत्र, चंद्र मास और संबंधित व्रत-नियम भी देखे जाते हैं।

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  • स्थान सही चुनें: सूर्योदय और तिथि की सीमा शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए अलग-अलग देशों में त्योहार की तारीख अलग हो सकती है।
  • तिथि का समय पढ़ें: यदि तिथि दो तारीखों में फैली हो, तो सूर्योदय, मध्याह्न, चंद्रोदय या प्रदोष का नियम दिन तय कर सकता है।
  • अपनी परंपरा का सम्मान करें: स्मार्त, वैष्णव, क्षेत्रीय, पारिवारिक और मंदिर परंपराओं के नियम अलग हो सकते हैं। आवश्यकता होने पर अपने गुरु या स्थानीय मंदिर का निर्णय मानें।

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सितंबर 1936 के हिन्दू त्योहार और व्रत

Durban के लिए सितंबर 1936 के त्योहार और व्रत की तिथियां:

  • संकष्टी चतुर्थी — शुक्रवार, 4 सितंबर 1936.
  • कृत्तिका व्रत✓ — सोमवार, 7 सितंबर 1936.
  • रोहिणी व्रत✓ — मंगलवार, 8 सितंबर 1936.
  • अगस्त्यार्घ्य✓ — बुधवार, 9 सितंबर 1936.
  • सर्वेषां परमा एकादशी (भाद्रपद (अधिक) कृष्ण)✓ संपन्न — शुक्रवार, 11 सितंबर 1936.
  • शनि प्रदोषम् (अधिक भाद्रपद मास)✓ — शनिवार, 12 सितंबर 1936.
  • मघा त्रयोदशी श्राद्ध (अधिक भाद्रपद मास)✓ — रविवार, 13 सितंबर 1936.
  • मासिक शिवरात्रि (अधिक भाद्रपद मास)✓ — रविवार, 13 सितंबर 1936.
  • कृष्ण त्रयोदशी उपवास — रविवार, 13 सितंबर 1936.
  • शैव मौन व्रत✓ — मंगलवार, 15 सितंबर 1936.
  • महात्यम व्रत✓ — मंगलवार, 15 सितंबर 1936.
  • कन्या संक्रमण (03:02 AM) — बुधवार, 16 सितंबर 1936.
  • भाद्रपद मासारंभ✓ — बुधवार, 16 सितंबर 1936.
  • कल्कि जयंती✓ — गुरुवार, 17 सितंबर 1936.
  • तामस मन्वादि✓ — शुक्रवार, 18 सितंबर 1936.
  • षोडशोमा व्रत✓ — शुक्रवार, 18 सितंबर 1936.
  • सुवर्ण गौरी व्रत✓ — शुक्रवार, 18 सितंबर 1936.
  • शिव चतुर्थी✓ — शुक्रवार, 18 सितंबर 1936.
  • गौरी पूजा✓ — शुक्रवार, 18 सितंबर 1936.
  • हरितालिका तीज (भाद्रपद मास)✓ — शुक्रवार, 18 सितंबर 1936.
  • गणेश चतुर्थी (भाद्रपद मास)गणेश चतुर्थी पूजा का समय: उपयुक्त पूजा समय उपलब्ध नहीं✓ — शनिवार, 19 सितंबर 1936. — यह बाधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश के जन्म के सम्मान में मनाया जाने वाला दस दिवसीय त्योहार है, जो गणेश की मूर्तियों की स्थापना के साथ शुरू होता है।
  • ऋषि पंचमी (भाद्रपद मास)✓ — रविवार, 20 सितंबर 1936.
  • ललिता षष्ठी व्रत (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 21 सितंबर 1936.
