onlinejyotish.com free Vedic astrology portal

इस महीने का वृश्चिक राशिफल: जून 2026


वृश्चिक राशि - जून 2026 राशिफल

✨ Key Takeaways (इस महीने की मुख्य बातें)

  • अखंड भाग्योदय: 2 जून को भाग्य भाव (9वें घर) में गुरु का उच्च स्थिति प्राप्त करना आपके जीवन में एक मील का पत्थर साबित होगा। पूर्व जन्म के शुभ कर्मों के कारण भाग्य हमेशा आपके साथ रहेगा और आप बड़ी सफलताएं प्राप्त करेंगे।
  • शत्रुओं पर विजय और साहस: 21 जून तक छठे भाव में स्वराशि का मंगल आपको अपार साहस देगा। कोर्ट-कचहरी के मामलों या ऑफिस की राजनीति (Office politics) में आपको पूरी जीत मिलेगी।
  • स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सावधानी: 15 जून के बाद आठवें घर में सूर्य और महीने के अंत में सातवें घर में मंगल का गोचर जीवनसाथी के साथ विवाद और शरीर में गर्मी संबंधी रोग दे सकता है। मौन रहना ही इस महीने आपका सबसे बड़ा हथियार है।

वृश्चिक राशि वालों के लिए जून 2026 एक ही समय में सौभाग्य और परीक्षा दोनों लेकर आ रहा है। पिछले एक साल से आठवें घर में बैठकर कई चुनौतियां देने वाले देवगुरु बृहस्पति, 2 जून को भाग्य भाव यानी 9वें घर (कर्क राशि) में उच्च स्थिति में कदम रखेंगे, जो आपके लिए किसी महावरदान से कम नहीं है। इसके प्रभाव से आर्थिक और पेशेवर बाधाएं ईश्वरीय कृपा से अपने आप दूर हो जाएंगी। हालांकि, आपके राशि स्वामी मंगल महीने के अंत तक शानदार परिणाम देंगे, लेकिन 15 जून के बाद सूर्य का आठवें भाव (8वें घर) में गोचर थोड़ी थकान और अचानक बदलाव ला सकता है, इसलिए सेहत और रिश्तों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।

क्या आप अन्य राशियों का राशिफल देखना चाहते हैं? मासिक राशिफल के होम पेज पर जाएं

जून महीने में वृश्चिक राशि के लिए महत्वपूर्ण ग्रह गोचर और उनके प्रभाव

ग्रह (स्वामित्व) गोचर की स्थिति (भाव) मुख्य कारकत्व / प्रभाव
♃ गुरु (2रे और 5वें भाव के स्वामी) 9वां भाव - उच्च स्थिति (2 जून से कर्क में) भाग्य भाव में उच्च के गुरु। अखंड धन प्राप्ति, सौभाग्य, संतान की उन्नति और ईश्वरीय कृपा।
♂ मंगल (1ले और 6ठे भाव के स्वामी - राशि स्वामी) 6ठा और 7वां भाव 21 जून तक 6ठे भाव में (शत्रुओं पर जीत, रोगों से मुक्ति)। उसके बाद 7वें भाव (वृषभ) में दांपत्य जीवन में अहंकार (ईगो) और क्रोध।
☉ सूर्य (10वें भाव के स्वामी) 7वां और 8वां भाव 15 जून तक 7वें भाव में (पार्टनर के साथ मतभेद)। उसके बाद 8वें भाव (मिथुन) में गोचर से अचानक बदलाव और आंखों की समस्या।
♀ शुक्र (7वें और 12वें भाव के स्वामी) 8वां और 9वां भाव 8 जून तक 8वें भाव में खर्च। उसके बाद 9वें भाव (कर्क) में उच्च के गुरु के साथ युति, लंबी यात्राएं और आनंद।
☿ बुध (8वें और 11वें भाव के स्वामी) 8वां और 9वां भाव 22 जून तक 8वें भाव में अपनी ही राशि में (रिसर्च और गुप्तचर कार्यों में लाभ)। उसके बाद 9वें भाव में भाग्य का साथ।
♄ शनि (3रे और 4थे भाव के स्वामी) 5वां भाव (मीन - यथावत) पंचम भाव में शनि। संतान के प्रति जिम्मेदारी, शेयर मार्केट में धीरज और स्थिर निर्णय।


