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Chaguanas · 2025: हिंदू त्योहार और व्रत: तिथियाँ व स्थानीय समय

Chaguanas के लिए हिन्दू त्योहारों और व्रतों की तिथियां देखें। तिथि केवल अंग्रेजी तारीख से तय नहीं होती; सूर्योदय, तिथि की अवधि, नक्षत्र, चंद्र मास और संबंधित व्रत-नियम भी देखे जाते हैं।

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  • तिथि का समय पढ़ें: यदि तिथि दो तारीखों में फैली हो, तो सूर्योदय, मध्याह्न, चंद्रोदय या प्रदोष का नियम दिन तय कर सकता है।
  • अपनी परंपरा का सम्मान करें: स्मार्त, वैष्णव, क्षेत्रीय, पारिवारिक और मंदिर परंपराओं के नियम अलग हो सकते हैं। आवश्यकता होने पर अपने गुरु या स्थानीय मंदिर का निर्णय मानें।

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सितंबर 2025 के हिन्दू त्योहार और व्रत

Chaguanas के लिए सितंबर 2025 के त्योहार और व्रत की तिथियां:

  • सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 1 सितंबर 2025.
  • ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 1 सितंबर 2025.
  • केदार व्रत✓ — सोमवार, 1 सितंबर 2025.
  • क्षीर व्रतारंभ✓ — मंगलवार, 2 सितंबर 2025.
  • सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)✓ संपन्न — श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी — बुधवार, 3 सितंबर 2025.
  • परिवर्तन एकादशी✓ — बुधवार, 3 सितंबर 2025.
  • कट दान✓ — बुधवार, 3 सितंबर 2025.
  • गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास)✓ — गुरुवार, 4 सितंबर 2025.
  • शक्र द्वादशी✓ — गुरुवार, 4 सितंबर 2025.
  • शक्र ध्वजोत्थापन✓ — गुरुवार, 4 सितंबर 2025.
  • विष्णु परिवर्तन महोत्सव✓ — गुरुवार, 4 सितंबर 2025.
  • कल्कि द्वादशी✓ — गुरुवार, 4 सितंबर 2025.
  • श्रवण द्वादशी✓ — गुरुवार, 4 सितंबर 2025.
  • गुरु प्रदोषम् (भाद्रपद मास)✓ — गुरुवार, 4 सितंबर 2025.
  • शुक्ल त्रयोदशी उपवास — गुरुवार, 4 सितंबर 2025.
  • वामन जयंती (भाद्रपद मास)✓ — गुरुवार, 4 सितंबर 2025.
  • श्रवण द्वादशी पारण✓ — शुक्रवार, 5 सितंबर 2025.
  • कदली व्रत (भाद्रपद मास)✓ — शनिवार, 6 सितंबर 2025.
  • अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)✓ — शनिवार, 6 सितंबर 2025.
  • अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)✓ — शनिवार, 6 सितंबर 2025.
  • गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ — शनिवार, 6 सितंबर 2025.
  • अनंत व्रतारंभ (मध्याह्न)✓ — शनिवार, 6 सितंबर 2025.
  • सत्यनारायण स्वामी व्रत✓ — शनिवार, 6 सितंबर 2025.
  • पूर्णिमा व्रत✓ — रविवार, 7 सितंबर 2025.
  • उमा महेश्वर व्रत✓ — रविवार, 7 सितंबर 2025.
  • उपांग ललिता गौरी व्रत✓ — रविवार, 7 सितंबर 2025.
  • लोकपाल पूजा✓ — रविवार, 7 सितंबर 2025.
  • पितृपक्ष प्रारम्भ✓ — रविवार, 7 सितंबर 2025.
  • अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 8 सितंबर 2025.
  • बृहद्गौरी व्रत✓ — मंगलवार, 9 सितंबर 2025.
  • कज्जली व्रत✓ — मंगलवार, 9 सितंबर 2025.
  • विशालाक्षी यात्रा✓ — मंगलवार, 9 सितंबर 2025.
  • अगस्त्यार्घ्य✓ — मंगलवार, 9 सितंबर 2025.
  • संकष्टी चतुर्थी — बुधवार, 10 सितंबर 2025.
  • महा भरणी✓ — गुरुवार, 11 सितंबर 2025.
  • कृत्तिका व्रत✓ — शुक्रवार, 12 सितंबर 2025.
  • महालक्ष्मी व्रत✓ — शनिवार, 13 सितंबर 2025.
  • कालाष्टमी✓ — शनिवार, 13 सितंबर 2025.
  • रोहिणी व्रत✓ — शनिवार, 13 सितंबर 2025.
  • सूर्य सावर्णि मन्वादि✓ — रविवार, 14 सितंबर 2025.
  • मध्याष्टमी✓ — रविवार, 14 सितंबर 2025.
  • दुर्गा देवी उद्यापन✓ — रविवार, 14 सितंबर 2025.
  • महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास)✓ — सोमवार, 15 सितंबर 2025.
