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Dubai · 2028: हिंदू त्योहार और व्रत: तिथियाँ व स्थानीय समय

Dubai के लिए हिन्दू त्योहारों और व्रतों की तिथियां देखें। तिथि केवल अंग्रेजी तारीख से तय नहीं होती; सूर्योदय, तिथि की अवधि, नक्षत्र, चंद्र मास और संबंधित व्रत-नियम भी देखे जाते हैं।

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  • तिथि का समय पढ़ें: यदि तिथि दो तारीखों में फैली हो, तो सूर्योदय, मध्याह्न, चंद्रोदय या प्रदोष का नियम दिन तय कर सकता है।
  • अपनी परंपरा का सम्मान करें: स्मार्त, वैष्णव, क्षेत्रीय, पारिवारिक और मंदिर परंपराओं के नियम अलग हो सकते हैं। आवश्यकता होने पर अपने गुरु या स्थानीय मंदिर का निर्णय मानें।

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सितंबर 2028 के हिन्दू त्योहार और व्रत

Dubai के लिए सितंबर 2028 के त्योहार और व्रत की तिथियां:

  • भृगु प्रदोषम् (भाद्रपद मास) — शुक्रवार, 1 सितंबर 2028.
  • कदली व्रत (भाद्रपद मास) — शनिवार, 2 सितंबर 2028.
  • अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास) — शनिवार, 2 सितंबर 2028.
  • अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास) — शनिवार, 2 सितंबर 2028.
  • गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास) — शनिवार, 2 सितंबर 2028.
  • अनंत व्रतारंभ (मध्याह्न) — शनिवार, 2 सितंबर 2028.
  • पूर्णिमा व्रत — रविवार, 3 सितंबर 2028.
  • उमा महेश्वर व्रत — रविवार, 3 सितंबर 2028.
  • उपांग ललिता गौरी व्रत — रविवार, 3 सितंबर 2028.
  • लोकपाल पूजा — रविवार, 3 सितंबर 2028.
  • सत्यनारायण स्वामी व्रत — रविवार, 3 सितंबर 2028.
  • पितृपक्ष प्रारम्भ — सोमवार, 4 सितंबर 2028.
  • अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास) — मंगलवार, 5 सितंबर 2028.
  • बृहद्गौरी व्रत — बुधवार, 6 सितंबर 2028.
  • कज्जली व्रत — बुधवार, 6 सितंबर 2028.
  • विशालाक्षी यात्रा — बुधवार, 6 सितंबर 2028.
  • संकष्टी चतुर्थी — गुरुवार, 7 सितंबर 2028.
  • चंद्र षष्ठी — शनिवार, 9 सितंबर 2028.
  • महा भरणी — शनिवार, 9 सितंबर 2028.
  • अगस्त्यार्घ्य — शनिवार, 9 सितंबर 2028.
  • कृत्तिका व्रत — रविवार, 10 सितंबर 2028.
  • महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास) — सोमवार, 11 सितंबर 2028.
  • महालक्ष्मी व्रत — सोमवार, 11 सितंबर 2028.
  • कालाष्टमी — सोमवार, 11 सितंबर 2028.
  • रोहिणी व्रत — सोमवार, 11 सितंबर 2028.
  • सूर्य सावर्णि मन्वादि — मंगलवार, 12 सितंबर 2028.
  • मध्याष्टमी — मंगलवार, 12 सितंबर 2028.
  • दुर्गा देवी उद्यापन — मंगलवार, 12 सितंबर 2028.
  • अहीन नवमी — बुधवार, 13 सितंबर 2028.
  • व्यतीपात महालय — बुधवार, 13 सितंबर 2028.
  • यति महालय — शुक्रवार, 15 सितंबर 2028.
  • सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण) — शुक्रवार, 15 सितंबर 2028.
  • कन्या संक्रमण (06:52 PM) — शनिवार, 16 सितंबर 2028.
  • गजच्छाया — शनिवार, 16 सितंबर 2028.
  • कलियुगादि — शनिवार, 16 सितंबर 2028.
  • मघा त्रयोदशी श्राद्ध — शनिवार, 16 सितंबर 2028.
  • शनि प्रदोषम् (भाद्रपद मास) — शनिवार, 16 सितंबर 2028.
  • शस्त्रहत महालय — रविवार, 17 सितंबर 2028.
  • मघा श्राद्ध — रविवार, 17 सितंबर 2028.
  • मासिक शिवरात्रि (भाद्रपद मास) — रविवार, 17 सितंबर 2028.
  • कृष्ण त्रयोदशी उपवास — रविवार, 17 सितंबर 2028.