  • ज्येष्ठा गौरी आवाहन (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 21 सितंबर 1936.
  • बौद्ध जयंती✓ — सोमवार, 21 सितंबर 1936.
  • ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास)✓ — मंगलवार, 22 सितंबर 1936.
  • सूर्य षष्ठी✓ — मंगलवार, 22 सितंबर 1936.
  • स्कंद दर्शन✓ — मंगलवार, 22 सितंबर 1936.
  • अमुक्ताभरण सप्तमी✓ — मंगलवार, 22 सितंबर 1936.
  • ज्येष्ठाष्टमी✓ — मंगलवार, 22 सितंबर 1936.
  • पुत्री ज्येष्ठा व्रत✓ — मंगलवार, 22 सितंबर 1936.
  • चंपा षष्ठी (भाद्रपद मास)✓ — मंगलवार, 22 सितंबर 1936.
  • ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ — बुधवार, 23 सितंबर 1936.
  • महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास)✓ — गुरुवार, 24 सितंबर 1936.
  • नंदा देवी पूजा✓ — गुरुवार, 24 सितंबर 1936.
  • केदार व्रत✓ — गुरुवार, 24 सितंबर 1936.
  • सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास)✓ — शुक्रवार, 25 सितंबर 1936.
  • क्षीर व्रतारंभ✓ — शनिवार, 26 सितंबर 1936.
  • गज गौरी व्रत (भाद्रपद मास) — शनिवार, 26 सितंबर 1936.
  • श्रवण द्वादशी✓ — रविवार, 27 सितंबर 1936.
  • सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)✓ संपन्न — रविवार, 27 सितंबर 1936.
  • परिवर्तन एकादशी✓ — रविवार, 27 सितंबर 1936.
  • कट दान✓ — रविवार, 27 सितंबर 1936.
  • गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 28 सितंबर 1936.
  • शक्र द्वादशी✓ — सोमवार, 28 सितंबर 1936.
  • शक्र ध्वजोत्थापन✓ — सोमवार, 28 सितंबर 1936.
  • विष्णु परिवर्तन महोत्सव✓ — सोमवार, 28 सितंबर 1936.
  • कल्कि द्वादशी✓ — सोमवार, 28 सितंबर 1936.
  • सोम प्रदोषम् (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 28 सितंबर 1936.
  • शुक्ल त्रयोदशी उपवास — सोमवार, 28 सितंबर 1936.
  • वामन जयंती (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 28 सितंबर 1936.
  • कदली व्रत (भाद्रपद मास)✓ — मंगलवार, 29 सितंबर 1936.
  • श्रवण द्वादशी पारण✓ — मंगलवार, 29 सितंबर 1936.
  • अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)✓ — मंगलवार, 29 सितंबर 1936.
  • अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)✓ — मंगलवार, 29 सितंबर 1936.
  • गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ — मंगलवार, 29 सितंबर 1936.
  • उमा महेश्वर व्रत✓ — बुधवार, 30 सितंबर 1936.
  • उपांग ललिता गौरी व्रत✓ — बुधवार, 30 सितंबर 1936.
  • लोकपाल पूजा✓ — बुधवार, 30 सितंबर 1936.