  • अहीन नवमी✓ — सोमवार, 15 सितंबर 2025.
  • व्यतीपात महालय✓ — सोमवार, 15 सितंबर 2025.
  • कन्या संक्रमण (04:19 PM) — मंगलवार, 16 सितंबर 2025.
  • यति महालय✓ — बुधवार, 17 सितंबर 2025.
  • सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण)✓ संपन्न — बुधवार, 17 सितंबर 2025.
  • गजच्छाया✓ — गुरुवार, 18 सितंबर 2025.
  • कलियुगादि✓ — गुरुवार, 18 सितंबर 2025.
  • गुरु प्रदोषम् (भाद्रपद मास)✓ — गुरुवार, 18 सितंबर 2025.
  • मघा त्रयोदशी श्राद्ध✓ — शुक्रवार, 19 सितंबर 2025.
  • शस्त्रहत महालय✓ — शुक्रवार, 19 सितंबर 2025.
  • मघा श्राद्ध✓ — शुक्रवार, 19 सितंबर 2025.
  • मासिक शिवरात्रि (भाद्रपद मास)✓ — शुक्रवार, 19 सितंबर 2025.
  • कृष्ण त्रयोदशी उपवास — शुक्रवार, 19 सितंबर 2025.
  • दर्श श्राद्ध✓ — शनिवार, 20 सितंबर 2025.
  • महालय अमावस्या✓ — शनिवार, 20 सितंबर 2025.
  • बथुकम्मा प्रारंभ✓ — रविवार, 21 सितंबर 2025.
  • एंगिली पुला बथुकम्मा✓ — रविवार, 21 सितंबर 2025.
  • घटस्थापना (आश्विन मास)05:59 AM — सोमवार, 22 सितंबर 2025.
  • शारदीय नवरात्रि आरम्भ✓ — सोमवार, 22 सितंबर 2025.
  • मातामह श्राद्ध (आश्विन मास)✓ — सोमवार, 22 सितंबर 2025.
  • आश्विन मासारंभ✓ — सोमवार, 22 सितंबर 2025.
  • नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्री✓ — सोमवार, 22 सितंबर 2025. — शैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री क…
  • नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणी✓ — मंगलवार, 23 सितंबर 2025. — दुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जी…
  • नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटा✓ — बुधवार, 24 सितंबर 2025. — तीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के …
  • नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा✓ — गुरुवार, 25 सितंबर 2025.
  • मासिक विनायक चतुर्थी✓ — गुरुवार, 25 सितंबर 2025.
  • ललिता पंचमी (आश्विन मास)✓ — शुक्रवार, 26 सितंबर 2025.
  • गज गौरी व्रत (आश्विन मास) — शुक्रवार, 26 सितंबर 2025.
  • नवरात्रि दिन 5 — स्कंदमाता✓ — शुक्रवार, 26 सितंबर 2025. — पांचवां स्वरूप स्कंदमाता हैं, जिन्हें 'अग्नि की देवी' भी कहा जाता है। उनके नाम का अर्थ है 'स्कंद की माता', स्कंद युद्ध के देवता कार्तिकेय हैं। वह शेर पर सवार…
  • नवरात्रि दिन 6 — कात्यायनी✓ — शनिवार, 27 सितंबर 2025. — छठे दिन पूजी जाने वाली कात्यायनी, देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप है। उनका जन्म राक्षस महिषासुर को हराने के लिए देवताओं की সম্মিলিত ऊर्जा से हुआ था। वह शेर की स…
  • मासिक षष्ठी व्रत✓ — शनिवार, 27 सितंबर 2025.
  • नवरात्रि दिन 7 — कालरात्रि✓ — रविवार, 28 सितंबर 2025. — कालरात्रि देवी दुर्गा का सातवां और सबसे भयानक स्वरूप है। उनका नाम 'काल' (समय/मृत्यु) और 'रात्रि' का संयोजन है। वह अंधकार और अज्ञान को समाप्त करने वाली शक्ति …
  • भानु सप्तमी✓ — रविवार, 28 सितंबर 2025.
  • मासिक दुर्गाष्टमी (आश्विन मास)✓ — सोमवार, 29 सितंबर 2025.
  • सरस्वती आवाहन (पूजा प्रारंभ)✓ — सोमवार, 29 सितंबर 2025.
  • सद्दुल बथुकम्मा✓ — मंगलवार, 30 सितंबर 2025.
  • बथुकम्मा समापन✓ — मंगलवार, 30 सितंबर 2025.
  • दुर्गा अष्टमी✓ — मंगलवार, 30 सितंबर 2025. — इसे महा अष्टमी भी कहा जाता है, यह नवरात्रि उत्सव का एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन, दुर्गा के आठवें स्वरूप **महागौरी** की पूजा की जाती है। वह शांति और …
  • महा अष्टमी✓ — मंगलवार, 30 सितंबर 2025.
  • महागौरी✓ — मंगलवार, 30 सितंबर 2025.
  • महानवमी✓ — मंगलवार, 30 सितंबर 2025.
  • सरस्वती पूजा / आयुध पूजा✓ — मंगलवार, 30 सितंबर 2025.