  • दर्श श्राद्ध — सोमवार, 18 सितंबर 2028.
  • महालय अमावस्या — सोमवार, 18 सितंबर 2028.
  • बथुकम्मा प्रारंभ — सोमवार, 18 सितंबर 2028.
  • एंगिली पुला बथुकम्मा — सोमवार, 18 सितंबर 2028.
  • सोमवती अमावस्या — सोमवार, 18 सितंबर 2028.
  • घटस्थापना (आश्विन मास)06:11 AM — मंगलवार, 19 सितंबर 2028.
  • शारदीय नवरात्रि आरम्भ — मंगलवार, 19 सितंबर 2028.
  • मातामह श्राद्ध (आश्विन मास) — मंगलवार, 19 सितंबर 2028.
  • आश्विन मासारंभ — मंगलवार, 19 सितंबर 2028.
  • नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्री — मंगलवार, 19 सितंबर 2028. — शैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री क…
  • नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणी — बुधवार, 20 सितंबर 2028. — दुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जी…
  • नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटा — गुरुवार, 21 सितंबर 2028. — तीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के …
  • मासिक विनायक चतुर्थी — गुरुवार, 21 सितंबर 2028.
  • ललिता पंचमी (आश्विन मास) — शुक्रवार, 22 सितंबर 2028.
  • नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा — शुक्रवार, 22 सितंबर 2028.
  • नवरात्रि दिन 5 — स्कंदमाता — शनिवार, 23 सितंबर 2028. — पांचवां स्वरूप स्कंदमाता हैं, जिन्हें 'अग्नि की देवी' भी कहा जाता है। उनके नाम का अर्थ है 'स्कंद की माता', स्कंद युद्ध के देवता कार्तिकेय हैं। वह शेर पर सवार…
  • मासिक षष्ठी व्रत — शनिवार, 23 सितंबर 2028.
  • नवरात्रि दिन 6 — कात्यायनी — रविवार, 24 सितंबर 2028. — छठे दिन पूजी जाने वाली कात्यायनी, देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप है। उनका जन्म राक्षस महिषासुर को हराने के लिए देवताओं की সম্মিলিত ऊर्जा से हुआ था। वह शेर की स…
  • भानु सप्तमी — रविवार, 24 सितंबर 2028.
  • मासिक दुर्गाष्टमी (आश्विन मास) — सोमवार, 25 सितंबर 2028.
  • सद्दुल बथुकम्मा — सोमवार, 25 सितंबर 2028.
  • बथुकम्मा समापन — सोमवार, 25 सितंबर 2028.
  • दुर्गा अष्टमी — सोमवार, 25 सितंबर 2028. — इसे महा अष्टमी भी कहा जाता है, यह नवरात्रि उत्सव का एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन, दुर्गा के आठवें स्वरूप **महागौरी** की पूजा की जाती है। वह शांति और …
  • महा अष्टमी — सोमवार, 25 सितंबर 2028.
  • महागौरी — सोमवार, 25 सितंबर 2028.
  • सरस्वती आवाहन (पूजा प्रारंभ) — सोमवार, 25 सितंबर 2028.
  • महानवमी — मंगलवार, 26 सितंबर 2028.
  • सरस्वती पूजा / आयुध पूजा — मंगलवार, 26 सितंबर 2028.
  • अपराजिता पूजा (आश्विन मास) — बुधवार, 27 सितंबर 2028.
  • विजय यात्रा (सीमोल्लंघन) (आश्विन मास) — बुधवार, 27 सितंबर 2028.
  • गज गौरी व्रत (आश्विन मास) — बुधवार, 27 सितंबर 2028.
  • विजयदशमी / दशहरा / साढ़े तीन मुहूर्त — बुधवार, 27 सितंबर 2028. — यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो रावण पर भगवान राम की विजय का स्मरण कराता है।
  • सरस्वती विसर्जन (पूजा समाप्त) — बुधवार, 27 सितंबर 2028.
  • सरस्वती विसर्जन (पूजा समाप्त) — गुरुवार, 28 सितंबर 2028.
  • सर्वेषां पाशांकुशा एकादशी (अश्विन शुक्ल) — शुक्रवार, 29 सितंबर 2028.
  • अशोक त्रयोदशी व्रत (आश्विन मास) — शनिवार, 30 सितंबर 2028.
  • शनि प्रदोषम् (आश्विन मास) — शनिवार, 30 सितंबर 2028.
  • शुक्ल त्रयोदशी उपवास — शनिवार, 30 सितंबर 2028.