हिंदू त्यौहार और महत्वपूर्ण दिन

शहर: Durban (-29.8587, 31.0218) | समय क्षेत्र: Africa/Johannesburg

September 1936

04सितंबरशुक्रवारकृष्ण चतुर्थी (समाप्ति (5th) रात 1:24)
🔔संकष्टी चतुर्थी — चंद्रोदय: 09:08 PM✓ संपन्न
07सितंबरसोमवारकृष्ण सप्तमी (समाप्ति शाम 6:01)
🔔कृत्तिका व्रत✓ संपन्न
08सितंबरमंगलवारकृष्ण अष्टमी (समाप्ति शाम 4:34)
🔔रोहिणी व्रत✓ संपन्न
09सितंबरबुधवारकृष्ण नवमी (समाप्ति दोपहर 3:39)
🔔अगस्त्यार्घ्य✓ संपन्न
11सितंबरशुक्रवारकृष्ण एकादशी (समाप्ति दोपहर 3:20)
🔔सर्वेषां परमा एकादशी (भाद्रपद (अधिक) कृष्ण)✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): शनिवार, 12 सितंबर 1936 05:57 AM - 08:26 AM✓ संपन्न
12सितंबरशनिवारकृष्ण द्वादशी (समाप्ति दोपहर 3:52)
13सितंबररविवारकृष्ण त्रयोदशी (समाप्ति शाम 4:46)
🔔मघा त्रयोदशी श्राद्ध (अधिक भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔कृष्ण त्रयोदशी उपवास
— उपवास: रविवार, 13 सितंबर 1936 05:56 AM - सोमवार, 14 सितंबर 1936 05:55 AM✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ सोमवार, 14 सितंबर 1936 05:55 AM
15सितंबरमंगलवारअमावस्या (समाप्ति रात 7:41)
🔔शैव मौन व्रत✓ संपन्न
🔔महात्यम व्रत✓ संपन्न
16सितंबरबुधवारशुक्ल प्रतिपदा (समाप्ति रात 9:38)
🔔कन्या संक्रमण (03:02 AM) — पुण्यकाल: 05:52 AM - 12:16 PM✓ संपन्न
🔔भाद्रपद मासारंभ✓ संपन्न
17सितंबरगुरुवारशुक्ल द्वितीया (समाप्ति रात 11:52)
🔔कल्कि जयंती✓ संपन्न
18सितंबरशुक्रवारशुक्ल तृतीया (समाप्ति (19th) तड़के 2:20)
🔔तामस मन्वादि✓ संपन्न
🔔षोडशोमा व्रत✓ संपन्न
🔔सुवर्ण गौरी व्रत✓ संपन्न
🔔शिव चतुर्थी✓ संपन्न
🔔गौरी पूजा✓ संपन्न
🔔हरितालिका तीज (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
19सितंबरशनिवारशुक्ल चतुर्थी (समाप्ति (20th) सुबह 4:55)
🔔गणेश चतुर्थी (भाद्रपद मास)
गणेश चतुर्थी पूजा का समय: उपयुक्त पूजा समय उपलब्ध नहीं✓ संपन्न
20सितंबररविवारशुक्ल पंचमी (समाप्ति (21st) सुबह 7:27)
🔔ऋषि पंचमी (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
21सितंबरसोमवारशुक्ल पंचमी (समाप्ति सुबह 7:27)
🔔ललिता षष्ठी व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔ज्येष्ठा गौरी आवाहन (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔बौद्ध जयंती✓ संपन्न
22सितंबरमंगलवारशुक्ल षष्ठी (समाप्ति सुबह 9:43)
🔔ज्येष्ठा गौरी पूजा (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔सूर्य षष्ठी✓ संपन्न
🔔स्कंद दर्शन✓ संपन्न
🔔अमुक्ताभरण सप्तमी✓ संपन्न
🔔ज्येष्ठाष्टमी✓ संपन्न
🔔पुत्री ज्येष्ठा व्रत✓ संपन्न
🔔चंपा षष्ठी (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
23सितंबरबुधवारशुक्ल सप्तमी (समाप्ति सुबह 11:32)
🔔ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
24सितंबरगुरुवारशुक्ल अष्टमी (समाप्ति दोपहर 12:41)
🔔महालक्ष्मी व्रत आरम्भ (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔नंदा देवी पूजा✓ संपन्न
🔔केदार व्रत✓ संपन्न
25सितंबरशुक्रवारशुक्ल नवमी (समाप्ति दोपहर 1:02)
🔔सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
26सितंबरशनिवारशुक्ल दशमी (समाप्ति दोपहर 12:30)
🔔क्षीर व्रतारंभ✓ संपन्न
🔔गज गौरी व्रत (भाद्रपद मास)
— प्रवेश समय: 08:21 AM (हस्त नक्षत्र प्रवेश)✓ संपन्न
27सितंबररविवारशुक्ल एकादशी (समाप्ति सुबह 11:07)
🔔श्रवण द्वादशी✓ संपन्न
🔔सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): सोमवार, 28 सितंबर 1936 05:38 AM - 06:27 AM✓ संपन्न
🔔परिवर्तन एकादशी✓ संपन्न
🔔कट दान✓ संपन्न
28सितंबरसोमवारशुक्ल द्वादशी (समाप्ति सुबह 8:55)
🔔गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔शक्र द्वादशी✓ संपन्न
🔔शक्र ध्वजोत्थापन✓ संपन्न
🔔विष्णु परिवर्तन महोत्सव✓ संपन्न
🔔कल्कि द्वादशी✓ संपन्न
🔔शुक्ल त्रयोदशी उपवास
— उपवास: सोमवार, 28 सितंबर 1936 05:38 AM - मंगलवार, 29 सितंबर 1936 06:04 AM✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ मंगलवार, 29 सितंबर 1936 06:04 AM
🔔वामन जयंती (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
29सितंबरमंगलवारशुक्ल त्रयोदशी (समाप्ति सुबह 6:04)
🔔कदली व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔श्रवण द्वादशी पारण✓ संपन्न
🔔अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
30सितंबरबुधवारशुक्ल पूर्णिमा (समाप्ति रात 11:00)
🔔उमा महेश्वर व्रत✓ संपन्न
🔔उपांग ललिता गौरी व्रत✓ संपन्न
🔔लोकपाल पूजा✓ संपन्न