करियर और नौकरी

वृश्चिक राशि वालों के लिए इस जून के महीने में पेशेवर तौर पर मिश्रित, लेकिन अनुकूल परिणाम देखने को मिलेंगे। कर्म भाव (10वें घर) में केतु की उपस्थिति के कारण आपको अपनी नौकरी के प्रति थोड़ी अरुचि (Detachment) महसूस हो सकती है। लेकिन, 21 जून तक छठे घर में स्थित आपके राशि स्वामी मंगल आपमें एक गजब का जुझारूपन (Fighting spirit) पैदा करेंगे। आप ऑफिस की राजनीति (Office politics) का डटकर सामना करेंगे और जीत हासिल करेंगे।

दशमेश सूर्य के 15 जून के बाद आठवें भाव में जाने से सरकारी कर्मचारियों या उच्च अधिकारियों के अचानक तबादले (Transfers) होने की संभावना है। लेकिन भाग्य भाव (9वें घर) में बैठे उच्च के गुरु की सीधी दृष्टि आपके लग्न पर होने के कारण, आप हर परिस्थिति को अपने विवेक से पार कर लेंगे और वरिष्ठ अधिकारियों का भरोसा जीतेंगे।

व्यापार और स्वरोजगार

व्यापारियों के लिए इस महीने का दूसरा भाग (उत्तरार्ध) बेहद शानदार रहने वाला है। 8 जून को सप्तमेश (व्यापार भाव के स्वामी) शुक्र का भाग्य भाव (9वें घर) में गोचर कर उच्च के गुरु से मिलना एक बेहतरीन योग है। इससे आयात-निर्यात (इंपोर्ट-एक्सपोर्ट), यात्रा (ट्रेवल्स), शिक्षा और कंसल्टेंसी के व्यवसाय से जुड़े लोगों को उम्मीद से ज्यादा ग्राहक मिलेंगे। विदेशी कंपनियों के साथ लाभदायक समझौते होंगे।

हालांकि, 21 जून को मंगल का सातवें भाव में प्रवेश करने से पार्टनरशिप के व्यापार में थोड़ी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। भागीदारों के साथ अकारण बहस हो सकती है। इसलिए अपने फैसले दूसरों पर थोपने की कोशिश न करें।

आर्थिक स्थिति और धन लाभ

आर्थिक रूप से आपका स्तर अचानक बहुत ऊपर उठने वाला है। धन और पंचम भाव के स्वामी गुरु का भाग्य भाव में उच्च स्थिति प्राप्त करना एक महा धन योग बनाता है। पैतृक संपत्ति (पित्रार्जित प्रॉपर्टी) से लाभ होगा। अतीत में कहीं फंसा हुआ या अटका हुआ पैसा इस महीने आपके हाथ में आ जाएगा।

आठवें भाव में सूर्य और बुध के गोचर के कारण, बीमा (इंश्योरेंस) या रिटायरमेंट फंड (पीएफ आदि) के माध्यम से अचानक एकमुश्त बड़ी रकम मिलने की संभावना है। 9वें भाव में गुरु-शुक्र की युति से आप तीर्थयात्राओं या घर में किसी मांगलिक कार्य के लिए खुशी-खुशी पैसे खर्च करेंगे।

स्वास्थ्य और कल्याण

महीने के पहले भाग में छठे घर में मंगल के गोचर के कारण आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बहुत मजबूत रहेगी। कोई भी छोटी-मोटी बीमारी आसानी से दूर हो जाएगी। लेकिन 15 जून के बाद सूर्य का आठवें घर (मिथुन राशि) में गोचर स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने का संकेत देता है। आठवें भाव में सूर्य की गर्मी के प्रभाव से आंखों में जलन, पेट में गर्मी या गैस्ट्रिक की समस्या और तेज सिरदर्द हो सकता है।

21 जून को मंगल के सातवें घर में जाने के बाद आपके स्वभाव में अकारण क्रोध (Aggression) बढ़ सकता है। ब्लड प्रेशर (BP) की समस्या वाले लोगों को आराम करना चाहिए। ठंडी तासीर वाली चीजों और छाछ का अधिक सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद रहेगा।

परिवार और व्यक्तिगत संबंध

पारिवारिक जीवन में, 9वें घर में बैठे उच्च के गुरु आपके पिता के स्वास्थ्य में सुधार लाएंगे और उनके साथ आपके संबंधों को और अधिक मधुर बनाएंगे। आप परिवार के सदस्यों के साथ किसी तीर्थयात्रा या धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं।