हिंदू त्यौहार और महत्वपूर्ण दिन

शहर: Dubai (25.2048, 55.2708) | समय क्षेत्र: Asia/Dubai

September 2028

01सितंबरशुक्रवारशुक्ल त्रयोदशी (समाप्ति रात 11:05)
02सितंबरशनिवारशुक्ल चतुर्दशी (समाप्ति (3rd) रात 1:22)
🔔कदली व्रत (भाद्रपद मास)
🔔अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)
🔔अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)
🔔गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)
🔔अनंत व्रतारंभ (मध्याह्न)
03सितंबररविवारशुक्ल पूर्णिमा (समाप्ति (4th) तड़के 3:47)
🔔पूर्णिमा व्रत
🔔उमा महेश्वर व्रत
🔔उपांग ललिता गौरी व्रत
🔔लोकपाल पूजा
🔔सत्यनारायण स्वामी व्रत
04सितंबरसोमवारकृष्ण प्रतिपदा (समाप्ति (5th) सुबह 6:14)
🔔पितृपक्ष प्रारम्भ
05सितंबरमंगलवारकृष्ण प्रतिपदा (समाप्ति सुबह 6:14)
🔔अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास)
06सितंबरबुधवारकृष्ण द्वितीया (समाप्ति सुबह 8:39)
🔔बृहद्गौरी व्रत
🔔कज्जली व्रत
🔔विशालाक्षी यात्रा
07सितंबरगुरुवारकृष्ण तृतीया (समाप्ति सुबह 10:56)
🔔संकष्टी चतुर्थी — चंद्रोदय: 08:26 PM
09सितंबरशनिवारकृष्ण पंचमी (समाप्ति दोपहर 2:43)
🔔चंद्र षष्ठी
🔔महा भरणी
🔔अगस्त्यार्घ्य
10सितंबररविवारकृष्ण षष्ठी (समाप्ति दोपहर 3:59)
🔔कृत्तिका व्रत
11सितंबरसोमवारकृष्ण सप्तमी (समाप्ति शाम 4:40)
🔔महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास)
🔔महालक्ष्मी व्रत
🔔कालाष्टमी
🔔रोहिणी व्रत
12सितंबरमंगलवारकृष्ण अष्टमी (समाप्ति शाम 4:40)
🔔सूर्य सावर्णि मन्वादि
🔔मध्याष्टमी
🔔दुर्गा देवी उद्यापन
13सितंबरबुधवारकृष्ण नवमी (समाप्ति दोपहर 3:55)
🔔अहीन नवमी
🔔व्यतीपात महालय
15सितंबरशुक्रवारकृष्ण एकादशी (समाप्ति दोपहर 12:12)
🔔यति महालय
🔔सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण)
— पारण (व्रत तोड़ना): शनिवार, 16 सितंबर 2028 06:09 AM - 06:57 AM
16सितंबरशनिवारकृष्ण द्वादशी (समाप्ति सुबह 9:21)
🔔कन्या संक्रमण (06:52 PM) — पुण्यकाल: 11:53 AM - 06:17 PM
🔔गजच्छाया
🔔कलियुगादि
🔔मघा त्रयोदशी श्राद्ध
17सितंबररविवारकृष्ण चतुर्दशी (समाप्ति (18th) तड़के 2:17)
🔔शस्त्रहत महालय
🔔मघा श्राद्ध
🔔कृष्ण त्रयोदशी उपवास
— उपवास: रविवार, 17 सितंबर 2028 06:09 AM - सोमवार, 18 सितंबर 2028 06:09 AM
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ सोमवार, 18 सितंबर 2028 06:09 AM
18सितंबरसोमवारअमावस्या (समाप्ति रात 10:23)
🔔दर्श श्राद्ध
🔔महालय अमावस्या
🔔बथुकम्मा प्रारंभ
🔔एंगिली पुला बथुकम्मा
🔔सोमवती अमावस्या
19सितंबरमंगलवारशुक्ल प्रतिपदा (समाप्ति शाम 6:30)
🔔घटस्थापना (आश्विन मास)
06:11 AM - 06:14 PM
🔔शारदीय नवरात्रि आरम्भ
🔔मातामह श्राद्ध (आश्विन मास)
🔔आश्विन मासारंभ
🔔नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्रीशैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है और इन्हें देवी सती का पुनर्जन्म माना जाता है। इनके दो हाथ हैं, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण किए हुए यह नंदी बैल पर विराजमान हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव की সম্মিলিত शक्ति का प्रतीक होने के कारण, इनकी पूजा बल, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए की जाती है।
20सितंबरबुधवारशुक्ल द्वितीया (समाप्ति दोपहर 2:49)
🔔नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणीदुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, जिससे उनकी अपार भक्ति और आत्म-संयम का प्रदर्शन हुआ। भक्त समर्पण और अटूट विश्वास के लिए उनकी पूजा करते हैं।
21सितंबरगुरुवारशुक्ल तृतीया (समाप्ति सुबह 11:30)