यह त्योहारों और महत्वपूर्ण दिनों का कैलेंडर हिंदू धर्मग्रंथों जैसे निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि में दिए गए नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे दुनिया भर में हिंदू धर्म का पालन करने वाले सभी लोगों के लाभ के लिए बनाया गया है। यदि आपको इस कैलेंडर में किसी त्योहार या किसी महत्वपूर्ण दिन के संबंध में कोई त्रुटि मिलती है, या यदि आपके क्षेत्र से संबंधित कोई त्योहार शामिल नहीं है, तो कृपया मुझे admin@onlinejyotish.com पर ईमेल करके सूचित करें। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।


शब्दावली: हिन्दू कैलेंडर के शब्द

व्रत और त्योहारों को ठीक से मनाने के लिए, ये मुख्य अवधारणाएं आवश्यक हैं:

शब्द अर्थ
तिथि एक चंद्र दिवस। यह चंद्रमा द्वारा सूर्य से 12 डिग्री दूर जाने में लिया गया समय है।
नक्षत्र एक चंद्र हवेली या तारा मंडल जिससे चंद्रमा गुजर रहा है।
पूर्णिमांत / अमावास्यांत पूर्णिमांत महीने पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं (उत्तर भारत)। अमावास्यांत महीने अमावस्या पर समाप्त होते हैं (दक्षिण भारत)।
स्मार्त बनाम वैष्णव विभिन्न संप्रदाय सख्त सूर्योदय नियमों के आधार पर अलग-अलग दिनों में एकादशी/अष्टमी मनाते हैं।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

Frequently Asked Questions

त्योहार इस बात पर निर्भर करते हैं कि सूर्योदय के समय कौन सी तिथि सक्रिय है। आपका स्थानीय मंदिर एक अलग गणना पद्धति (सूर्य सिद्धांत बनाम दृग्गणित) का उपयोग कर सकता है।

स्मार्त उस दिन उपवास करते हैं जब सूर्योदय के समय एकादशी मौजूद होती है। वैष्णव कड़ाई से मांग करते हैं कि दिन सूर्योदय के समय दशमी ओवरलैप से मुक्त हो।

यदि त्योहार के दिन ग्रहण होता है, तो अनुष्ठान, पूजा और उपवास के समय को बदलना पड़ता है।

तिथियां कैसे तैयार की जाती हैं: खगोलीय स्थितियों के लिए स्विस एफेमेरिस का उपयोग किया जाता है। त्योहार-निर्णय के पारंपरिक नियम श्री संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में बनाए रखे जाते हैं। क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।