हिंदू त्यौहार और महत्वपूर्ण दिन

शहर: Chaguanas (10.5167, -61.4167) | समय क्षेत्र: America/Port_of_Spain

September 2025

01सितंबरसोमवारशुक्ल नवमी (समाप्ति शाम 5:13)
🔔सरस्वती पुस्तक मंडल पूजा (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔ज्येष्ठा गौरी विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔केदार व्रत✓ संपन्न
02सितंबरमंगलवारशुक्ल दशमी (समाप्ति शाम 6:23)
🔔क्षीर व्रतारंभ✓ संपन्न
03सितंबरबुधवारशुक्ल एकादशी (समाप्ति शाम 6:52)
🔔सर्वेषां परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)✓ संपन्न
— श्रवण द्वादशी: उपवास; पारण (व्रत तोड़ना): त्रयोदशी
🔔परिवर्तन एकादशी✓ संपन्न
🔔कट दान✓ संपन्न
04सितंबरगुरुवारशुक्ल द्वादशी (समाप्ति शाम 6:38)
🔔गोत्रिरात्र व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔शक्र द्वादशी✓ संपन्न
🔔शक्र ध्वजोत्थापन✓ संपन्न
🔔विष्णु परिवर्तन महोत्सव✓ संपन्न
🔔कल्कि द्वादशी✓ संपन्न
🔔श्रवण द्वादशी✓ संपन्न
🔔शुक्ल त्रयोदशी उपवास
— उपवास: गुरुवार, 04 सितंबर 2025 05:59 AM - शुक्रवार, 05 सितंबर 2025 05:43 PM✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ शुक्रवार, 05 सितंबर 2025 05:43 PM
🔔वामन जयंती (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
05सितंबरशुक्रवारशुक्ल त्रयोदशी (समाप्ति शाम 5:43)
🔔श्रवण द्वादशी पारण✓ संपन्न
06सितंबरशनिवारशुक्ल चतुर्दशी (समाप्ति शाम 4:11)
🔔कदली व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔अनंत पद्मनाभ व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔गणेश विसर्जन (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔अनंत व्रतारंभ (मध्याह्न)✓ संपन्न
🔔सत्यनारायण स्वामी व्रत✓ संपन्न
07सितंबररविवारशुक्ल पूर्णिमा (समाप्ति दोपहर 2:08)
🔔पूर्णिमा व्रत✓ संपन्न
🔔उमा महेश्वर व्रत✓ संपन्न
🔔उपांग ललिता गौरी व्रत✓ संपन्न
🔔लोकपाल पूजा✓ संपन्न
🔔पितृपक्ष प्रारम्भ✓ संपन्न
08सितंबरसोमवारकृष्ण प्रतिपदा (समाप्ति सुबह 11:42)
🔔अशून्य शयन व्रत (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
09सितंबरमंगलवारकृष्ण द्वितीया (समाप्ति सुबह 8:59)
🔔बृहद्गौरी व्रत✓ संपन्न
🔔कज्जली व्रत✓ संपन्न
🔔विशालाक्षी यात्रा✓ संपन्न
🔔अगस्त्यार्घ्य✓ संपन्न
10सितंबरबुधवारकृष्ण तृतीया (समाप्ति सुबह 6:08)
🔔संकष्टी चतुर्थी — चंद्रोदय: 08:37 PM✓ संपन्न
11सितंबरगुरुवारकृष्ण पंचमी (समाप्ति (12th) रात 12:29)
🔔महा भरणी✓ संपन्न
12सितंबरशुक्रवारकृष्ण षष्ठी (समाप्ति रात 9:53)
🔔कृत्तिका व्रत✓ संपन्न
13सितंबरशनिवारकृष्ण सप्तमी (समाप्ति रात 7:34)
🔔महालक्ष्मी व्रत✓ संपन्न
🔔कालाष्टमी✓ संपन्न
🔔रोहिणी व्रत✓ संपन्न
14सितंबररविवारकृष्ण अष्टमी (समाप्ति शाम 5:36)
🔔सूर्य सावर्णि मन्वादि✓ संपन्न
🔔मध्याष्टमी✓ संपन्न
🔔दुर्गा देवी उद्यापन✓ संपन्न
15सितंबरसोमवारकृष्ण नवमी (समाप्ति शाम 4:01)
🔔महालक्ष्मी व्रत समाप्ति (16वाँ दिन) (भाद्रपद मास)✓ संपन्न