🔔नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटातीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के आकार का अर्धचंद्र' पड़ा। वह दस हाथों में विभिन्न हथियार धारण किए हुए बाघ पर सवार होती हैं, और उनकी तीसरी आंख हमेशा खुली रहती है, जो बुराई से लड़ने की उनकी तत्परता को दर्शाती है। वह अपने भक्तों को शांति और साहस प्रदान करने वाली एक करुणामयी माँ हैं।
🔔मासिक विनायक चतुर्थी
22सितंबरशुक्रवारशुक्ल चतुर्थी (समाप्ति सुबह 8:45)
🔔ललिता पंचमी (आश्विन मास)
🔔नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा
23सितंबरशनिवारशुक्ल पंचमी (समाप्ति सुबह 6:42)
🔔नवरात्रि दिन 5 — स्कंदमातापांचवां स्वरूप स्कंदमाता हैं, जिन्हें 'अग्नि की देवी' भी कहा जाता है। उनके नाम का अर्थ है 'स्कंद की माता', स्कंद युद्ध के देवता कार्तिकेय हैं। वह शेर पर सवार होती हैं, उनकी चार भुजाएँ हैं, और वह अपनी गोद में बाल स्कंद को धारण करती हैं। स्कंदमाता की पूजा करने से उनके पुत्र स्कंद की भी पूजा हो जाती है, इसलिए भक्तों को दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वह माँ के प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक हैं।
🔔मासिक षष्ठी व्रत
24सितंबररविवारशुक्ल सप्तमी (समाप्ति (25th) सुबह 5:03)
🔔नवरात्रि दिन 6 — कात्यायनीछठे दिन पूजी जाने वाली कात्यायनी, देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप है। उनका जन्म राक्षस महिषासुर को हराने के लिए देवताओं की সম্মিলিত ऊर्जा से हुआ था। वह शेर की सवारी करती हैं, और अपने हाथों में तलवार और कमल धारण करती हैं। साहस और शक्ति के प्रतीक के रूप में, भक्त व्यक्तिगत चुनौतियों पर विजय पाने और नकारात्मकता को दूर करने के लिए उनकी पूजा करते हैं।
🔔भानु सप्तमी
25सितंबरसोमवारशुक्ल अष्टमी (समाप्ति (26th) सुबह 5:28)
🔔मासिक दुर्गाष्टमी (आश्विन मास)
🔔सद्दुल बथुकम्मा
🔔बथुकम्मा समापन
🔔दुर्गा अष्टमीइसे महा अष्टमी भी कहा जाता है, यह नवरात्रि उत्सव का एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन, दुर्गा के आठवें स्वरूप **महागौरी** की पूजा की जाती है। वह शांति और पवित्रता का प्रतीक हैं। माना जाता है कि इसी दिन देवी चामुंडा राक्षसों का संहार करने के लिए दुर्गा के मस्तक से प्रकट हुई थीं। कन्या पूजन (छोटी लड़कियों की पूजा) और अस्त्र पूजा (हथियारों की पूजा) जैसे अनुष्ठान आमतौर पर किए जाते हैं।
🔔महा अष्टमी
🔔महागौरी
🔔सरस्वती आवाहन (पूजा प्रारंभ)
26सितंबरमंगलवारशुक्ल नवमी (समाप्ति (27th) सुबह 6:39)
🔔सरस्वती पूजा / आयुध पूजा
27सितंबरबुधवारशुक्ल नवमी (समाप्ति सुबह 6:39)
🔔अपराजिता पूजा (आश्विन मास)
🔔विजय यात्रा (सीमोल्लंघन) (आश्विन मास)
🔔गज गौरी व्रत (आश्विन मास)
— प्रवेश समय: 12:10 AM (हस्त नक्षत्र प्रवेश)
🔔विजयदशमी / दशहरा / साढ़े तीन मुहूर्तयह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो रावण पर भगवान राम की विजय का स्मरण कराता है।
🔔सरस्वती विसर्जन (पूजा समाप्त)
28सितंबरगुरुवारशुक्ल दशमी (समाप्ति सुबह 8:25)
🔔सरस्वती विसर्जन (पूजा समाप्त)
29सितंबरशुक्रवारशुक्ल एकादशी (समाप्ति सुबह 10:37)
🔔सर्वेषां पाशांकुशा एकादशी (अश्विन शुक्ल)
— पारण (व्रत तोड़ना): शनिवार, 30 सितंबर 2028 06:14 AM - 07:56 AM
30सितंबरशनिवारशुक्ल द्वादशी (समाप्ति दोपहर 1:04)
🔔अशोक त्रयोदशी व्रत (आश्विन मास)
🔔शुक्ल त्रयोदशी उपवास
— उपवास: शनिवार, 30 सितंबर 2028 06:14 AM - रविवार, 01 अक्टूबर 2028 03:35 PM
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ रविवार, 01 अक्टूबर 2028 03:35 PM