लेकिन, आपका वैवाहिक जीवन इस महीने अग्निपरीक्षा से गुजर सकता है। 15 जून तक 7वें घर में सूर्य, और 21 जून से 7वें घर में मंगल का गोचर जीवनसाथी के साथ भारी ईगो क्लैश (Ego clashes) पैदा करेगा। हर छोटी बात पर बहस हो सकती है। इस समय "मेरी ही बात सही है" वाली जिद छोड़कर मौन रहना ही आपके दांपत्य जीवन को शांतिपूर्ण बनाए रखने का एकमात्र तरीका है।

शिक्षा और छात्र

विद्या के कारक और पंचमेश गुरु का उच्च स्थिति में होना छात्रों के लिए सबसे उत्कृष्ट समय है। विशेषकर जो छात्र विदेश में उच्च शिक्षा (MS/PhD आदि) प्राप्त करना चाहते हैं, उनके प्रयास शत-प्रतिशत सफल होंगे। आपकी बुद्धि कुशाग्र होगी और आप प्रतियोगी परीक्षाओं में आसानी से सफल होंगे। 8वें भाव में बुध के गोचर से रिसर्च स्कॉलर्स (अनुसंधानकर्ताओं) को अपनी परियोजनाओं (प्रोजेक्ट्स) में शानदार प्रगति देखने को मिलेगी।

जून 2026 के लिए वैदिक उपाय

भाग्य भाव में बने उच्च गुरु योग का पूरा लाभ उठाने और अष्टम सूर्य तथा सप्तम मंगल से होने वाले स्वास्थ्य एवं वैवाहिक विवादों से बचने के लिए इन वैदिक उपायों को अपनाएं:

  • गुरु आराधना: 9वें घर में बैठे उच्च के गुरु की कृपा और पूर्व जन्म के पुण्यों का लाभ पाने के लिए हर गुरुवार को पीले कपड़े पहनकर श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र या दत्तात्रेय स्तोत्र का पाठ करें।
  • सूर्य नमस्कार: 15 जून के बाद आठवें घर में सूर्य के कारण होने वाली गर्मी और आंखों की समस्याओं से बचने के लिए, हर सुबह आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करते हुए सूर्य नमस्कार करें।
  • मंगल दोष शांति: 21 जून के बाद जीवनसाथी के साथ विवादों से बचने के लिए, हर मंगलवार को भगवान कार्तिकेय (सुब्रमण्यम स्वामी) या हनुमान जी के दर्शन कर लाल फूलों से पूजा करें। जीवनसाथी से बात करते समय अपना लहजा विनम्र रखें।

Frequently Asked Questions

2 जून को देवगुरु बृहस्पति का भाग्य भाव यानी 9वें घर (कर्क राशि) में उच्च स्थिति में प्रवेश करना वृश्चिक राशि वालों के लिए एक महा राजयोग है। किस्मत हर कदम पर आपका साथ देगी। विदेश यात्राओं, उच्च शिक्षा और तीर्थयात्राओं के लिए यह सबसे अनुकूल समय है।

कर्म भाव (10वें घर) में केतु के होने से काम में थोड़ी अरुचि (उदासीनता) हो सकती है, लेकिन 21 जून तक 6ठे भाव में बैठे मंगल आपमें लड़ने का गजब का जज्बा भरेंगे। ऑफिस की राजनीति या विरोधियों पर आप पूरी तरह हावी रहेंगे। आपकी मेहनत को उच्च अधिकारियों से उचित पहचान मिलेगी।

15 जून को सूर्य का आठवें भाव (8वें घर) में और 21 जून को मंगल का सातवें भाव (7वें घर) में गोचर होगा। इसके कारण महीने के अंत में जीवनसाथी के साथ तीखी बहस हो सकती है। स्वास्थ्य के मोर्चे पर शरीर में गर्मी बढ़ना, आंखों या पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है।
Astrologer Santhosh Kumar Sharma
भविष्यवाणी प्रदान करने वाले: श्री संतोष कुमार शर्मा

वैदिक ज्योतिष (दृक सिद्धांत) और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में विशेषज्ञ। अनुभव: 26 वर्ष।

नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।