🔔अहीन नवमी✓ संपन्न
🔔व्यतीपात महालय✓ संपन्न
16सितंबरमंगलवारकृष्ण दशमी (समाप्ति दोपहर 2:52)
🔔कन्या संक्रमण (04:19 PM) — पुण्यकाल: 04:19 PM - 06:01 PM✓ संपन्न
17सितंबरबुधवारकृष्ण एकादशी (समाप्ति दोपहर 2:10)
🔔यति महालय✓ संपन्न
🔔सर्वेषां इंदिरा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण)✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): गुरुवार, 18 सितंबर 2025 05:58 AM - 07:57 AM✓ संपन्न
18सितंबरगुरुवारकृष्ण द्वादशी (समाप्ति दोपहर 1:55)
🔔गजच्छाया✓ संपन्न
🔔कलियुगादि✓ संपन्न
19सितंबरशुक्रवारकृष्ण त्रयोदशी (समाप्ति दोपहर 2:07)
🔔मघा त्रयोदशी श्राद्ध✓ संपन्न
🔔शस्त्रहत महालय✓ संपन्न
🔔मघा श्राद्ध✓ संपन्न
🔔कृष्ण त्रयोदशी उपवास
— उपवास: शुक्रवार, 19 सितंबर 2025 05:58 AM - शनिवार, 20 सितंबर 2025 05:58 AM✓ संपन्न
— पारण (व्रत तोड़ना): ≥ शनिवार, 20 सितंबर 2025 05:58 AM
20सितंबरशनिवारकृष्ण चतुर्दशी (समाप्ति दोपहर 2:47)
🔔दर्श श्राद्ध✓ संपन्न
🔔महालय अमावस्या✓ संपन्न
21सितंबररविवारअमावस्या (समाप्ति दोपहर 3:54)
🔔बथुकम्मा प्रारंभ✓ संपन्न
🔔एंगिली पुला बथुकम्मा✓ संपन्न
22सितंबरसोमवारशुक्ल प्रतिपदा (समाप्ति शाम 5:26)
🔔घटस्थापना (आश्विन मास)
05:59 AM - 05:26 PM✓ संपन्न
🔔शारदीय नवरात्रि आरम्भ✓ संपन्न
🔔मातामह श्राद्ध (आश्विन मास)✓ संपन्न
🔔आश्विन मासारंभ✓ संपन्न
🔔नवरात्रि दिन 1 — शैलपुत्री✓ संपन्नशैलपुत्री का अर्थ है 'पर्वत की बेटी'। नवरात्रि में पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है और इन्हें देवी सती का पुनर्जन्म माना जाता है। इनके दो हाथ हैं, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण किए हुए यह नंदी बैल पर विराजमान हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव की সম্মিলিত शक्ति का प्रतीक होने के कारण, इनकी पूजा बल, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए की जाती है।
23सितंबरमंगलवारशुक्ल द्वितीया (समाप्ति रात 7:22)
🔔नवरात्रि दिन 2 — ब्रह्मचारिणी✓ संपन्नदुर्गा देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो तपस्या करने वालों का प्रतीक है। वह एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं, जो उनके तपस्वी जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, जिससे उनकी अपार भक्ति और आत्म-संयम का प्रदर्शन हुआ। भक्त समर्पण और अटूट विश्वास के लिए उनकी पूजा करते हैं।
24सितंबरबुधवारशुक्ल तृतीया (समाप्ति रात 9:36)
🔔नवरात्रि दिन 3 — चंद्रघंटा✓ संपन्नतीसरे दिन पूजी जाने वाली चंद्रघंटा, देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप है। भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम 'घंटे के आकार का अर्धचंद्र' पड़ा। वह दस हाथों में विभिन्न हथियार धारण किए हुए बाघ पर सवार होती हैं, और उनकी तीसरी आंख हमेशा खुली रहती है, जो बुराई से लड़ने की उनकी तत्परता को दर्शाती है। वह अपने भक्तों को शांति और साहस प्रदान करने वाली एक करुणामयी माँ हैं।