यह त्योहारों और महत्वपूर्ण दिनों का कैलेंडर हिंदू धर्मग्रंथों जैसे निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि में दिए गए नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे दुनिया भर में हिंदू धर्म का पालन करने वाले सभी लोगों के लाभ के लिए बनाया गया है। यदि आपको इस कैलेंडर में किसी त्योहार या किसी महत्वपूर्ण दिन के संबंध में कोई त्रुटि मिलती है, या यदि आपके क्षेत्र से संबंधित कोई त्योहार शामिल नहीं है, तो कृपया मुझे admin@onlinejyotish.com पर ईमेल करके सूचित करें। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।


शब्दावली: हिन्दू कैलेंडर के शब्द

व्रत और त्योहारों को ठीक से मनाने के लिए, ये मुख्य अवधारणाएं आवश्यक हैं:

शब्द अर्थ
तिथि एक चंद्र दिवस। यह चंद्रमा द्वारा सूर्य से 12 डिग्री दूर जाने में लिया गया समय है।
नक्षत्र एक चंद्र हवेली या तारा मंडल जिससे चंद्रमा गुजर रहा है।
पूर्णिमांत / अमावास्यांत पूर्णिमांत महीने पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं (उत्तर भारत)। अमावास्यांत महीने अमावस्या पर समाप्त होते हैं (दक्षिण भारत)।
स्मार्त बनाम वैष्णव विभिन्न संप्रदाय सख्त सूर्योदय नियमों के आधार पर अलग-अलग दिनों में एकादशी/अष्टमी मनाते हैं।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

Frequently Asked Questions

त्योहार इस बात पर निर्भर करते हैं कि सूर्योदय के समय कौन सी तिथि सक्रिय है। आपका स्थानीय मंदिर एक अलग गणना पद्धति (सूर्य सिद्धांत बनाम दृग्गणित) का उपयोग कर सकता है।

स्मार्त उस दिन उपवास करते हैं जब सूर्योदय के समय एकादशी मौजूद होती है। वैष्णव कड़ाई से मांग करते हैं कि दिन सूर्योदय के समय दशमी ओवरलैप से मुक्त हो।

यदि त्योहार के दिन ग्रहण होता है, तो अनुष्ठान, पूजा और उपवास के समय को बदलना पड़ता है।

तिथियां कैसे तैयार की जाती हैं: खगोलीय स्थितियों के लिए स्विस एफेमेरिस का उपयोग किया जाता है। त्योहार-निर्णय के पारंपरिक नियम श्री संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में बनाए रखे जाते हैं। क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।