25सितंबरगुरुवारशुक्ल चतुर्थी (समाप्ति (26th) रात 12:03)
🔔नवरात्रि दिन 4 — कुष्मांडा✓ संपन्न
🔔मासिक विनायक चतुर्थी✓ संपन्न
26सितंबरशुक्रवारशुक्ल पंचमी (समाप्ति (27th) तड़के 2:34)
🔔ललिता पंचमी (आश्विन मास)✓ संपन्न
🔔गज गौरी व्रत (आश्विन मास)
— प्रवेश समय: 09:37 PM (हस्त नक्षत्र प्रवेश)✓ संपन्न
🔔नवरात्रि दिन 5 — स्कंदमाता✓ संपन्नपांचवां स्वरूप स्कंदमाता हैं, जिन्हें 'अग्नि की देवी' भी कहा जाता है। उनके नाम का अर्थ है 'स्कंद की माता', स्कंद युद्ध के देवता कार्तिकेय हैं। वह शेर पर सवार होती हैं, उनकी चार भुजाएँ हैं, और वह अपनी गोद में बाल स्कंद को धारण करती हैं। स्कंदमाता की पूजा करने से उनके पुत्र स्कंद की भी पूजा हो जाती है, इसलिए भक्तों को दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वह माँ के प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक हैं।
27सितंबरशनिवारशुक्ल षष्ठी (समाप्ति (28th) सुबह 4:57)
🔔नवरात्रि दिन 6 — कात्यायनी✓ संपन्नछठे दिन पूजी जाने वाली कात्यायनी, देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप है। उनका जन्म राक्षस महिषासुर को हराने के लिए देवताओं की সম্মিলিত ऊर्जा से हुआ था। वह शेर की सवारी करती हैं, और अपने हाथों में तलवार और कमल धारण करती हैं। साहस और शक्ति के प्रतीक के रूप में, भक्त व्यक्तिगत चुनौतियों पर विजय पाने और नकारात्मकता को दूर करने के लिए उनकी पूजा करते हैं।
🔔मासिक षष्ठी व्रत✓ संपन्न
28सितंबररविवारशुक्ल सप्तमी (समाप्ति (29th) सुबह 7:02)
🔔नवरात्रि दिन 7 — कालरात्रि✓ संपन्नकालरात्रि देवी दुर्गा का सातवां और सबसे भयानक स्वरूप है। उनका नाम 'काल' (समय/मृत्यु) और 'रात्रि' का संयोजन है। वह अंधकार और अज्ञान को समाप्त करने वाली शक्ति का प्रतीक है। अपने भयानक रूप के बावजूद, उन्हें 'शुभंकरी' (शुभ करने वाली) भी कहा जाता है क्योंकि वह अपने भक्तों को निडर बनाती हैं। उनका वाहन गधा है, और उन्हें सभी बुरी आत्माओं का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
🔔भानु सप्तमी✓ संपन्न
29सितंबरसोमवारशुक्ल सप्तमी (समाप्ति सुबह 7:02)
🔔मासिक दुर्गाष्टमी (आश्विन मास)✓ संपन्न
🔔सरस्वती आवाहन (पूजा प्रारंभ)✓ संपन्न
30सितंबरमंगलवारशुक्ल अष्टमी (समाप्ति सुबह 8:36)
🔔सद्दुल बथुकम्मा✓ संपन्न
🔔बथुकम्मा समापन✓ संपन्न
🔔दुर्गा अष्टमी✓ संपन्नइसे महा अष्टमी भी कहा जाता है, यह नवरात्रि उत्सव का एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन, दुर्गा के आठवें स्वरूप **महागौरी** की पूजा की जाती है। वह शांति और पवित्रता का प्रतीक हैं। माना जाता है कि इसी दिन देवी चामुंडा राक्षसों का संहार करने के लिए दुर्गा के मस्तक से प्रकट हुई थीं। कन्या पूजन (छोटी लड़कियों की पूजा) और अस्त्र पूजा (हथियारों की पूजा) जैसे अनुष्ठान आमतौर पर किए जाते हैं।
🔔महा अष्टमी✓ संपन्न
🔔महागौरी✓ संपन्न
🔔महानवमी✓ संपन्न
🔔सरस्वती पूजा / आयुध पूजा✓ संपन्न

यह त्योहारों और महत्वपूर्ण दिनों का कैलेंडर हिंदू धर्मग्रंथों जैसे निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि में दिए गए नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे दुनिया भर में हिंदू धर्म का पालन करने वाले सभी लोगों के लाभ के लिए बनाया गया है। यदि आपको इस कैलेंडर में किसी त्योहार या किसी महत्वपूर्ण दिन के संबंध में कोई त्रुटि मिलती है, या यदि आपके क्षेत्र से संबंधित कोई त्योहार शामिल नहीं है, तो कृपया मुझे admin@onlinejyotish.com पर ईमेल करके सूचित करें। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।


शब्दावली: हिन्दू कैलेंडर के शब्द

व्रत और त्योहारों को ठीक से मनाने के लिए, ये मुख्य अवधारणाएं आवश्यक हैं:

शब्द अर्थ
तिथि एक चंद्र दिवस। यह चंद्रमा द्वारा सूर्य से 12 डिग्री दूर जाने में लिया गया समय है।
नक्षत्र एक चंद्र हवेली या तारा मंडल जिससे चंद्रमा गुजर रहा है।
पूर्णिमांत / अमावास्यांत पूर्णिमांत महीने पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं (उत्तर भारत)। अमावास्यांत महीने अमावस्या पर समाप्त होते हैं (दक्षिण भारत)।
स्मार्त बनाम वैष्णव विभिन्न संप्रदाय सख्त सूर्योदय नियमों के आधार पर अलग-अलग दिनों में एकादशी/अष्टमी मनाते हैं।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

Frequently Asked Questions

त्योहार इस बात पर निर्भर करते हैं कि सूर्योदय के समय कौन सी तिथि सक्रिय है। आपका स्थानीय मंदिर एक अलग गणना पद्धति (सूर्य सिद्धांत बनाम दृग्गणित) का उपयोग कर सकता है।

स्मार्त उस दिन उपवास करते हैं जब सूर्योदय के समय एकादशी मौजूद होती है। वैष्णव कड़ाई से मांग करते हैं कि दिन सूर्योदय के समय दशमी ओवरलैप से मुक्त हो।

यदि त्योहार के दिन ग्रहण होता है, तो अनुष्ठान, पूजा और उपवास के समय को बदलना पड़ता है।

तिथियां कैसे तैयार की जाती हैं: खगोलीय स्थितियों के लिए स्विस एफेमेरिस का उपयोग किया जाता है। त्योहार-निर्णय के पारंपरिक नियम श्री संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में बनाए रखे जाते हैं। क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।